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इंज़माम ने दिल जीता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कराची का पहला एक दिवसीय मैच भारत की झोली में गया. लेकिन आख़िरी गेंद पर. पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 349 रन का विशाल स्कोर बनाने के बाद भारतीय टीम ने सोचा नहीं होगा कि उन्हें जीत हासिल करने के लिए अंतिम गेंद तक इंतज़ार करना पड़ेगा. लेकिन ऐसा हुआ और इसमें प्रमुख भूमिका निभाई पाकिस्तान के कप्तान इंज़माम-उल-हक़ ने. अपनी सधी हुई पारी से इंज़माम ने तो क़रीब-क़रीब भारत से जीत छीन ही ली थी लेकिन क्रिकेट में आख़िरी गेंद तक फ़ैसला होता है और कराची में भी वही हुआ. इंज़माम ने अपनी 122 रनों की पारी में 12 चौके और दो छक्के लगाए और सिर्फ़ 102 गेंदों का सामना किया. उन्होंने तीसरे विकेट के लिए युसूफ़ योहाना के साथ मिलकर 135 महत्वपूर्ण रन जोड़े. दोनों जब विकेट पर थे तो ऐसा लग रहा था जैसे रनों की बरसात हो रही हो. इंज़माम के शॉट इतने ज़बरदस्त थे कि लग रहा था जैसे भारतीय खिलाड़ी मूक दर्शक बन गए हों. एक दिवसीय मैच में यह उनका सिर्फ़ नौवाँ शतक ही था लेकिन यादगार. हालाँकि हार जाने के बाद उन्होंने कहा कि अगर उनकी टीम जीतती तभी इसे वे एक यादगार पारी मानते. सवाल इंज़माम के पहले फ़ील्डिंग करने के फ़ैसले पर भी उनसे सवाल किए गए. लेकिन इंज़माम ने कहा कि मैच हार जाने के बाद उनके फ़ैसले को ग़लत ज़रूर कहा जा सकता है. लेकिन उन्होंने एक योजना के तहत ऐसा करने का फ़ैसला किया था.
इंज़माम ने कहा कि उन्हें ऐसा लगा था कि विकेट की शुरुआत नमी का फ़ायदा उठाते हुए गेंदबाज़ भारत के शुरुआती विकेट जल्दी-जल्दी गिरा देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. भारत ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 349 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया वह भी ऐसी स्थिति में जब आख़िरी पाँच ओवर में उसके खिलाड़ी सिर्फ़ 25 रन ही बना पाए. अगर आख़िरी ओवरों में और विस्फोटक बल्लेबाज़ी होती तो आँकड़ा 400 तक पहुँच सकता था. द्रविड़, सहवाग और कप्तान गांगुली के साथ-साथ कैफ़ और सचिन ने भी अच्छी पारी खेली. मुश्किल ख़ैर इतने रन होने और पाकिस्तान के शुरुआती दो विकेट सिर्फ़ 34 रन पर ही गिरा देने के बाद भारतीय कप्तान सौरभ गांगुली ने नहीं सोचा होगा कि अभी उन्हें कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा.
इंज़माम के साथ-साथ योहना और कई कम अनुभवी खिलाड़ियों ने जिस बहादुरी के साथ इतने बड़े स्कोर का पीछा किया वह सराहनीय रहा. भारतीय खिलाड़ियों ने भी संघर्ष किया और आख़िरी-आख़िरी तक मैच जाने नहीं दिया. ख़ासकर मोहम्मद कैफ़ का कैच और आशीष नेहरा का आख़िरी ओवर भारतीय प्रशंसकों के दिल की धड़कने रोकने के लिए काफ़ी था. भारत ने मैच जीता और पाकिस्तान दौरे पर जीत के साथ शुरुआत की. सालों बाद कराची के मैदान के साथ-साथ टेलीविज़न पर लाखों क्रिकेट प्रेमियों ने एक बेहतरीन मैच का आनंद लिया. जो लंबे समय तक उनके जेहन में बना रहेगा. |
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