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रणबीर सिंह बने बीसीसीआई अध्यक्ष | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे धनी और प्रभावी माने जाने वाले बीसीसीआई के अध्यक्ष पद पर चुने गए हैं जगमोहन डालमिया समर्थक रणबीर सिंह महेंद्र. रणबीर सिंह महेंद्र एक वोट से विजयी हुए हैं. निर्णायक वोट डाला बीसीसीआई के निवर्तमान अध्यक्ष जगमोहन डालमिया काफ़ी उठा-पटक और शोर-ग़ुल के बाद जब शाम को बीसीसीआई की बैठक शुरू हुई तो चुनाव की निगरानी के लिए चेन्नई हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एस मोहन यह कहते हुए बाहर आ गए. उनका कहना था कि अदालत के निर्देश के बाद वे चुनाव की निगरानी नहीं कर सकते. इसके बाद बीसीसीआई की बैठक शुरू हुई. लेकिन इसके कुछ देर बाद ही निवर्तमान अध्यक्ष जगमोहन डालमिया बाहर निकले और यह कहते हुए अरुण जेटली और दूसरे वकील के साथ कमरे में बंद हो गए कि उन्हें अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे पर बातचीत करनी है. पता चला की बीसीसीआई की बैठक शुरू होते ही फिर हंगामा शुरू हो गया. डालमिया विरोधियों ने जम कर नारेबाज़ी करनी शुरू कर दी. इससे पहले एक और घटनाक्रम ने चेन्नई की एक अदालत ने डालमिया के बोर्ड के मुख्य संरक्षक के पद पर नियुक्ति पर अंतरिम रोक लगा दी थी. अब इसकी सुनवाई 11 अक्तूबर को होगी. हंगामा आज सुबह 10 बजे बीसीसीआई की बैठक शुरू होने के साथ ही हंगामा शुरू हो गया. बीसीसीआई के अध्यक्ष पद के चुनाव की निगरानी करने पहुँचे सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एस मोहन को डालमिया ने काम करने से यह कहते हुए रोक दिया कि उनके पास मद्रास हाई कोर्ट के डिवीज़न बेंच का स्थगन आदेश है. और इसके बाद वे बीसीसीआई के अध्यक्ष पद के होने वाले चुनाव की प्रक्रिया की निगरानी करेंगे. लेकिन तभी चेन्नई की एक अदालत ने डालमिया की मुख्य संरक्षक के तौर पर नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार करते हुए उस पर रोक लगा दी. अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख़ 11 अक्तूबर तय की है. लेकिन डालमिया के गुट के ख़िलाफ़ जोड़-तोड़ में लगे राजसिंह डुंगरपुर ने खुलेआम उन्हें चुनौती देते हुए कहा, "हम डालमिया के लिए मुश्किल खड़ी कर देंगे. डालमिया ने बीसीसीआई को अपनी निजी संपत्ति समझ ली है." ज़ोर-शोर अटकलें ये भी लगाई जा रहीं थी कि आख़िरी समय में शरद पवार शायद दौड़ से हट जाएँ क्योंकि महाराष्ट्र में चुनाव क़रीब हैं और ऐसी स्थिति में पवार उसी स्थिति में मैदान में बने रह सकते हैं जब उनकी जीत पक्की हो.
पवार समर्थकों और डालमिया समर्थकों के बीच इस शक्ति परीक्षण में राजनीति के कुछ खिलाड़ी भी जी-जान से जुटे थे. शुरू में इस महत्वपूर्ण पद के लिए प्रमुख उम्मीदवार माने जा रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता अरुण जेटली रणबीर सिंह महेंद्र के समर्थन में थे. तो पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन ने शरद पवार को समर्थन देने की घोषणा कर नई बहस छेड़ दी.
दरअसल बीसीसीआई अध्यक्ष पद के लिए इस बार उत्तरी ज़ोन की बारी थी लेकिन पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन ने शरद पवार का नाम आगे रखा. पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन से अध्यक्ष आईएस बिंद्रा के साथ-साथ राज सिंह डुंगरपुर जैसे कुछ प्रमुख चेहरे भी ज़ोर-शोर से डालमिया समर्थक रणबीर सिंह महेंद्र के ख़िलाफ़ गुटबंदी में लगे थे. वैसे जगमोहन डालमिया नहीं चाहते कि बीसीसीआई का अध्यक्ष पद गँवाने के बाद उन्हें इस संगठन में अहमियत न मिले. रणबीर सिंह महेंद्र इस समय बीसीसीआई के उपाध्यक्ष थे. |
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