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हार के बावजूद सुर्खियों में सानिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऐसा कभी-कभी ही होता है कि किसी मुक़ाबले के बाद, उसकी ख़बर में, चर्चा जीतनेवाले से अधिक हारनेवाली की रहती हो. वर्ष 2005 की विंबलडन टेनिस प्रतियोगिता में सानिया मिर्ज़ा और स्वेतलाना कुज़्नेत्सोवा के मैच के बाद ऐसा ही हुआ. सानिया महिला एकल मुक़ाबले के दूसरे दौर में हार ज़रूर गईं लेकिन हारकर भी ख़बरें उनको ही लेकर बनीं. सेंटर कोर्ट पर 137 मिनट तक चले मैच में आख़िरी शॉट तक कह सकना मुश्किल था कि जीतेगा कौन. लेकिन कड़े मुक़ाबले के बाद सानिया 4-6, 7-6 (7-4) और 4-6 से मैच हार गईं. हारने के बाद सानिया जब दर्शकों का अभिवादन करती हुई ग्राउंड से बाहर निकलीं तो बीबीसी टेलीविज़न पर कॉमेन्टेटर ने कहा,"सानिया मिर्ज़ा, ये नाम याद रखें, क्योंकि अभी हमें इस खिलाड़ी से और भी बहुत कुछ देखने को मिलेगा". जहाँ तक दर्शकों का प्रश्न था तो स्पष्ट लग रहा था कि वो सानिया का हौसला बढ़ाने का कोई अवसर हाथ से नहीं जाने दे रहे थे. और ये स्वाभाविक ही था क्योंकि आँकड़े कुछ और कहते थे. स्वेतलाना दुनिया में पाँचवें नंबर की खिलाड़ी थीं और दूसरी तरफ़ सानिया का नंबर 75वाँ था, स्वेतलाना ने पिछले साल अमरीकी ओपन जीता और इस साल ऑस्ट्रेलियाई ओपन का डबल्स, और वहीं सानिया पहली बार विंबलडन सिंगल्स खेलने उतरी थीं. ऐसे में मुक़ाबला बराबरी का हो, तो फिर पीठ किसकी थपथपाई जाए, इसमें संदेह नहीं रह जाता. सुर्ख़ियाँ मैच की अगली सुबह ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अख़बारों ने भी सानिया की प्रतिभा का सम्मान किया. 'गार्डियन' और 'इंडिपेंडेंट' दोनों ने अपने खेल पन्नों पर सानिया की तस्वीर प्रमुखता से लगाई है. गार्डियन का खेल पन्ने का शीर्षक कहता है - Magical Mirza the centre of attention. अख़बार रिपोर्ट में लिखता है,"ये विश्वास करना मुश्किल था कि सानिया मिर्ज़ा वाकई कल हार जानेवाली खिलाड़ी थीं". साथ ही अख़बार ने खेल समीक्षक बैरी कोवन का एक विशेष लेख प्रकाशित किया है जिसमें सानिया और कुज़्नेत्सोवा की शैलियों की समीक्षा की गई है. कोवन ने सानिया की रैकेट पर पकड़ और विशेष रूप से उनके फ़ोरहैंड शॉट्स की तारीफ़ की है. उन्होंने लिखा है कि अगर सानिया की सर्विस बेहतर होती तो वो मैच जीत सकती थीं. वहीं अख़बार टाइम्स ने सानिया के बारे में लिखा है कि वे टेनिस जगत में और आगे जा सकती हैं मगर उनको अपनी टाली जा सकनेवाली ग़लतियों पर क़ाबू पाना होगा. टाइम्स लिखता है,"सेंटर कोर्ट अभी उस युवा खिलाड़ी के खेल के और खेल देखना चाहता है जिसने कोर्ट पर उतरकर ना केवल रिकॉर्ड बल्कि भारतीय महिलाओं की पारंपरिक छवि को भी तोड़ा". उधर इंडिपेंडेंट ने लिखा तो अधिक है रूसी खिलाड़ी के खेल के बारे में लेकिन तस्वीर सानिया की ही प्रकाशित की है. सानिया के मैच के बारे में इंडिपेंडेंट लिखता है कि स्वेतलाना का परिवार एक एथलीट परिवार रहा है और शायद इसी कारण से वे आगे निकल गईं. अख़बार ने लिखा है कि स्वेतलाना के पिता ने छह ओलंपिक और विश्व साइक्लिंग विजेताओं को प्रशिक्षण दिया है. इनमें स्वेतलाना की माँ भी शामिल हैं जिनके नाम साइक्लिंग के 20 विश्व रिकॉर्ड हैं. वहीं स्वेतलाना के भाई ने अटलांटा ओलंपिक में साइक्लिंग का रजत पदक जीता था. अख़बार के अनुसार स्वेतलाना इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण पिछड़ने के बावजूद मैच में आगे निकल गईं. |
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