'प्रतिबंध टीमों पर, सज़ा खिलाड़ियों को क्यों'

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- Author, नौरिस प्रीतम
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
आईपीएल की दो टीमें- चेन्नई सुपरकिंग्स और राजस्थान रॉयल्स पर दो साल का प्रतिबंध लग गया है. इसी तरह बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के सह मालिक राज कुंद्रा पर भी आजीवन प्रतिबंध लगाया गया है.
लेकिन इससे हरगिज़ ये नहीं समझना चाहिए कि ये मामला ख़त्म हो गया है और क्रिकेट या आईपीएल पाक-साफ़ हो गया है. सवाल ये है कि अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली समिति के इस फैसले का सीधा असर तीन पक्षों पर पड़ा है.
पहला बीसीसीआई, दूसरा है दो प्रतिबंधित टीमें और तीसरा इन दोनों टीमों के खिलाड़ी.
ऐसे में अब आगे क्या हो सकता है?
न्यायालय का दरवाज़ा

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बीसीसीआई, दोनों टीमों और इन टीमों के खिलाडियों के सामने न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का रास्ता बचा है.
लेकिन लगता है यह मामला अभी कानूनी दावपेच में फंसकर थोड़ा और लंबा चलेगा.
यह अलग बात है कि चूंकि जस्टिस लोढ़ा पूर्व मुख्य न्यायधीश हैं और उनकी समिति में बाकी सदस्य भी सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं, इसलिए पता नहीं न्यायालय इन अपीलों को किस रूप में लेगा.
लेकिन इतना लगभग तय है कि मामला अदालत में दोबारा ज़रूर जाएगा.
न्यायाधीश लोढ़ा ने भी साफ़ किया है कि इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की जा सकती है. इसी तरह पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मुकुल मुद्गल ने भी कहा कि फ़ैसले में अपील का प्रावधान है.
खिलाड़ियों को सज़ा क्यों

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अब सवाल ये है कि जब खिलाड़ियों के ख़िलाफ़ कोई सीधा आरोप नहीं हैं बल्कि टीम के मालिकों को दोषी पाया गया है तो फिर टीमों पर प्रतिबंध लगाकर खिलाड़ियों को सज़ा क्यों दी जाए?
यही वो मुद्दा है जिस पर खिलाड़ी अदालत में अपील कर सकते हैं. एक पेशेवर खिलाड़ी के नाते टीम पर प्रतिबंध एक तरह से उनके पेट पर लात मारने के बराबर है.
खिलाडी टीम में एक अनुबंध से बंधे हुए हैं और क्रिकेट खेलना ही उनका पेशा या रोज़ी कमाने का ज़रिया है.
इसलिए प्रभावित हुए खिलाड़ी टीम के ख़िलाफ़ अदालत जा सकते हैं. खिलाड़ी अगर चाहें तो दो साल के लिए आईपीएल से बाहर रह सकते हैं.
बीसीसीआई या क्रिकेट बोर्ड के वकील ने भी कहा है कि अगर टीम के मालिक दोषी हैं तो खिलाड़ियों को सज़ा क्यों दी जाए?

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जहां तक बीसीसीआई का सवाल है तो ख़बरें हैं कि जगमोहन डालमिया ने वकीलों से परामर्श शुरू कर दिया है. माना जा रहा है कि बोर्ड निचली अदालत से शुरूआत करके सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है.
अटकलें लगाई जा रही हैं कि बीसीसीआई कोच्चि या पुणे की टीमों को आईपीएल के अगले संस्करण में शामिल करके दो प्रतिबंधित टीमों के खिलाड़ियों को मैदान में उतार सकती है.
आईपीएल में इसका प्रावधान है और जस्टिस लोढ़ा ने भी साफ़ किया है कि प्रभावित खिलाड़ी अन्य टीमों में खेल सकते हैं. इन खिलाड़ियों की नए सिरे से दोबारा नीलामी हो सकती है.
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