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ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 235 पर सिमटी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चेन्नई में भारत के ख़िलाफ़ दूसरे टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया ने पहले दिन टॉस जीतकर धमाकेदार बल्लेबाज़ी शुरू की थी लेकिन आख़िर तक आते-आते ढीली पड़ गई. ऑस्ट्रेलिया की टीम पहली पारी में 235 रन ही बना पाई और कुंबले की धुआँधार गेंदबाज़ी की बदौलत उसके सारे खिलाड़ी जल्दी-जल्दी पवेलियन लौट गए. अनिल कुंबले ने ऑस्ट्रेलिया की मध्यम क्रम की बल्लेबाज़ी को बिखेर दिया और सिर्फ़ 48 रन देकर सात विकेट ले लिए. ऑस्ट्रेलिया के आख़िरी आठ विकेट तो सिर्फ़ 46 रन में ही गिर गए. ऑस्ट्रेलिया की टीम ने कुल साढ़े 71 ओवर खेले. लेकिन यह सिलसिला हरभजन सिंह ने शुरू किया था जब उन्होंने जस्टिन लैंगर और मैथ्यू हेडेन की सलामी जोड़ी को लंच के बाद के पहले ओवर में ही पवेलियन भेज दिया और वह भी चौंकाने वाले अंदाज़ में. उससे पहले तो ऑस्ट्रेलिया की सलामी जोड़ी जैसे बिना रुके रन बनाने का प्रण कर चुकी थी लेकिन भारत के हरभजन सिंह जैसे किसी मौक़े का इंतज़ार कर रहे थे. ऑस्ट्रेलिया ने बिना कोई विकेट खोए 136 बनाए थे लेकिन कुछ ही सेकेंड बाद स्कोर तो वही था लेकिन दो विकेट गिर चुके थे. यानी हरभजन सिंह ने ऑस्ट्रेलिया की सलामी जोड़ी जस्टिन और हेडेन को पलक झपकते ही पवेलियन भेज दिया. जस्टिन ने 71 और हेडेन ने 58 रन बनाए थे. उसके बाद अनिल कुंबले ने अपनी कलाई का जादू दिखाया और चायकाल तक आते-आते उन्होंने भी दो विकेट चटका दिए थे. उसके बाद तो जैसे कुंबले की का जोश बढ़ता ही गया और उन्होंने कुल सात विकेट लिए. मैकग्रेथ को रन आउट किया गया. लैंगर को हरभजन की गेंद पर द्रविड़ ने और हेडेन को हरभजन की ही गेंद पर लक्ष्मण ने कैच आउट किया. भारत के ख़िलाफ़ ऑस्ट्रेलिया की यह अब तक की सबसे बेहतरीन सलामी बल्लेबाज़ी साझेदारी रही. क़रीब चालीस साल पहले बॉबी सिम्पसन और बिल लॉवरी ने जो रिकॉर्ड पारी खेल थी जस्टिन लैंगर और मैथ्यू हेडेन ने चेन्नई टेस्ट में उसे तोड़ दिया. बंगलौर में पहला टेस्ट 217 रन से जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. भारतीय टीम में एक परिवर्तन किया गया है. आकाश चोपड़ा की जगह मोहम्मद कैफ़ को जगह दी गई है. ऑस्ट्रेलिया ने पहला टेस्ट जीतकर सिरीज़ में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है. 1969 से भारत की धरती पर कोई सिरीज़ नहीं जीत पाई ऑस्ट्रेलिया की टीम मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने के बाद ये मौक़ा नहीं गँवाने देगी. दूसरी ओर पिछले कुछ समय से लगातार ख़राब प्रदर्शन कर रही भारतीय टीम को एक बार फिर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के बिना मैदान में उतरी है. सचिन अभी भी पूरी तरह फ़िट नहीं हैं और उनके आगे के टेस्ट मैचों में भी खेलने पर अभी से सवाल उठने लगे हैं. भारतीय बल्लेबाज़ी में इससे ज़्यादा बदलाव नहीं हो सकते हैं. वैसे शीर्ष बल्लेबाज़ों की नाकामी से टीम प्रबंधन चिंतित तो है लेकिन उनके पास विकल्प नहीं हैं. राहुल द्रविड़ ने पहले टेस्ट की दूसरी पारी में अच्छी बल्लेबाज़ी की थी इससे उम्मीद बँधी है कि शायद वे इस बार अच्छी शुरुआत कर पाएँ. कप्तान गांगुली पर भी बहुत दबाव है लेकिन उनके साथ-साथ सबकी नज़रे वीवीएस लक्ष्मण पर भी है जिन्होंने 2001 की सिरीज़ में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक पारी खेली थी और उनकी पारी की बदौलत ही भारत ने सिरीज़ में वापसी करते हुए ऑस्ट्रेलिया को पीछे छोड़ा था. बुलंद हौसले दूसरी ओर बंगलौर में 217 रनों के बड़े अंतर से भारत को उसी की धरती पर पछाड़ने के बाद ऑस्ट्रेलिया की टीम बुलंद हौसेल से मैदान पर उतरी है.
एडम गिलक्रिस्ट के हाथ में कप्तानी की कमान है क्योंकि रिकी पोंटिंग घायल हैं. शायद इस सिरीज़ में ऐसा आख़िरी बार हो क्योंकि उम्मीद है कि पोंटिंग अगले टेस्ट के लिए उपलब्ध रहेंगे. इस टेस्ट पर अगर किसी की सबसे ज़्यादा नज़र है तो वे हैं शेन वॉर्न. हालाँकि उनसे तो यही उम्मीद थी कि भारत की स्पिन लेने वाली विकेटों पर वे बंगलौर में ही मुथैया मुरलीधरन के 532 विकेटों का रिकॉर्ड तोड़ देंगे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. वॉर्न को बंगलौर टेस्ट में सिर्फ़ चार विकेट मिले जबकि मुरली का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए उन्हें छह विकेटों की ज़रूरत थी. इस समय वॉर्न के खाते में हैं 531 विकेट और एक बार फिर विश्व रिकॉर्ड अपने नाम करने के लिए वे सिर्फ़ दो विकेट दूर हैं. भारतीय टीम सौरभ गांगुली (कप्तान), राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, युवराज सिंह, वीरेंदर सहवाग, मोहम्मद कैफ़, पार्थिव पटेल, हरभजन सिंह, अनिल कुंबले, इरफ़ान पठान, ज़हीर ख़ान. ऑस्ट्रेलियाई टीम एडम गिलक्रिस्ट (कप्तान), जस्टिन लैंगर, मैथ्यू हेडेन, साइमन कैटिच, डेमियन मार्टिन, डेरेन लीमैन, माइकल क्लार्क, शेन वॉर्न, माइकल कैस्परोविच, जेसन गिलेस्पी, ग्लेन मैकग्रा. |
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