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मैच फ़िक्सिंग पर लतीफ़ का नया दावा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान की क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राशिद लतीफ़ का कहना है कि वे अपनी नई किताब में मैच फ़िक्सिंग के बारे में सनसनीखेज रहस्यों से पर्दा हटाएँगे. उन्होंने दावा किया कि इसमें कई खिलाड़ियों और अधिकारियों के नाम सामने आएँगे. लेकिन उन्होंने कहा कि ये किताब सितंबर में बाज़ार में आएगी और इसके पहले वे इस बारे में कुछ नहीं बताएँगे. उन्होंने कहा,"ये एक साधारण किताब नहीं होगी और इसमें मैच फ़िक्सिंग के बारे में बहुत कुछ होगा". वैसे राशिद लतीफ़ ने ये स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के भ्रष्टाचार निरोधी और सुरक्षा दस्ते ने मैच फ़िक्सिंग पर रोक लगा दी है. मगर उन्होंने कहा कि वे मानते हैं कि क्रिकेट में सट्टेबाज़ी जारी है. अभियान राशिद लतीफ़ काफ़ी पहले से मैच फ़िक्सिंग के विरोध में अभियान चलाते रहे हैं और उन्होंने अपने साथी खिलाड़ियों पर 1995 में एक दौरे में पैसे लेकर जान-बूझकर ख़राब खेलने का आरोप भी लगाया था. राशिद लतीफ़ ने 1998 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था मगर तीन साल बाद उनकी फिर वापसी हुई और पिछले वर्ष विश्व कप में उन्हें टीम का नेतृत्व सौंपा गया. मगर जल्दी ही पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड से उनका विवाद शुरू हुआ क्योंकि उन्होंने बिना बोर्ड को बताए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद को मैच फ़िक्सिंग के बारे में चिट्ठी लिखी थी. पिछले वर्ष सितंबर में बांग्लादेश के साथ एक टेस्ट मैच के दौरान एक कैच को लेकर विवाद हुआ जिसके कारण उनपर पाँच मैचों का प्रतिबंध लगा दिया गया. फिर लतीफ़ की कप्तानी भी चली गई और ये ज़िम्मेदारी इंज़माम उल हक़ को सौंप दी गई. पिछले महीने उन्हें भारत के साथ खेलनेवाली पाकिस्तानी टीम के संभावित खिलाड़ियों की सूची से बाहर रखा गया जिसके बाद समझा जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी वापसी अब संभव नहीं रही. |
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