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गुरुवार, 02 जून, 2005 को 10:55 GMT तक के समाचार
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सक्रिय है ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट कोच फ़ैक्ट्री
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ग्रेग चैपल को भारतीय क्रिकेट टीम का कोच बनाए जाने का आमतौर पर स्वागत हुआ है
ऑस्ट्रेलिया न सिर्फ़ एकदिवसीय और टेस्ट क्रिकेट मैचों का बादशाह है, बल्कि अपने कोचों के ज़रिए भी वो क्रिकेट की दुनिया पर राज कर रहा है.

ग्रेग चैपल और टॉम मूडी की हाल में हुई नियुक्तियों ने इस समय कार्यरत ऑस्ट्रेलियाई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कोचों की संख्या बढ़कर चार हो गई है.

पिछले महीने चैपल को भारतीय क्रिकेट टीम का कोच नियुक्त किया गया, जबकि मूडी श्रीलंका के कोच नियुक्त किए गए.

मूडी भी भारतीय टीम के कोच का पद सँभालने के इच्छुक चार उम्मीदवारों में शामिल थे और चयन बोर्ड के सामने इंटरव्यू के लिए उपस्थित हुए थे.

मूडी ने श्रीलंका में एक और ऑस्ट्रेलियाई कोच जॉन डॉयसन की जगह ली है.

वेस्टइंडीज़ और बांग्लादेश की टीम के कोच भी ऑस्ट्रेलियाई ही हैं.

बेनेट किंग वेस्टइंडीज़ टीम को प्रशिक्षित कर रहे हैं, जबकि क्रिकेट जगत में अपनै पैर जमाने की कोशिश कर रही बांग्लादेश की टीम की देखभाल का जिम्मा डैव व्हाटमोर को मिला है.

उल्लेखनीय है कि 1996 में श्रीलंका जब विश्व चैंपियन बना था तो टीम के प्रशिक्षक व्हाटमोर ही थे.

ऑस्ट्रेलियाई कोच फ़ैक्ट्री

आख़िर ऑस्ट्रेलिया कैसे लगातार बेहतरीन कोच पैदा करता रहता है, इसके जवाब में पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कोच ज्यॉफ़ मार्श कहते हैं कि उनके देश की क्रिकेट व्यवस्था को ही इसका श्रेय दिया जाना चाहिए.

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मूडी भारत का कोच नहीं बन पाए, लेकिन पड़ोसी देश श्रीलंका की टीम का जिम्मा मिला

मार्श ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, "ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की विशेषता ये है कि हम सबको खेल में शामिल रखते हैं."

ज़िम्बाब्वे की टीम को भी प्रशिक्षण दे चुके मार्श ने कहा कि कई ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर स्वभाव से ही कोचिंग देने में मज़ा लेते हैं, और कइओं के लिए चुनौती भरी ज़िम्मेदारी होने के कारण कोचिंग कैरियर आकर्षित करता है.

माना जाता है कि ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों की कोचिंग की महारत को सबसे पहले बॉब सिम्पसन ने धार दी.

सिम्पसन ने 1980 के दशक में एक कमज़ोर ऑस्ट्रेलियाई टीम को चैम्पियन में बदल डालने का कारनामा किया.

उन्होंने एलन बॉर्डर की टीम में अनुशासन, अभ्यास, फ़िटनेस आदि जैसी विशेषताएँ भरी और ऑस्ट्रेलिया ने 1987 में विश्व कप पर क़ब्ज़ा किया.

ऑस्ट्रेलियाई कोच न सिर्फ़ खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और अभ्यास पर ध्यान देते हैं, बल्कि उनका ज़ोर टीम प्रबंधन और विरोधी टीमों के विश्लेषण पर भी होता है.

इन्हीं सब ख़ासियतों का कमाल है कि जब इंग्लैंड ने अपनी क्रिकेट अकादमी बनाई तो प्रशिक्षक का काम उन्होंने एक ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर रॉडनी मॉर्श को सौंपा.

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