लॉर्ड्स में मिली जीत क्यों है ख़ास

साथी खिलाड़ियों के साथ भुवनेश्वर कुमार

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भारत ने इंग्लैंड को लॉर्ड्स में हुए दूसरे टेस्ट में 95 रनों से हरा दिया है. जानिए भारत की ये जीत क्यों है इतनी ख़ास.

वर्ष 1986 के बाद लॉर्ड्स में भारत की ये पहली जीत है. कपिल देव के नेतृत्व में भारत ने तब लॉर्ड्स के मैदान पर इंग्लैंड को पांच विकेट से हराया था.

वर्ष 2011 से भारत ने विदेशी सरज़मीं पर पहली बार टेस्ट जीता है. भारत ने जून 2011 में वेस्टइंडीज़ को किंगस्टन में 63 रन से हराया था. उसके बाद भारतीय टीम ने 15 टेस्ट मैच खेले, लेकिन जीत के लिए तरसती रही.

मौजूदा भारतीय टीम के अधिकतर खिलाड़ी पहली बार लॉर्ड्स में उतरे. सिर्फ़ कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और उपकप्तान विराट कोहली को ही यहां खेलने का अनुभव है.

तेज़ गेंदबाज़ भुवनेश्वर कुमार के लिए यह टेस्ट यादगार था. वह लगातार दो टेस्ट में एक पारी में पांच विकेट और हाफ़ सेंचुरी बनाने वाले तीसरे ऑल राउंडर बन गए हैं. इससे पहले, ये रिकॉर्ड रिचर्ड हेडली और इयन बॉथम के नाम दर्ज था.

लॉर्ड्स में पहली पारी में भारत ने 295 रन का स्कोर बनाया, इससे पहले लॉर्ड्स में पहली पारी में भारत का सर्वाधिक स्कोर 1952 में बनाया गया 235 रन था.

इस टेस्ट से पहले तक लॉर्ड्स में पहले बल्लेबाज़ी करते हुए भारतीय टीम सिर्फ़ एक बार (1979 में) पराजित नहीं हुई थी.

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