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एक साल तक मैच नहीं हो पाएँगे गॉल में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में दो सप्ताह पहले सूनामी लहरों से हुई तबाही के बाद श्रीलंका का गॉल क्रिकेट स्टेडियम अभी भी खंडहर बना हुआ है. स्टेडियम के क्यूरेटर जयानंद वर्नावीरा ने बताया, "स्टेडियम पर अंतरराष्ट्रीय मैच कराने में अभी एक साल का समय लगेगा." आकलन है कि स्टेडियम को पहले की तरह बनाने में 23 लाख पाउंड का ख़र्च आएगा. इसमें पिच को दोबारा बनाना, पानी निकलने की व्यवस्था करना और दर्शक दीर्घा को आधुनिक बनाना भी शामिल है. 26 दिसंबर को सूनामी लहरों से हुई तबाही के बाद स्टेडियम को भी काफ़ी नुक़सान हुआ था. समुद्र तट से क़रीब होने के कारण गॉल स्टेडियम की अपनी ही छटा थी. टेस्ट मैच इसे दुनिया के सबसे ख़ूबसूरत स्टेडियमों में से एक माना जाता था. दक्षिणी श्रीलंका के लिए यही आधुनिक सुविधाओं से युक्त मैदान है. इस स्टेडियम पर तीन क्लब और छह स्कूली टीमें क्रिकेट खेलती थी. अभी तक इस स्टेडियम में 11 टेस्ट मैच हो चुके हैं.
स्थानीय स्कूल पहले से ही क्रिकेट खेलने की योजना बना रहे हैं लेकिन ज़ाहिर है वे गॉल स्टेडियम में तो क्रिकेट नहीं खेल पाएँगे. एक स्कूली टीम के कोच हर्ष मुनासिंघे ने उम्मीद जताई कि फिर से क्रिकेट खेलने से खिलाड़ी सूनामी के ख़ौफ़ से उबर पाएँगे. उन्होंने बताया, "बच्चे डरे हुए हैं और पिछले दो सप्ताह में वे सिर्फ़ सूनामी की बात ही करते नज़र आ रहे हैं." लेकिन गॉल स्टेडियम के क्यूरेटर और पूर्व टेस्ट खिलाड़ी जयानंदा वर्नवीरा का कहना है कि वे व्यक्तिगत रूप में क्रिकेट खेलने के पक्ष में अभी नहीं है क्योंकि यह मनोरंजन का मौक़ा नहीं है. उन्होंने बताया कि हमें कुछ महीने क्रिकेट छोड़कर मानवीय पक्षों पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए. |
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