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बंगलौर में भी इंटरनेट की किल्लत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शुक्रवार को यूनुस ख़ान का दोहरा शतक देख कर सभी वाह वाह कर रहे थे. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन शहरयार ख़ान भी यूनुस की बल्लेबाज़ी का मज़ा ले रहे थे, उनके पीछे बैठे थे पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज़ ज़हीर अब्बास. यूनुस की बल्लेबाज़ी देखते देखते शहरयान ख़ान अचानक पीछे मुड़े और ज़हीर अब्बास से कहा, यार ज़हीर, इसे देख कर तुम्हारी याद आ गई, ज़हीर मुस्कुरा दिए. लेकिन तभी यूनुस ने ऑफ़ साइड की एक गेंद को मिडविकेट की दिशा में खेला तो ज़हीर को भी मानना ही पड़ा, हाँ ये शॉट तो इसने बिल्कुल मेरी तरह खेला. बंगलौर और इंटरनेट धर्मशाला, मोहाली और कोलकाता के बाद जब दुनिया भर से आए पत्रकार भारत और पाकिस्तान के आख़िरी टेस्ट के लिए बंगलौर पहुँचे तो इस उम्मीद में थे कि यहाँ उन्हें सर्वश्रेष्ठ सुविधाएँ मिलेंगी, बंगलौर आख़िर भारत का आईटी शहर जो है. हर कोई यही सोच कर निश्चिंत था कि यहाँ इंटरनेट और टेलीफ़ोन वग़ैरह के लिए उन्हें जद्दोजहद नहीं करनी पड़ेगी. दरअसल इंटरनेट, टेलीफ़ोन और फ़ैक्स आज कल पत्रकारों की जीवन रेखा बन गए हैं क्योंकि अपनी ख़बरें और रिपोर्टें भेजने के लिए वो पूरी तरह इन पर निर्भर करते हैं. कर्नाटक क्रिकेट असोसिएशन ने भरोसा भी अत्याधुनिक सुविधाओं का दिलाया था. लेकिन शायद आपको भी ये सुन कर हैरानी होगी कि संचार माध्यमों के मामले में सबसे बुरा इंतज़ाम बंगलौर में ही मिला. भारतीय पत्रकारों को तो शायद इसकी आदत होगी लेकिन पाकिस्तान और बाक़ी देशों से आए मीडिया वाले सचमुच काफ़ी हैरान और नाराज़ थे. पहले दिन वायरलैस इंटरनेट ने काम नहीं किया और टेलीफ़ोन लाइनें मिलने में भी देरी हुई. हद तो तब हुई जब इंटरनेट ठीक करने आए आईटी के बड़े बड़े दिग्गज भी घंटों लगे रहे लेकिन नाकाम रहे और पूरे दिन का इंतज़ार करने के बाद भी हम जैसे पत्रकारों को चिन्नास्वामी स्टेडियम में एक अदद इंटरनेट कनेक्शन नहीं मिला. बाहर से आए पत्रकार कई बार कहते सुने गए – क्या यही है भारत का इंटरनेट शहर. दायाँ हाथ भारत दौरे पर पाकिस्तान क्रिकेट टीम के मेनेजर सलीम अल्ताफ़ ख़ुद पाकिस्तान के जाने माने खिलाड़ी रह चुके हैं और अब तो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष शहरयार ख़ान ने भी उन्हें अपना दायाँ हाथ बना लिया है. सलीम अल्ताफ़ अब शहरयार ख़ान के बाद बोर्ड में सबसे बड़े अधिकारी हैं लेकिन आपको जान कर हैरानी होगी कि अल्ताफ़ भारतीय लेखक ख़ुशवंत सिंह के इस क़दर दीवाने हैं कि उनसे मिलने को बेताब हैं. अल्ताफ़ ने मुझे बेहिचक बताया कि उन्होंने ख़ुशवंत सिंह से मिलने का समय माँगा है ताकि वो उनसे एक बार हाथ मिला सकें और उनके ऑटोग्राफ़ ले सकें. उन्होंने किसी दोस्त के ज़रिए ख़ुशवंत सिंह को संदेश भिजवा दिया है और उम्मीद कर रहे हैं कि दिल्ली में होने वाले आख़िरी वनडे के लिए जब टीम दिल्ली जाएगी तब वो अपनी दिली तमन्ना पूरी कर पाएँगे. अल्ताफ़ की तमन्ना अपनी पत्नी के साथ ताज महल देखने की भी है इसीलिए उन्होंने अपनी पत्नी को वनडे सीरीज़ के दौरान भारत आने के लिए राज़ी कर लिया है. वो कहते हैं कि अगर ये दो तमन्नाएँ पूरी हुईं तो उनका ये दौरा सफल हो जाएगा. |
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