'अभिनय नहीं सिर्फ़ बॉक्सिंग में अच्छी हूँ'

मैरी कॉम

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    • Author, मार्क मैन्युअल
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार

भारतीय महिला मुक्केबाज़ मैरी कॉम ने 17वें एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता है.

विभिन्न वर्गों में भारत को कई स्वर्ण पदक दिलाने वाली मैरी आम जीवन में एक साधारण और संकोची हैं.

उनके जीवन पर फ़िल्म बन चुकी है लेकिन मैरी का कहना है कि वो मुक्कबाज़ी में ही अच्छी हैं, अभिनय में नहीं.

पढ़िए मार्क मैन्युल का लेख विस्तार से

मुझे पता चला कि मैरी कॉम ने इंचियोन में हुए एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता हैं.

हालांकि स्कॉटलैंड में इस साल के जुलाई में हुए राष्ट्रमंडल खेलों से उन्हें बाहर कर दिया गया था लेकिन यह एक दूसरी बात है.

यह भारत है यहां ये मायने नहीं रखता कि सफलता की कहानी कैसे लिखी गई है. मैरी कॉम अब सबकी चहेती हैं.

मेरी उनसे दो साल पहले एक छोटी सी मुलाकात हुई थी. उस वक़्त वे सुपर फ़ाइट लीग के प्रचार के साथ जुड़ी थी जिसे राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी ने शुरू किया था.

मैरी कॉम ने मुझसे कहा, "नहीं मैं इस लीग की प्रतिस्पर्धाओं में भाग नहीं लूंगी. लीग में महिलाओं के लिए बैंटमवेट, वेल्टरवेट और मिडलवेट श्रेणियों में मुकाबला होगा."

बॉक्सिंग की ब्रांड एंबेसडर

मैरी कॉम, अमिताभ बच्चन

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मैंने उनसे पूछा कि क्यों वे नहीं भाग लेंगी क्योंकि मैं उनकी बॉक्सिंग देखने के लिए मरा जा रहा था.

उन्होंने जवाब में कहा, " मैं सिर्फ 51 किलो की हूं और फ्लाइवेट मुक़ाबले में हिस्सा लेती हूँ."

वे सुपरफ़ाइट लीग की ब्रांड एंबेसडर थी और मुझे नहीं लगता कि इसके अलावा भी कोई काम कुंद्रा और शेट्टी ने उनके लिए सोचा है.

लेकिन मेरी इस मुलाकात में उनके लिए बहुत कुछ था.

उन्होंने मुझे ग़ौर से देखते हुए कहा कि आपने बाक्सिंग की हुई है.

उन्होंने ये बात सवालिया लहजे में ना पूछ कर नतीजा निकालते हुए कहा था.

हां ये बात सही है कि मैंने फाइटिंग, खेल और कला में हाथ अजमाया हुआ था.

मुहम्मद अली से मुलाकात

मुहम्मद अली और मार्क मैन्युअल

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उसके बाद मैंने धीरे से अपनी जेब से एक तस्वीर निकाली जो मैं मैरी को दिखाने लाया था. यह मुहम्मद अली के साथ मेरी तस्वीर थी जो कि मेरे और मैरी दोनों के हीरो थे.

मैंने उनसे साल 1990 में क्रिसमस की एक सुबह बॉम्बे के होटल 'हॉलीडे इन' में इंटरव्यू लिया था.

उस वक़्त अली बग़दाद से लौट रहे थे जहां वे सद्दाम हुसैन से अमरीकी कैदियों को रिहा करने की मांग करने गए थे और वापसे लौटते हुए मदर टरेसा से मिलने के लिए भारत रुक गए थे.

सुबह के छह बजे थे और एक क्रिसमस ट्री के नीचे उन्होंने मुझसे बात की, डांस किया, घूंसे चलाकर दिखाए, जादुई तरकीब दिखाए, अपनी हाथ की फुर्ती दिखाई और आखों के तालमेल दिखाए.

अचंभा

मुहम्मद अली

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वे 48 साल के थे और पर्किंसन के लक्षण उनमें आ गए थे तब भी कांपते शरीर के अदंर लगता था कि वही अली मौजूद है जिसने जोए फ्रैज़र और जॉर्ज फोरमैन से लड़ा था.

इसका अहसास मुझे उस वक़्त हुआ जब बिजली की गति से उनका घूसा मेरे आंख के एक इंच बगल से गुजरा.

मैरी अचंभित थीं.

उन्होंने अविश्वास के साथ हकलाते हुए कहा, "आप उनसे मिल चुके हैं."

मैंने कहा, "हां और अब मैं बॉक्सिंग के दूसरे महान शख्सियत से मिल रहा हूं."

ये सुनकर वे भावुक हो गई और उन्होंने विनम्रतापूर्वक सिर झुका लिया.

'मिलियन डॉलर बेबी'

मैरी कॉम

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मैंने उन्हें गले से लगा लिया और मैं उस वक़्त उन कड़े मांसपेशियों को महसूस कर रहा था जिसने बॉक्सिंग रिंग में विश्व, ओलंपिक और एशियाई खेलों का ताज जीता है.

मैंने कहा, "मैं आपके साथ एक तस्वीर खिंचवाना चाहता हूं."

वे अपनी मुट्ठी बांध कर खड़ी हो गई. वे इस तरह से खड़ी एक प्यारी महिला लग रही थी बजाए किसी आक्रमक मुद्रा वाली बॉक्सर के.

मैं उनको लड़ते हुए देखने की कल्पना ही ना कर सका.

फिर हमने फ़िल्मों के बारे में बात की. मैंने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने 2004 का ऑस्कर विजेता फ़िल्म 'मिलियन डॉलर बेबी' देखी है.

मैरी ने बताया कि हां उन्होंने देखा हैं.

बॉलीवुड फ़िल्म

प्रियंका चोपड़ा, मैरी कॉम के किरदार में

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मैंने तब उनसे पूछा था कि क्या वे अपने ऊपर बनने वाली किसी बॉलीवुड फ़िल्म में काम करेंगी.

उस वक़्त प्रियंका चोपड़ा अभिनीत संजय लीला भंसाली की फ़िल्म 'मैरी कॉम' फ़िल्म निर्माताओं का एक सपना था.

उन्होंने खिलखिलाते हुए कहा,"माफ़ किजिएगा मैं अभिनय नहीं सिर्फ बाक्सिंग में अच्छी हूँ."

मैंने उनसे जानना चाहा कि क्या उन्होंने सिल्वेस्टर स्टोन की रॉकी सीरीज की फ़िल्मे देखी है जो बॉक्सिंग पर बनी हर किसी की पसंदीदा फ़िल्में हैं.

ये फ़िल्में 70 की दशक में नौजवान मर्दों को बॉक्सिंग की तरफ आकर्षित करने की अहम वजह थी.

मैरी ने कहा,"बिल्कुल, सिल्वेस्टर स्टोन एक प्रेरणस्रोत है."

मैंने तब उनसे कहा कि मुझे उनका भावनात्मक पक्ष, उदार व्यवहार और परिवार के प्रति समर्पण सिल्वेस्टर स्टोन के निभाए किरदार रॉकी बॉलबोओ की याद दिलाते हैं.

समर्पण

मैरी कॉम

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यह किरदार बॉक्सिंग को लेकर समर्पित है लेकिन साथ ही साथ एक अच्छा इंसान है, एक प्यार करने वाला पति है और बच्चों का ख़्याल रखने वाला पिता है और हां वे कभी भी रिंग के बाहर जीत-हार के बोझ को दिल से नहीं लगा कर रखता है.

मैरी ख़ुश थीं. उन्होंने झुका कर एक बार फिर से 'शुक्रिया' कहा.

फिर उन्होंने कहा, "क्या मैं आप से कुछ कह सकती हूं."

"हां बिल्कुल कहिए"

मैरी कॉम ने कहा, "मैं रॉकी देखने से पहले से बॉक्सिंग कर रही हूं."

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