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सानामाचा चानू भी 'ड्रग्स टेस्ट' में फेल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की एक और भारोत्तोलक सानामाचा चानू एथेंस ओलंपकि खेल में प्रतिबंधित दवा लेने की दोषी पाई गई हैं. भारतीय ओलंपिक दल के उपनेता हरीश शर्मा ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि "ड्रग टेस्ट में सोनामाचा चानू के नमूनों में प्रतिबंधित दवाएँ मिली हैं और वे मुक़ाबले से बाहर हो गई हैं." उन्होंने कहा, "वज़न उठाने के बाद उनकी जाँच की गई और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने हमें नतीजों की सूचना दी है." इससे पहले एक अन्य भारतीय महिला भारोत्तोलक प्रतिमा कुमारी को भी प्रतिबंधित दवाएँ लेने का दोषी पाया गया था. राज्यवर्धन सिंह के रजत पदक जीतने के बाद भारतीय ख़ेमे में जो उत्साह छाया था, इन दो भारोत्तोलकों के ड्रग टेस्ट में फेल करने के बाद उस पर पानी फिर गया है. भारतीय भारोत्तोलन खिलाड़ियों के प्रतिबंधित दवाएँ लेने का मामला हालाँकि ओलंपिक में पहली बार सामने आया है लेकिन यह कोई चौंकाने वाली बात नहीं है. मिसाल के तौर पर, जानी-मानी महिला भारोत्तोलक कुंजुरानी देवी को प्रतिबंधित दवाएँ लेने का दोषी पाया गया था और उन पर छह महीने के लिए प्रतिबंध लगा था. अब सवाल उठ रहे हैं कि पूरी टीम को शर्मिंदगी में डालने वाली इन घटनाओं के लिए कौन ज़िम्मेदार है, भारतीय ओलंपिक और भारोत्तोलन संघ या फिर खिलाड़ी ख़ुद. |
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