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कराची से रेहान की डायरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत-पाकिस्तान मैच के दिन होटल से बाहर निकलकर जो नज़ारा दिखा उससे ही अंदाज़ा लग गया कि आज का दिन कैसा बीतेगा. सड़क के दोनों तरफ़ बीच में तीन-तीन ट्रकों को खड़ा कर सड़क ब्लॉक कर दी गई थी और वहाँ से किसी वाहन को गुजरने नहीं दिया जा रहा था. सुबह साढ़े छह बजे सूनी सड़कों के बावजूद हमें स्टेडियम पहुँचने में 45 मिनट लगे. पाकिस्तान की टीम सबसे पहले ग्राउंड्स पर पहुँची. हल्का वर्क-आउट करने के बाद उन्होंने एक साथ पूरे मैदान का चक्कर लगाया. भारतीय टीम ने भी फ़िज़ियो और कोच की निगरानी में थोड़ी बहुत एक्सरसाइज़ की. कराची स्टेडियम के सभी हिस्सों को पूर्व क्रिकेट खिलाड़ियों के नाम पर रखा गया है. ख़ास मेहमान भारत से आए दर्शक भी थे लेकिन उतनी ज़्यादा तादाद में नहीं जितनी कि उम्मीद थी.
मैदान में सहवाग और राहुल द्रविड़ पूरी तरह छाए हुए थे, और उनके एक-एक शॉट पर दाद दे रहे थे प्रियंका गांधी, उनके भाई राहुल और पति रॉबर्ट वढरा. आसमानी रंग की सलवार-कमीज़ पहने हुए प्रियंका वीआईपी बॉक्स में न बैठकर दर्शकों के बीच स्टैंड्स में बैठी हुई थी. सुरक्षाकर्मियों के कड़े घेरे में होने के बावजूद लोग उनसे हाथ मिला रहे थे और ऑटोग्राफ़ ले रहे थे. रॉबर्ट बढरा ने सिलेटी रंग का सूट और काला चश्मा पहन रखा था, लेकिन वो गंभीर मुद्रा में दिख रहे थे. राहुल गांधी ने आसमानी कमीज़ और काली पैंट पहन रखी थी. वो सबसे ज़्यादा मुस्करा रहे थे और लोगों को वेव कर रहे थे. प्रियंका के हाथ में कपड़े का एक बड़ा भारतीय ध्वज था. तनातनी लंच के दौरान अरुण जेटली भी लॉबी में आए और प्रेस बॉक्स में भी बैठे. उस समय प्रियंका और राहुल भी उसी बॉक्स में मौजूद थे, लेकिन उनका आमना-सामना नहीं हुआ. अपनी पारी के अंतिम चरणों में इंज़माम उल हक़ इतने थक गए थे कि रन तक नहीं ले पा रहे थे. शोएब अख़्तर एक बार फिर भारतीय बल्लेबाज़ों पर असर नहीं डाल नहीं पाए. किसी भी तेज़ गेंदबाज़ को उस समय बहुत ठेस पहुँचती है जब उसे फ्रंट फ़ुट पर ड्राइव किया जाए. राहुल और सहवाग ने उनके साथ ये सलूक कई बार किया. एक बार तो ग़ुस्से में आकर शोएब ने द्रविड़ पर एक बाउंसर फेंका और जब उन्होंने खेला तक नहीं तो वे चुनौती की मुद्रा में आगे बढ़े और आँखें में आँखें डाल कर देखने लगे. ज़ुर्माना मैच के बाद स्लो ओवर रेट के लिए दोनों टीमों को फ़ाइन किया गया. पहले नियम था कि अगर कोई टीम निर्धारित समय में ओवर नहीं ख़त्म करती तो उसकी बैटिंग के समय उसके उतने ही ओवर काट लिए जाते थे.
अब ऐसा नहीं है. गांगुली ने इस पर अपनी नाराज़गी भी व्यक्त की. उन्होंने कहा कि जीतने के लिए अगर मैच फ़ीस की क़ुर्बानी करनी पड़े तो लोग ऐसा ख़ुशी से करेंगे. उन्होंने सत्तर के दशक का ज़माना याद कराया जब वेस्टइंडीज़ की टीम एक घंटे में दस-ग्यारह ओवर फेंका करती थी. अंतिम ओवर में जावेद मियाँदाद पैवेलियन से मोइन ख़ाँ को इशारा करते रहे कि ऑफ़ में जगह बना कर शॉट खेलो. लेकिन मोइन ख़ाँ जावेद मियाँदाद नहीं थे, और न ही आशीष नेहरा चेतन शर्मा. |
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