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बोर्ड के अधिकारी अब काम कर पाएँगे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उच्चतम न्यायालय ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के नए पदाधिकारियों से अपना काम शुरु करने को कहा है लेकिन पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया के मुख्य संरक्षक बनने पर रोक लगा दी है. मद्रास हाई कोर्ट ने इससे पहले बोर्ड के नए पदाधिकारियों के पद ग्रहण करने पर रोक लगाकर उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एस मोहन को बोर्ड का कामकाज चलाने के लिए कहा था. इसके खिलाफ बोर्ड अधिकारियों ने अदालत में अपील की थी. न्यायमूर्ति एन संतोष हेगड़े और न्यायमूर्ति एसबी सिन्हा की खंडपीठ ने कहा कि पहली नज़र में ऐसा नहीं लगता कि हाई कोर्ट ने बोर्ड अधिकारियों के पद ग्रहण पर रोक लगाकर सही किया. न्यायालय ने कहा कि उन्होंने हाई कोर्ट में दायर नेताजी क्लब की याचिका देखी है जिसमें चुनाव में धांधली का आरोप लगाया गया है. न्यायालय का कहना था कि अगर कोर्ट को ऐसा लगा तो दोबारा चुनाव कराए जा सकते हैं. खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद अगली सुनवाई के लिए 26 अक्तूबर की तारीख तय की है. गहरा विवाद बीसीसीआई के अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनावों में भारी अनियमितताओं के आरोप लगे थे. इसमें पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया के क़रीबी माने जाने वाले रणबीर सिंह महिन्द्रा ने केंद्रीय मंत्री शरद पवार को एक वोट से हराया था. मतदान के दौरान महाराष्ट्र क्रिकेट बोर्ड के कुछ अधिकारियों को मताधिकार से भी वंचित कर दिया गया. इन लोगों ने पिछले साल उन चुनावों में मत डाला था जिसके ज़रिए डालमिया को बोर्ड का मुख्य संरक्षक बनाया गया. उच्चतम न्यायालय ने हालाँकि डालमिया के मुख्य संरक्षक बनने पर रोक लगा दी है. बीसीसीआई विश्व की सबसे धनी खेल संस्थाओं में से एक है और इसका अध्यक्ष बनना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. शायद यही कारण है कि खिलाड़ियों की बज़ाय नेता और उद्योगपतियों का इस पद पर ध्यान रहता है. लेकिन अब इसके कामकाज पर न्यायालय की नज़र है और आम जनता की भी. |
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