शशांक मनोहर बने बीसीसीआई के अध्यक्ष

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
शशांक मनोहर बीसीसीआई के नए अध्यक्ष बने हैं. वह जगमोहन डालमिया की जगह लेंगे जिनका पिछले महीने निधन हो गया था.
मुंबई में हुई बीसीसीआई की विशेष आम बैठक में उन्हें निर्विरोध इस पद पर चुना गया.
मनोहर दूसरी बार बीसीसीआई के अध्यक्ष बने हैं. वह इससे पहले 2008 से 2011 तक इस पद पर रहे थे.
उनकी छवि भारतीय क्रिकेट में मिस्टर क्लीन की है. वह साल 1996 में विदर्भ क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बने और पहली बार क्रिकेट प्रशासनिक अधिकारी के रूप में उभरकर सामने आए.
क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन ने बीबीसी से बातचीत में शशांक मनोहर की पांच ख़ासियतें बताईं जो उन्हें सबसे अलग करती हैं.
पांच ख़ासियतें

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1. वह पेशे से वकील हैं, बहुत कम बात करते हैं, लेकिन जो बात करते हैं उस पर अटल रहते हैं. किसी के बारे में या किसी विषय पर कोई बात कहते हैं तो शायद वह बात दूसरों को पसंद ना आए लेकिन वह इसकी परवाह नहीं करते.
2. बहुत जल्दी निर्णय लेते हैं, हालांकि कई बार इसमें पीछे भी हटना पडता है. जब वह बीसीसीआई के अध्यक्ष थे तब उन्होंने कोच्चि और पुणे की फ्रैंचाइज़ी को आईपीएल से समाप्त किया था. राजस्थान और पंजाब पर भी सवाल उठाए थे. बीसीसीआई ने भी काफी केस किए जो नतीजे तक नहीं पहुंचे और अगर पहुंचे भी तो बीसीसीआई के हक़ में नहीं गए.
3. वह अपने साथ कभी मोबाइल फ़ोन नहीं रखते. मीडिया से बहुत कम बात करते हैं. उनके बारे में कहा जाता है कि वह लकीर के फकीर हैं लेकिन वह ख़ुद मानते हैं कि वह क्रिकेट से हक़ में सब कुछ सही कर रहे हैं. साल 2007 तक तो उनके पास पासपोर्ट भी नहीं था. उन्होंने साल 2008 में दुबई में आईसीसी की बैठक में भाग लिया जो उनकी पहली विदेश यात्रा थी.

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4. आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल में रहने और कमेंटरी के भुगतान को लेकर उनके बीसीसीआई अध्यक्ष रहते सुनील गावस्कर से विवाद हुआ. उन्होंने गावस्कर को करोड़ों रुपये का भुगतान करने से मना कर दिया.
5. साल 2004 में जब शशांक मनोहर विदर्भ क्रिकेट संघ के पदाधिकारी थे तब उनके इशारे पर ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ तीसरे टेस्ट मैच में भारत के कप्तान सौरव गांगुली और टीम के विरोध के बावजूद तेज़ पिच बनाई गई. विरोध में गांगुली मैच से हट गए, राहुल द्रविण कप्तान बने, भारत 342 रन से हारा.
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