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मंगलवार, 18 अप्रैल, 2006 को 22:26 GMT तक के समाचार
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नाइजीरिया में जमती क्रिकेट की जड़ें

नाइजीरिया में क्रिकेट के मुक़ाबले फुटबॉल काफ़ी लोकप्रिय है
अनिश्चिताओं से भरे खेल क्रिकेट की पौध नाइजीरिया में निश्चितता के साथ पनपने लगी है.

फुटबॉल के रोमांच से हालांकि उसका कोई मुक़बला नहीं है लेकिन क्रिकेट खेलने वालों की तादात में बढ़ोतरी हो ही रही है.

यहाँ फुटबॉल के प्रति जुनून का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि किसी भी महत्वपूर्ण मैच की चर्चा सड़क से लेकर संसद तक में होती है, लेकिन फुटबॉल प्रेमियों के देश नाइजीरिया में क्रिकेट धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहा है.

क्रिकेट के प्रति लगाव के बारे में लागोस स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष क्वेसी सेगो का कहना है “नाइजीरिया में क्रिकेट की शुरुआत 1904 में हुई थी लेकिन ब्रिटिश राज के दौरान इसे पूरी तरह से नहीं अपनाया जा सका और 1960 में आज़ादी मिलने के बाद कई कारणों से क्रिकेट पर अधिक ध्यान नहीं दिया जा सका."

 2003 के बाद से यहाँ क्रिकेट टूर्नामेंट लगातर खेले जा रहे है और हम अपनी टीम की पुरानी किटें ज़रुरतमंद नाइजीरियाई खिलाड़ियों को देकर उनका हौसला बढ़ाने की कोशिश करते है
प्रदीप बांदोडकर

वे कहते हैं कि अब पिछले कुछ वर्षों से क्रिकेट की ओर रुझान बढ़ा है और नौजवान खिलाड़ी सामने आ रहे हैं.

क्रिकेट खेलने के लिए कई युवा खिलाड़ी मीलों दूर से लागोस आते हैं और अपना जेब ख़र्च बस के किराए पर ख़र्च करते हैं.

क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए हाउज़ैट क्रिकेट फॉउंडेशन एक गैर-सरकारी नाइजीरियाई संस्था है जो युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने का काम करती है और देश में उच्चतर माध्यमिक स्कूल चैंपियनशिप का आयोजन करती है.

प्रयास

नाइजीरिया प्रतिवर्ष घाना, सियरा लियोन और गांबिया के साथ पश्चिमी अफ्रीका क्रिकेट कप प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के साथ-साथ विश्वकप क्रिकेट प्रतियोगिता के क्वालिफाइंग मुक़बले में भी भाग लेता है.

नाइजीरिया में लगभग आठ राज्यों में क्रिकेट खेला जाता है और उसकी अपनी राष्ट्रीय क्रिकेट टीम भी है.

 नाइजीरिया में क्रिकेट का भविष्य उज्ज्वल है और प्रतिभावान और मेहनती खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है, लेकिन सरकार और ग़ैर सरकारी क्षेत्र की ओर से और अधिक साधन उपलब्ध कराए जाने की ज़रुरत है
एन्ड्यूरैंस ओफैम

इस टीम के कप्तान एन्ड्यूरैंस ओफेम का मानना है कि “नाइजीरिया में क्रिकेट का भविष्य उज्ज्वल है और प्रतिभावान और मेहनती खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है, लेकिन सरकार और ग़ैर सरकारी क्षेत्र की ओर से और अधिक साधन उपलब्ध कराए जाने की ज़रुरत है”.

नाइजीरियाई क्रिकेट में पैसा और प्रतिष्ठा दोनों ही आकर्षणों का अभाव होते हुए भी इस खेल की ओर मुड़ने की बात पर एक दूसरे खिलाड़ी जॉन तामूनो को कहना है कि “फुटबॉल में बढ़ती राजनीति और गलाकाट प्रतियोगिता ने ही उन्हें और दूसरे खिलाड़ियों को क्रिकेट की ओर मुड़ने पर मजबूर किया है”.

नाइजीरिया मे क्रिकेट को बढ़ावा देने में प्रवासी भारतीयों का भी बड़ा हाथ रहा है. लागोस में ऐसी दो टीमें हैं जिनमे भारतीय और पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ी हैं.

लागोस इंडियन क्रिकेट क्लब के सदस्य प्रदीप बांडोदकर का कहना है “2003 के बाद से यहाँ क्रिकेट टूर्नामेंट लगातर खेले जा रहे है और हम अपनी टीम की पुरानी किटें ज़रुरतमंद नाइजीरियाई खिलाड़ियों को देकर उनका हौसला बढ़ाने की कोशिश करते है."

युवा खिलाड़ी दूर-दूर से लागोस आते हैं क्रिकेट खेलने

उनका मानना है कि “अगर मैचों का प्रसारण टेलीविज़न पर किय़ा जाए तो इस खेल को और बढ़ावा मिल सकता है, इससे इस खेल के प्रति लोगों में जागरुकता भी बढ़ेगी”.

लागोस राज्य क्रिकेट परिषद ने नाइजीरिया में क्रिकेट को बढावा देने के लिए भारत सरकार से भी मदद की अपील की है.

परिषद के अध्यक्ष जार्ज विल्टशर का मानना है कि “सरकार के खेल नीतियों के प्रति उदासीन रवैए, अर्थव्यवस्था की बिगड़ती हालत और क्रिकेट के प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय के आभाव के कारण नाइजीरिया में क्रिकेट को सही तरीक़े से बढ़ावा नहीं मिल पाया है”.

उधर परिषद के उपाध्यक्ष क्वेसी सेगो का कहना है कि क्रिकेट के प्रति रइसों का खेल होने की धारणा को तोड़ना भी इसके विकास के लिए ज़रुरी है.

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