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भारत की उम्मीदें बारिश में धुलीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चेन्नई टेस्ट में जीत की भारत की उम्मीदें बारिश में धुल गईं. पाँचवें दिन का खेल बारिश के कारण रद्द करना पड़ा और इस तरह चेन्नई टेस्ट ड्रॉ ख़त्म हुआ. भारत को चेन्नई टेस्ट जीतने के लिए पाँचवें और आख़िरी दिन 210 रनों की ज़रूरत थी. भारत ने चौथे दिन का खेल ख़त्म होने तक बिना किसी विकेट के नुक़सान के 19 रन बना लिए थे. इससे पहले ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी 369 रनों पर ख़त्म हुई. भारत ने पहली पारी के आधार पर 141 रनों की बढ़त हासिल की थी. इस तरह भारत को चेन्नई टेस्ट जीतने के लिए 229 रनों की चुनौती मिली थी. ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में 235 और भारत ने 376 रन बनाए थे. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीसरा टेस्ट 26 अक्तूबर से नागपुर में शुरू हो रहा है, कुंबले का शानदार प्रदर्शन इस टेस्ट में अगर भारत ने ऑस्ट्रेलिया को मुश्किल में डाला तो अनिल कुंबले के शानदार प्रदर्शन की बदौलत.
चेन्नई टेस्ट के पहले ही दिन ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 235 रनों पर सिमट गई और इसमें प्रमुख भूमिका निभाई अनिल कुंबले ने. कुंबले की घूमती हुई गेंदों का ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों के पास कोई जबाव नहीं था. एक बार जब उनके विकेट गिरने शुरू हुए तो फिर लगातार गिरते रहे. कुंबले ने ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में मात्र 48 रन देकर सात विकेट चटकाए. इसी सिरीज़ के पहले टेस्ट में कुंबले ने अपने टेस्ट जीवन का 400 वाँ विकेट लिया था. ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में भी अनिल कुंबले का शानदार प्रदर्शन जारी रहा. हालाँकि चार विकेट गिरने के बाद डेमियन मार्टिन और जेसन गिलेस्पी का विकेट लेने के लिए कुंबले को भी तरसना पड़ा. लेकिन मार्टिन और गिलेस्पी की जोड़ी टूटने के साथ ही कुंबले ने फिर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों को पवेलियन भेजना शुरू किया. ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में उन्होंने छह विकेट लिए. इस तरह चेन्नई टेस्ट में अनिल कुंबले ने कुल 13 विकेट चटकाए. शेन वॉर्न सबसे ऊपर चेन्नई टेस्ट में शेन वॉर्न का ज़िक्र न हो- यह कैसे हो सकता है. इसी टेस्ट के दौरान एक बार फिर शेन वॉर्न दुनिया के सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बने.
टेस्ट जब शुरू हुआ तो वे श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन के 532 विकेटों से सिर्फ़ एक विकेट दूर थे यानी उन्हें विश्व रिकॉर्ड अपने नाम पर करने के लिए दो विकेटों की ज़रूरत थी. चेन्नई टेस्ट के पहले दिन युवराज सिंह का विकेट लेकर उन्होंने मुरलीधरन के रिकॉर्ड की बराबरी की और फिर दूसरे दिन इरफ़ान पठान का विकेट लेकर मुरलीधरन को पछाड़ दिया. इस टेस्ट में शेन वॉर्न को सिर्फ़ एक ही पारी में गेंदबाज़ी करने का मौक़ा मिला और उन्होंने भारत के छह विकेट लिए. यानी अब वे 537 विकेट ले चुके हैं और मुरलीधरन से पाँच विकेट ज़्यादा उनके खाते में हैं. हालाँकि उनके और मुरलीधरन के बीच यह होड़ पिछले कुछ समय से जारी है और उम्मीद है आगे भी जारी रहेगी. बारिश के कारण भारत की दूसरी पारी में ज़्यादा खेल नहीं हो सका. लेकिन जानकार मानते थे कि 229 रनों का लक्ष्य भी भारत के लिए आसान नहीं था और शेन वॉर्न ऑस्ट्रेलिया की जीत का रास्ता भी साफ़ कर सकते थे. महत्वपूर्ण पारियाँ वैसे देखा जाए तो चेन्नई टेस्ट भारत के लिए अच्छा मौक़ा था सिरीज़ में वापसी के लिए. पहला टेस्ट ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार चुकी भारतीय टीम इस टेस्ट को जीतना चाहती थी और उन्होंने इसके लिए शुरुआत भी अच्छी की थी.
अनिल कुंबले की शानदार गेंदबाज़ी के कारण ऑस्ट्रेलिया को सिर्फ़ 235 रनों पर समेट देने के बाद बल्लेबाज़ी में वीरेंदर सहवाग और मोहम्मद कैफ़ की बल्लेबाज़ी के कारण भारत को 141 रनों की महत्वपूर्ण बढ़त भी मिली. लेकिन डेमियन मार्टन और जेसन गिलेस्पी ने पाँचवें विकेट के लिए 139 रन जोड़कर भारतीय जीत के रास्ते को कठिन तो ज़रूर कर दिया. कुंबले और वॉर्न के लिए अगर यह टेस्ट किसी के लिए यादगार रहा तो वे थे- वीरेंदर सहवाग, मोहम्मद कैफ़ और डेमियन मार्टिन. पाकिस्तान के ख़िलाफ़ रिकॉर्ड तिहरा शतक लगाने के बाद सहवाग का बल्ला ख़ामोश ही था और उनके टीम में बने रहने पर भी सवाल उठने लगे थे. सहवाग का बल्ला बोला और सही समय पर बोला. एक बार फिर जब ये लगने लगा था कि भारतीय बल्लेबाज़ी बिखरने लगी है सहवाग ने न सिर्फ़ पारी संभाली बल्कि अपने खाते में भी महत्वपूर्ण रन जोड़े और शानदार 155 रनों की पारी खेली. वीरेंदर सहवाग के अलावा मोहम्मद कैफ़ भी अपनी पारी नहीं भूलेंगे. हालाँकि उन्होंने सिर्फ़ 64 रन बनाए लेकिन अपने संयम से भरे खेल के माध्यम से उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे सिर्फ़ एक दिवसीय मैचों के खिलाड़ी नहीं है. आकाश चोपड़ा के लगातार ख़राब प्रदर्शन के कारण टीम में शामिल हुए कैफ़ ने अपनी भूमिका तो निभाई ही, चयनकर्ताओं को भी आकर्षित किया. ऑस्ट्रेलिया की ओर से वॉर्न के अलावा भारत को परेशान किया डेमियन मार्टन ने. ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में भी एक समय ऐसा लगने लगा था कि स्कोर 250 से ज़्यादा नहीं बन पाएगा, मार्टिन ने टीम का नेतृत्व किया. डेमियन मार्टिन ने न सिर्फ़ शतक लगया बल्कि गिलेस्पी के साथ शानदार 139 रन जोड़कर भारत के सामने जीत के लिए 229 रनों की चुनौती पेश की जो चेन्नई की विकेट पर आसान नहीं थी. मार्टिन ने अपने टेस्ट जीवन का आठवाँ शतक लगाया और 3000 रन भी पूरे किए. |
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