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'बल्लेबाज़ी क्रम में बदलाव से फ़ायदा' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के स्टार बल्लेबाज़ युवराज सिंह ने कहा है कि बल्लेबाज़ी क्रम में बदलाव के कारण एक दिवसीय मैचों में उनका प्रदर्शन बेहतर हुआ है. बल्लेबाज़ी क्रम में तीसरे, चौथे और पाँचवें नंबर पर बल्लेबाज़ी करते हुए युवराज सिंह ने शानदार प्रदर्शन किया और बड़ा स्कोर भी खड़ा किया. अपने शानदार प्रदर्शन के कारण युवराज सिंह को दक्षिण अफ़्रीका, पाकिस्तान और इंग्लैंड के ख़िलाफ़ सिरीज़ में मैन ऑफ़ द सिरीज़ का पुरस्कार भी मिला. युवराज ने बताया, "पहले मैं नंबर छह पर बल्लेबाज़ी करता था. उस समय छह की रन गति से रन बनाने होते थे और चार विकेट गिर चुके होते थे. और ओवर होते थे सिर्फ़ 10. इस स्थिति में आपको सिर्फ़ शॉट ही लगाने होते थे." बदली परिस्थिति 24 वर्षीय युवराज सिंह ने बताया कि ऐसी परिस्थिति में पारी को खड़ा करने का मौक़ा नहीं मिलता था. लेकिन अब स्थिति बदल गई है. युवराज का मानना है कि अब वे आख़िर तक बल्लेबाज़ी करने की कोशिश करते हैं और ऐसा इसलिए भी संभव है क्योंकि मुझे बल्लेबाज़ी क्रम में ऊपर आने का मौक़ा मिल रहा है. युवराज सिंह ने पिछले 15 मैचों में 66 की औसत से 727 रन बनाए हैं जिसमें तीन शतक भी शामिल हैं. इन मैचों में भारत के ख़िलाफ़ दक्षिण अफ़्रीका, इंग्लैंड और पाकिस्तान जैसी टीमें थी. युवराज सिंह का कहना है कि अब वे अपनी बल्लेबाज़ी के बारे में ज़्यादा सोच-विचार करते हैं और उस ओर ध्यान भी दे रहे हैं जहाँ सुधार की गुंजाइश है. | इससे जुड़ी ख़बरें युवराज और भज्जी की होली15 मार्च, 2006 | खेल युवराज ने पारी सँभाली, स्थिति मज़बूत20 दिसंबर, 2005 | खेल फ़ाइनल में जान लगा देंगे- युवराज08 अगस्त, 2005 | खेल युवराज सिंह हैं गांगुली की पहली पसंद 13 जून, 2004 | खेल चल गया युवराज का जादू 06 अप्रैल, 2004 | खेल 'आ बैल मुझे मार'14 अप्रैल, 2004 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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