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एडिडास के जूतों पर विवाद | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
खेलों के लिए साजो सामान बनाने वाली कंपनी एडिडास को अपने नए जूतों पर शिकायतों का सामना करना पड़ रहा है. कुछ लोगों का कहना है कि एडिडास के नए जूतों पर जो कार्टून छवि बनाई गई है वो एशियाई युवकों का मजाक उड़ाने वाली है. कंपनी के नए जूतों पर पीले रंग से बना एक कार्टून है जिसमें एक एशियाई युवक का चेहरा है जिसके लंबे बाल हैं, सूअर जैसी मोटी नाक है और आगे की तरफ निकले हुए दांत हैं. एशियाई-अमरीकी समूहों ने कंपनी से शिकायत की है कि यह चित्रण ग़लत है. एडिडास का कहना है कि उसका किसी भी समूह की भावनाओं को आहत करने का इरादा नहीं था. ये कार्टून अमरीका के जाने माने कार्टूनिस्ट बैरी मैक्गी ने डिजाइन किया है जो इसका उपयोग नस्लवाद विरोधी डाक्यूमेंट्री में कर चुके हैं. पूरे जूते की डिजाईनिंग की है अमरीकी फर्म हफ ने. एडिडास की प्रवक्ता ने सान जोस मर्करी न्यूज़ से कहा है कि कंपनी किसी भी व्यक्ति या समूह की भावनाओं को आहत नहीं करना चाहती है. इन कार्टूनों वाले एडिडास के नए जूतों की शृंखला को येलो सीरिज़ वाई 1 हफ नाम दिया गया है और ऐसे सिर्फ 1000 जोड़े जूते बनाए गए हैं. सैन फ्रांसिस्को में चाइनीज़ फॉर एफरमेटिव एक्शन के मुख्य कार्यकारी विनसेंट पान कहते है कि आधुनिक दौर में यह बहुत दुखद है कि एडिडास जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनी ऐसे कार्टून वाले जूते बना रही है. इंटरनेट पर भी इन जूतों की कड़ी आलोचना हो रही है लेकिन हफ के मालिक कीथ हफनाजेल ने इन आलोचनाओं का इंटरनेट का कूड़ा कह कर ख़ारिज़ कर दिया है. हफ़नाजेल कहते हैं कि इसी छवि का उपयोग नस्लवाद विरोधी अभियान में किया गया था तो फिर नस्लवादी कैसे हो सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें हुसैन ने जनता से माफ़ी माँगी08 फ़रवरी, 2006 | मनोरंजन बयान ने बनाया 'देवी' से खलनायिका18 नवंबर, 2005 | मनोरंजन एक और पुस्तक विवादों के घेरे में04 दिसंबर, 2003 | मनोरंजन पाकिस्तानी महिलाओं के लिए आसान नहीं मॉडलिंग15 जुलाई, 2004 | मनोरंजन फ़ैशन के ज़रिए भारत-पाक संबंध सुधारने की कोशिश02 अक्तूबर, 2003 को | मनोरंजन कचरे से फ़ैशन तक का सफ़र24 फ़रवरी, 2006 | मनोरंजन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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