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प्रसारण अधिकार मामले पर स्थगनादेश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तमिलनाडु में चेन्नई उच्च न्यायालय ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड को 2008 तक होने वाले अंतरराष्ट्रीय मैचों के प्रसारण अधिकारों के लिए ताज़ा निविदाएँ आमंत्रित किए जाने आदेश पर स्थगनादेश दे दिया है. इससे पहले एक न्यायाधीश वाले खंडपीठ ने बोर्ड को आदेश दिया था कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड वर्ष 2008 तक होने वाले अंतरराष्ट्रीय मैचों के प्रसारण अधिकार देने के लिए नए सिरे से निविदाएँ आमंत्रित करे. चेन्नई उच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों वाले खंडपीठ ने कहा कि क्रिकेट बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया की उस याचिका पर सुनवाई की भी इजाज़त दी. इस याचिका में डालमिया ने अदालत के उस आदेश को चुनौती दी जिसमें निविदा प्रक्रिया को रद्द किए जाने के लिए उन्हें ही ज़िम्मेदार ठहराया गया था. खंडपीठ ने ज़ी टेलीफ़िल्म्स लिमिटेड की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया जिसमें एक न्यायाधीश के फ़ैसले के अनुसार मैचों के प्रसारण अधिकार इसी कंपनी को दिए जाने की माँग की गई थी. हालाँकि ज़ी टेलीफ़िल्म्स लिमिटेड चेन्नई उच्च न्यायालय के सोमवार को दिए गए इस फ़ैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे सकता है. क्रिकेट बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय मैचों के प्रसारण अधिकार ज़ी टेलीफ़िल्म्स को देने की घोषणा कर दी थी लेकिन बाद में पूरी निविदा प्रक्रिया रद्द कर दी थी. ज़ी टेलीफ़िल्म्स लिमिटेड ने निविदा प्रक्रिया को रद्द किए जाने के बोर्ड के फ़ैसले को अदालत में चुनौती दी थी. उसी मामले में एक न्यायाधीश वाले खंडपीठ ने इसी साल मार्च में फ़ैसला दिया था कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड की कार्रवाई अन्यायपूर्ण और ग़ैरक़ानूनी है. |
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