लॉर्ड्स टेस्ट: 28 साल पुराना कीर्तिमान दोहराएगा भारत?

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क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले मैदान लॉर्ड्स में जो कारनामा कपिल देव की अगुवाई में भारतीय टीम ने 1986 में किया था, शुक्रवार को वही कारनामा एक बार फिर धोनी के नेतृत्व में दोहराया जा सकता है.
लॉर्ड्स में 82 साल के इतिहास में भारतीय टीम आज तक सिर्फ़ एक ही टेस्ट मैच जीत सकी है. अब तक यहां खेले गए 16 टेस्ट मैचों में उसे 11 में पराजय मिली है जबकि चार मैच बेनतीजा रहे हैं.
15 टेस्ट मैच और तीन साल से अधिक समय से भारतीय टीम विदेशी ज़मीन पर जीत के लिए तरस रही है. धोनी एंड कंपनी के पास इस सिलसिले को तोड़ने का अच्छा मौक़ा है.
उधर, इंग्लैंड की भी कोशिश रहेगी कि वह चौथी पारी में 319 रनों के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को हासिल कर टेस्ट मैचों में चल रहे जीत के सूखे को ख़त्म कर सके. इंग्लैंड की टीम पिछले नौ टेस्ट मैचों में जीत हासिल नहीं कर सकी है.
कमज़ोर क़िला

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लॉर्ड्स में भारतीय टीम पहली बार 1932 में उतरी थी और इंग्लैड ने मेहमानों को 152 रनों की करारी शिकस्त दी थी.
लॉर्ड्स के रिंग में भारत की हार का सिलसिला 54 साल बाद 1986 में जाकर टूटा. 1932 से 1986 के बीच भारतीय टीम दो टेस्ट ड्रॉ कराने में तो सफल रही, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकी.
पांच जून 1986 को शुरू हुए टेस्ट में दिलीप वेंगसरकर के जुझारू शतक और गेंदबाज़ों के बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत भारतीय टीम ने यह मैच पांच विकेट से जीता था. दूसरी पारी में चार विकेट लेने और नाबाद 23 रनों की विजयी पारी खेलने वाले कप्तान कपिल देव को मैन ऑफ़ द मैच चुना गया था.
रनों का संघर्ष

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इंग्लैंड के लिए भी यहां जीतना आसान नहीं होगा. लॉर्ड्स में चौथी पारी में रन बनाना हमेशा ही मुश्किल रहा है.
लॉर्ड्स के लगभग 200 साल के इतिहास में सिर्फ़ तीन बार ही 200 रन या इससे बड़े लक्ष्य को हासिल कर कोई टीम जीत दर्ज कर सकी है.
यहां सबसे बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए जीतने का रिकॉर्ड वेस्टइंडीज़ के नाम है.
कैरेबियाई टीम ने 1984 में एक विकेट पर 344 रन बनाकर मेज़बानों को शिकस्त दी थी.
बल्लेबाज़ी में अपने नाम पर अनेकों रिकॉर्ड रखने वाले सचिन तेंदुलकर और सुनील गावस्कर जैसे दिग्गज भारतीय बल्लेबाज़ भी यहां पस्त रहे हैं.
सचिन जहां पांच टेस्ट मैचों में 21.66 की औसत से कुल 195 रन ही बना सके, वहीं गावस्कर लॉर्ड्स में सेंचुरी के लिए तरस गए.
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