रोमांचक दौर में पहुंचा हॉकी विश्व कप

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
इन दिनों एक तरफ़ जहां ब्राज़ील में शुरू होने जा रहे विश्व कप फ़ुटबॉल टूर्नामेंट का बुखार धीरे-धीरे खेलप्रेमियों पर चढ़ता जा रहा है वहीं दूसरी तरफ हॉलैंड में खेले जा रहे विश्व कप हॉकी टूर्नामेंट के सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले तय हो गए है. मंगलवार को पूल-बी के अंतिम मैच खेले गए.
इस विश्वकप में 12 टीमें भाग ले रही है जिन्हें दो पूल में बांटा गया. पूल-ए से पिछली चैंपियन ऑस्ट्रेलिया ने लीग चरण में पांचों मैच जीतते हुए 15 अंकों के साथ शीर्ष पर रहते हुए सेमीफ़ाइनल में जगह बनाई.
इसी पूल से इंग्लैंड ने पांच मैचों में तीन जीत, एक हार और एक ड्रा मैच के साथ दस अंकों सहित दूसरे स्थान पर रहते हुए सेमीफ़ाइनल की राह पकड़ी.
दूसरी तरफ पूल-बी में अर्जेंटीना ने इस विश्व कप में उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए लीग चरण में पांच में से चार मैचों में जीत हासिल करते हुए 12 अंकों के साथ सेमीफ़ाइनल का रास्ता तय किया.
इसी पूल से मेज़बान हॉलैंड भी सेमीफ़ाइनल में पहुंचने में कामयाब रहा. विश्व कप के फ़ाइनल में कौन पहुंचेगा इसका फ़ैसला 13 जून शुक्रवार को होने वाले दोनों सेमीफ़ाइनल के बाद होगा.
ऑस्ट्रेलिया ने इस विश्व कप में अभी तक 19 गोल किए हैं और विपक्षी टीमों को उसने अपने गोल पोस्ट से दूर ही रखा है. ऑस्ट्रेलिया के क़िले में सेंध लगाना विपक्षी टीमों के लिए कितना मुश्किल है यह जानने के लिए बस इतना ही काफ़ी है कि उसके ख़िलाफ केवल एक गोल ही हो सका है.
भारत की कमज़ोरी

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इस विश्व कप में भारत भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मिडफील्डरों में से एक सरदार सिंह की कप्तानी और अपने समय में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे ऑस्ट्रेलिया के टेरी वाल्श की कोचिंग में उम्मीदों के साथ हॉलैंड पहुंचा था.
वाल्श ने वैसे तो टूर्नामेंट शुरू होने से पहले कोई बडे-बडे दावे नहीं किए थे लेकिन टीम इतना कमज़ोर खेल दिखाएगी ऐसा भी किसी ने नही सोचा था. पिछले विश्व कप में भारत राजपाल सिंह की कप्तानी में आठवें स्थान पर रहा था लेकिन इस बार वह नौवें से दसवें स्थान के लिए 14 जून शनिवार को दक्षिण कोरिया के ख़िलाफ़ खेलेगा.
भारत ने इस विश्वकप में अपना अभियान का आगाज़ बेल्जियम के ख़िलाफ 2-3 से हार के साथ किया. भारत ने 50 मिनट तक 2-1 की बढ़त बनाई हुई थी लेकिन 56वें मिनट में बेल्जियम ने गोगनार्ड के गोल की मदद से पहले तो 2-2 से बराबरी की और उसके बाद केवल 15 सेकेंड बाक़ी रहते डोहमन के गोल से भारत को 3-2 से हरा दिया.
अगले मुक़ाबले में भारत का सामना इंग्लैंड से था. भारत ने इंग्लैंड के ख़िलाफ 68 मिनट तक 1-1 से बराबरी वाला संघर्षपूर्ण खेल दिखाया लेकिन अंतिम क्षणों में गोल खाने की बीमारी भारत पर भारी पडी. खेल समाप्त होने से केवल एक मिनट पहले इंग्लैंड के साइमन मेंटेल ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर भारत को 1-2 से हार के मुंह में धकेल दिया.
भारी पड़ी गलतियां

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भारत का अगला मुक़ाबला स्पेन से था जहां दोनों टीमें 1-1 से बराबरी पर रही. इसके बाद भारत ने जैसे-तैसे इस विश्व कप में अपनी हासिल की और मलेशिया को बमुश्किल 3-2 से हराया. भारत ने अपना अंतिम पूल मैच इस विश्व कप की सबसे ताक़तवर टीम ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ खेला और वहां उसे 0-4 से करारी हार का सामना करना पडा.
ऑस्ट्रेलिया का भारत के ख़िलाफ़ बेहद दमदार रिकॉर्ड है. ऑस्ट्रेलिया 1978 के बाद से भारत के कभी नही हारा है.
भारत के कप्तान सरदार सिंह ने स्वीकार किया है कि पूरे टूर्नामेंट में खिलाड़ियों ने लगातार छोटी-छोटी ग़लतियां की जिसका नतीजा हार के रूप में आया. इसके अलावा उनका मानना है कि फॉरवर्ड लाइन में सभी युवा खिलाड़ी है और उनका अनुभवहीन होना टीम पर भारी पडा.
भारत पूल मैचों में केवल सात गोल कर सका जबकि उसके ख़िलाफ़ 12 गोल हुए. भारत पूल-ए में चार अंकों के साथ पांचवें स्थान पर रहा. हालांकि भारत के लिए केवल अनुभवी गोलकीपर पी श्रीजेश ने शानदार खेल दिखाया.
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