BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 09 अप्रैल, 2004 को 20:18 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
कहाँ चूक गई भारतीय टीम

भारत-पाकिस्तान क्रिकेट
भारतीय टीम ने पाकिस्तान को कम करके आँका
मुल्तान टेस्ट में मिली शानदार जीत के बाद शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि लाहौर टेस्ट सिर्फ़ चार दिन में भारत की हार के साथ ख़त्म होगा.

वो भी इस एकतरफ़ा अंदाज़ में कि पूरे टेस्ट में ऐसा कभी नहीं लगा कि भारतीय टीम मैच जीत या ड्रॉ करा सकती है.

तो क्या हो गया इतने कम समय में जो भारतीय टीम के ख़िलाफ़ गया. एकाएक इतनी मज़बूत लगने वाली टीम में कमज़ोरी ही कमज़ोरी नज़र आने लगी.

दरअसल भारतीय टीम ने पहले टेस्ट में पाकिस्तान की हार के बाद न सिर्फ़ उन्हें कम करके आँका बल्कि अपनी रणनीति भी अच्छी नहीं बनाई.

फ़ैसला साहसिक या....

पाकिस्तान को कम करके आँकने का ही परिणाम था कि भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ ने टॉस जीतने के बावजूद गेंदबाज़ी न करके बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया.

News image
द्रविड़ के पहले बल्लेबाज़ी करने के फ़ैसले पर भी सवाल उठे हैं

क्रिकेट के कुछ शीर्ष जानकारों ने इस फ़ैसले को साहसिक और न जाने क्या-क्या कहा.

लेकिन भई आप क्रिकेट खेल रहे हैं और अगर विकेट से आपको शुरू में फ़ायदा मिलता नज़र आ रहा है तो आप उसे क्यों नहीं लेना चाहेंगे.

जानकारों ने यहाँ तक कहा कि 287 रन का स्कोर कुछ कम नहीं और चौथी पारी तो पाकिस्तान को खेलनी होगी और घूमती गेंदों का नतीजा उसे ही भुगतना होगा.

लेकिन पाकिस्तान को चौथी पारी खेलनी तो पड़ी लेकिन औपचारिकतावश. यानी अपनी टीम के बारे में अति-विश्वास और सामने वाली टीम को कम करके आँकने का नतीजा ही था कि भारतीय कप्तान ने शुरू में ही ग़लती कर दी.

और यों कहें कि पाकिस्तान की जीत की बुनियाद पहले दिन ही रख दी गई थी तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी.

गुल का क़हर

लेकिन अगर आपने सोच-विचार कर पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला कर ही लिया तो आपके बल्लेबाज़ों ने कैसे पाकिस्तान के गोलंदाज़ों का सामना करने की रणनीति बनाई थी.

News image
उमर गुल के आगे बेबस रही भारतीय बल्लेबाज़ी

मैदान पर तो ऐसा बिल्कुल नहीं लगा. शीर्ष बल्लेबाज़ों ने जैसी बल्लेबाज़ी की उससे तो यही लगा कि टीम तैयारी करके हीं नहीं उतरी है.

पाकिस्तान के युवा गेंदबाज़ उमर गुल ने क़हर ढाया और फिर मुल्तान की शेर भारतीय टीम 287 पर ढ़ेर हो गई.

सच मानिए तो भारत पहले ही दिन टेस्ट में हार गया था. सहवाग अपनी अंदाज़ में खेले और चलते बने.

भई आपका अंदाज़ निराला है, लोगों को आपका क्रिकेट देखने में मज़ा भी आता है लेकिन आप टेस्ट खेल रहे हैं और टीम की विकट स्थिति आपके सामने है.

News image
सहवाग को पिच पर टिकने की कला भी सीखनी होगी

लेकिन मुल्तान में इतिहास रचने वाले सहवाग को क्या किसी ने सलाह-मशविरा नहीं दिया. ख़ैर उन्होंने तो फिर भी रन बनाए.

अंदर आती गेंदें सचिन की मुश्किल बनती जा रही हैं और दोनों पारियों में उनकी इस कमी ने उनका विकेट ले लिया.

द्रविड़ और लक्ष्मण ने तो हद ही कर दी. बाहर जाती गेंदों से छेड़छाड़. कब सुधरेंगे आप वो ही ऐसी संकट वाली स्थिति में.

ज़िम्मेदारी

भला हो युवराज और इरफ़ान का जिनका बल्ला चल गया और 287 रन भी बन गए. अन्यथा पारी की हार कहाँ टलने वाली थी.

दूसरी ओर मुल्तान की हार और उसकी आलोचना के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने अच्छी मेहनत की.

जैसा की मैच के बाद कप्तान इंज़माम-उल-हक़ ने भी कहा कि उन्होंने नेट में जम कर अभ्यास किया और भारत के ख़िलाफ़ रणनीति भी बनाई, जो चली.

News image
युवराज के शतक के कारण भारत ने पहली पारी में सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया

कप्तान इंज़माम और इमरान फ़रहत ने शतक लगाया तो योहाना ने भी ज़िम्मेदारी वाली पारी खेली और आख़िर में आसिम कमाल ने रही-सही कसर पूरी कर दी.

यानी बल्लेबाज़ों ख़ासकर कप्तान इंज़माम ने अपनी भूमिका निभाई. विकेट पर टिके रहने का माद्दा तो कोई इंज़माम से सीखे.

पूरी सिरीज़ के हीरो साबित हो रहे हैं इंज़माम. भारतीय गेंदबाज़ी का क्या कहें. वैसे भी उन पर कोई दावा तो किया नहीं जा रहा था.

लेकिन समझ में नहीं आया कि आशीष नेहरा जब वापस बुलाए गए थे तो उन्हें मैदान पर उतरने का मौक़ा क्यों नहीं दिया गया. जबकि आपके पास ज़हीर भी नहीं थे.

एक-एक विकेट को तरसते रहे गेंदबाज़. प्रभावित किया तो बालाजी ने. जो बोलते तो कम हैं लेकिन मेहनत खूब करते हैं.

News image
लाहौर में इंज़माम ने कप्तान की पारी खेली

इरफ़ान को विकेट तो मिले लेकिन देर से. इतनी देर से कि भारतीय टीम का लौटना मुश्किल लग रहा था.

202 रनों की बढ़त पाकिस्तान के लिए काफ़ी साबित हुई. ख़ासकर वैसे समय जब उनका सबसे बड़ा गोलंदाज़ शोएब अख़्तर क़हर ढा रहा हो.

साथ में उमर गुल और मोहम्मद समी तो थे ही. दूसरी पारी में जिस तरह भारतीय शीर्ष बल्लेबाज़ी चरमराई उस पर कुछ न कहें तो बेहतर है.

सहवाग चले और चले पार्थिव पटेल तो शीर्ष बल्लेबाज़ क्यों नहीं चल सकते थे. कहा जाता है कि क्रिकेट में भी सबका दिन एक जैसा नहीं रहता. लेकिन एक साथ सबका इस पर आप हम सभी अचरज कर सकते हैं.

ख़राब अंपायरिंग

भारतीय खिलाड़ियों की तमाम ग़लतियों के साथ-साथ अगर ख़राब अंपायरिंग का जिक्र न करें तो कहानी पूरी नहीं होती.

News image
बकनर की अंपायरिंग पर भी सवाल उठे

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी वेस्टइंडीज़ के अंपायर स्टीव बकनर से भारतीय खिलाड़ियों को शिकायत थी.

लेकिन इस टेस्ट में बकनर के साथ-साथ साइमन टौफ़ल ने भी बड़ी ग़लतियाँ की.

भारतीय क्रिकेट प्रबंधन अगर इससे नाराज़ था तो उनकी नाराज़गी जायज थी. लेकिन यहाँ यह भी कहना ठीक होगा कि हमें भारतीय टीम की हार का ठीकरा अंपायरिंग के सिर फोड़ने की ज़रूरत नहीं.

क्योंकि ख़राब अंपायरिंग के बावजूद टीम का प्रदर्शन कैसा था इसमें भी झाँकने की ज़रूरत है.

यह ज़रूर है कि कुछ फ़ैसले पाकिस्तानी टीम के पक्ष में गए और कुछ भारतीय टीम के ख़िलाफ़.

भारत की दूसरी पारी में तो अनिल कुंबले की स्टंपिंग पर तीसरे अंपायर तक का फ़ैसला विवादित रहा.

भारतीय गेंदबाज़ों की एलबीडब्लू की कुछ अपीलें ख़ारिज नहीं की जानी चाहिए थी और एक बार तो योहाना का साफ़-साफ़ लग रहे कैच की अपील ठुकरा दी गई.

लेकिन क्रिकेट में ऐसे मौक़े कई बार आते हैं. ज़रूरत सिर्फ़ इस बात की है कि आईसीसी अंपायरों की नकेल कसने का उपाय करें और कम से कम उनके पास तो यह संदेश जाना ही चाहिए कि मैदान पर उनका फ़ैसला तो आख़िर है ही लेकिन उन्हें इसका गुमान नहीं होना चाहिए कि वे हमेशा सही ही होते हैं.

मुल्तान में शानदार जीत और लाहौर में पटखनी- क्रिकेट में ऐसा कई बार हुआ है लेकिन भारतीय टीम से हर मामले में चूक हुई. जो ऐसे मौक़ों पर शानदार फ़ॉर्म में चल रही टीम से अपेक्षा नहीं की जाती.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>