हॉकीः 'जीत के बावजूद सुधार की ज़रूरत'

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
भारतीय हॉकी टीम पिछले दिनों विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया से चार हॉकी टेस्ट मैचों की सिरीज़ 3-1 से जीतकर मंगलवार को स्वदेश लौटी. टीम के हर सदस्य के चेहरे की मुस्कुराहट बता रही थी कि इस ऐतिहासिक जीत के मायने क्या हैं.
लेकिन टीम के सहायक कोच एमके कौशिक का मानना है कि इस जीत से टीम को फूल कर कुप्पा होने की ज़रूरत नहीं है. आने वाली चुनौतियां बड़ी हैं.
एमके कौशिक 1980 में आखिरी बार ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के सदस्य थे. तब भारत ने मॉस्को में स्वर्ण पदक जीता था.
कौशिक की ही कोचिंग में भारत ने साल 1998 के बैंकॉक एशियाई खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता था. पिछले दिनों इंचियॉन एशियाई खेलों में 16 साल बाद स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के भी वह सहायक कोच रहे.
'अब ज़्यादा तैयारी'

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कौशिक ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा कि पहले मैच में 4-0 से बड़ी जीत के बाद ऑस्ट्रेलिया ने अपनी टीम के सीनियर खिलाड़ियों की जगह नए चेहरों को मौका दिया.
हालांकि वह कहते हैं कि ऑस्ट्रेलियाई टीम की रणनीति को तोड़कर उन्हीं के देश में भारत ने शानदार वापसी की और जीत भी हासिल की यह बड़ी बात है.
कौशिक कहते हैं, "अब भारतीय टीम को और भी सजग होकर अपनी बेहतरी पर ध्यान देना चाहिए और आगामी चैंपियंस ट्रॉफी की तैयारी करनी चाहिए."
वह यह भी मानते हैं कि पहले मैच में 4-0 से करारी हार के बाद भारत के पास आक्रमण के अलावा कोई चारा नहीं था.
उन्होंने कहा, "दबाव में भारतीय टीम अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती. जब टीम पर दबाव नहीं होता तब वह शानदार खेल दिखाती है. भारतीय हॉकी का इतिहास यही रहा है."
टीम की रणनीति
पहले मैच में हारने के बाद टीम की रणनीति के बारे में कौशिक ने कहा कि टीम को बताया गया कि आपको कैसा खेलना है. गोलकीपर पी श्रीजेश ने बेहतरीन बचाव किए और सबसे महत्वपूर्ण बात कि टीम के फॉरवर्ड्स अपनी लय में आ गए.

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टीम को समय पर गोल मिलते रहे. एसवी सुनील, रमनदीप सिंह और आकाशदीप सिंह ने बेहतरीन गोल किए.
ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी कभी भी अपने विरोधी को ऐसे खुलकर खेलने का मौक़ा नही देते और न ही इतने गोल खाते हैं. ऐसे में पूरी टीम का प्रदर्शन सराहनीय कहा जाएगा.
दरअसल ऑस्ट्रेलिया ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत एक अच्छी टीम के ख़िलाफ अपने युवा खिलाड़ियों को खेलने का अवसर दिया. इसके बावजूद इस जीत से मनोवैज्ञानिक लाभ हमारी टीम और हॉकी प्रेमियों को मिलेगा.
कौशिक का मानना है कि मैदान में बॉल को लेकर काउंटर अटैक के लिए आगे बढ़ने से लेकर विरोधी टीम को अधिक पेनल्टी कॉर्नर न देने पर अब अधिक तैयारी की जाएगी.
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