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चल गया युवराज का जादू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक ऐसा खिलाड़ी जिसके बल्ले से सर्वश्रेष्ठ पारी उस समय निकलती है जब टीम को उसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है. पाकिस्तान के ख़िलाफ़ लाहौर टेस्ट में भी ऐसा ही हुआ जब शीर्ष भारतीय खिलाड़ी बिना कुछ ख़ास किए पवेलियन लौट चुके थे, युवराज का बल्ला बोला और भारत सम्मानजनक स्कोर तक पहुँचने में कामयाब रहा. जब वे विकेट पर पहुँचे थे तो भारत का स्कोर था चार विकेट पर 94 रन और उनके पिच पर रहते स्कोर हो गया था सात विकेट पर 147 रन. लेकिन युवराज ने स्पिनर दानिश कनेरिया को दो छक्के मार कर अपनी मंशा जता दी. अच्छी गेंदबाज़ी कर रहे मोहम्मद समी को भी युवराज ने नहीं छोड़ा. उनकी गेंद पर युवराज की कवर ड्राइव देखने लायक थी. अपने तीसरे टेस्ट में अपना पहला टेस्ट शतक लगाकर युवराज ने साबित कर दिया है कि वे सिर्फ़ वनडे ही नहीं टेस्ट में भी अपनी उपयोगिता साबित कर सकते हैं. यादगार शुरुआत जब युवराज सिंह अपनी पहली एक दिवसीय पारी खेलने मैदान पर उतरे थे तो उनकी उम्र 19 साल की भी नहीं थी.
मौक़ा था नैरोबी में चल रही प्रतिष्ठित आईसीसी नॉक आउट चैंपियनशिप का और सामने थी विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया की टीम. हालाँकि उन्होंने अपना पहला वनडे मैच इसी प्रतियोगिता में कीनिया के ख़िलाफ़ खेला था लेकिन बल्लेबाज़ी करने का मौक़ा उन्हें ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ ही मिला. युवा युवराज ने उस समय भी मैदान पर जिस आत्मविश्वास का परिचय दिया था वह अपने आप में अनोखा था. उन्होंने 80 गेंदों पर 84 रनों की पारी खेली जो निर्णायक साबित हुई और भारत मज़बूत ऑस्ट्रेलिया की टीम को 20 रनों के अंतर से मात देने में सक्षम रहा. ठप्पा लेकिन अक्तूबर 2000 में खेले गए इस मैच के बाद जैसे युवराज पर वनडे मैचों के विशेषज्ञ बल्लेबाज़ का ठप्पा लग गया. ठीक तीन साल बाद अक्तूबर 2003 में युवराज सिंह को न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ अपना पहला टेस्ट खेलने का मौक़ा मिला. इस मैच में युवराज का प्रदर्शन कोई ख़ास नहीं रहा और उन्होंने 20 और नाबाद पाँच रनों की पारी खेली. पाकिस्तान के ख़िलाफ़ टेस्ट मैच में उन्हें मौक़ा इसलिए मिला क्योंकि कप्तान सौरभ गांगुली घायल हैं. अब उनके शतक के बाद अब देखने वाली बात होगी कि तीसरे टेस्ट में अगर गांगुली खेलते हैं तो उन्हें किसकी जगह पर टीम में शामिल किया जाएगा. |
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