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शनिवार, 20 मार्च, 2004 को 01:25 GMT तक के समाचार
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क्रिकेट के बहाने लाहौर देखने की तमन्ना
वाघा सीमा चौकी
वाघा चौकी पर रोज़ाना यह परेड होती है
भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा क्रिकेट सिरीज़ को देखने के लिए भारत में ग़ज़ब का उत्साह देखा गया है और बहुत से लोग क्रिकेट के बहाने पाकिस्तान की धरती पर क़दम रखने के लिए उतावले नज़र रहे हैं.

ख़ासतौर से भारतीय पंजाब से तो बहुत से लोग क्रिकेट के बहाने लाहौर की सरज़मीं को देखने के लिए बहुत लालायित नज़र आए.

रविवार का मैच देखने के लिए शनिवार को क़रीब 1500 क्रिकेट प्रेमी भारत से वाघा सीमा के ज़रिए लाहौर के लिए रवाना हुए.

वीज़ा की बढ़ती माँग को देखते हुए पाकिस्तान ने भारतीय पंजाब के अमृतसर में भी शुक्रवार को एक दफ़्तर खोल दिया जहाँ वीज़ा के लिए भारी भीड़ लगी हुई है.

दरअसल भारत सरकार ने पाकिस्तान से दिल्ली के अलावा अमृतसर में भी वीज़ा दफ़्तर खोलने की माँग की थी.

शुक्रवार को जब इस दफ़्तर ने काम करना शुरू किया तो पाकिस्तान जाने की उम्मीद रखने वालों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी.

कुछ तो क्रिकेट देखने के लिए जाना चाहते थे लेकिन बहुत से ऐसे लोग भी थे जो इस मौक़े का फ़ायदा पाकिस्तान देखने और वहाँ के लोगों से मिलने के लिए उठाना चाहते हैं.

लाहौर का देखना
 जिन्नै लाहौर नहीं वेख्या ओ जन्म्या ई नईं
शिवानी सिंह

जिन्हें वीज़ा मिल गया है वे शनिवार की सुबह से ही लाहौर के लिए रवाना होना शुरू कर देंगे.

अमृतसर में पाकिस्तानी वीज़ा दफ़्तर के अलावा ज़िला प्रशासन ने भी सीमा पर व्यापक इंतज़ाम किए हैं.

अमृतसर के उपायुक्त रमिन्दर सिंह ने बीबीसी को बताया कि लोगों को वाघा सीमा चौकी तक पहुँचाने के लिए विशेष बसें चलाने का इंतज़ाम किया गया है.

उन्होंने बताया कि किसी भी निजी वाहन को भारत पाकिस्तान सीमा तक जाने की इजाज़त नहीं दी जाएगी और ऐसा वहाँ अगले कुछ दिनों में इंतज़ाम ठीक बनाए रखने के लिए किया जा रहा है.

लंबी क़तार

अमृतसर में सिंचाई विभाग के अतिथिगृह में खुले इस दफ़्तर के सामने शुक्रवार को क़रीब तीन हज़ार लोगों ने अपने पासपोर्ट पर वीज़ा को मोहर लगने का इंतज़ार किया.

लाहौर का रास्ता
दोनों देशों के लोग मिलने को आतुर हैं

पहले ऐसी ख़बरें थीं कि यह दफ़्तर गत बुधवार को खुलेगा तो बहुत से लोग तो तीन दिन पहले से ही वहाँ आकर लाइन में लग गए थे.

शुक्रवार को जिन लोगों को वीज़ा मिल गया उनके चेहरे की ख़ुशी देखते ही बनती थी. उनका कहना था कि यह वाक़ई एक सपना पूरा होने जैसा मौक़ा है.

वीज़ा के लिए आने वालों में हर उम्र के लोग थे जिनमें औरतें और बच्चे भी शामिल थे और सबके चेहरों पर पाकिस्तान जाने का उत्साह साफ़ नज़र आ रहा था.

पच्चीस साल की शीबा वीज़ा लेने के लिए चंडीगढ़ से आई थीं और लाहौर में रविवार को चौथा एक दिवसीय मैच देखने की तमन्ना के साथ-साथ पाकिस्तान की धरती पर क़दम रखने के लिए भी उतावली थीं.

एक अन्य पंजाबी महिला शिवानी सिंह क्रिकेट से ज़्यादा लाहौर देखने के लिए उत्साहित नज़र आईं.

उनका कहना था कि वह लाहौर जाकर पुरानी पंजाबी कहावत को सच करना चाहती हैं.

यह कहावत है, "जिन्नै लाहौर नहीं वेख्या ओ जन्म्या ई नईं" यानी अगर किसी ने लाहौर नहीं देखा तो बिल्कुल ऐसा ही जैसे उसका जन्म ही ना हुआ हो.

शिवानी सिंह का कहना था, "पाकिस्तान जाना एक तरह से नई ज़िंदगी मिलने के समान होगा."

कुछ लोगों का कहना था कि क्रिकेट तो बहाना है, असल में तो वे पाकिस्तान जाकर माहौल को महसूस करना चाहते हैं.

कुछ का कहना था, "आख़िरकार किसी ज़माने में हम सब एक ही देश के तो बाशिंदे थे."

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