बीवी नहीं क्रिकेट है मेरा पहला प्यार: प्रवीण तांबे

- Author, वैभव दीवान
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मुंबई का मुलुंड इलाका. जहां मैं एक ऐसे क्रिकेटर से मिलने गया जो 42 साल की उम्र में मुंबई की रणजी टीम में चुना गया. पता ढूंढते ढूंढते मुझे कुछ सात-आठ बच्चों का झुंड दिखा.
ये बच्चे बैट और बॉल लेकर जिस क्रिकेटर का इंतज़ार कर रहे थे वो थे प्रवीण तांबे.
पहला बच्चा बोला : अंकल मेरे बैट पर पहले ऑटोग्राफ़ दो में सबसे पहले आया था.
दूसरा बोला : पागल अंकल बॉलर है मेरी बॉल पर करेंगे.
फिर मैं बोला : अंकल मुझे इंटरव्यू देंगे और आप सब तस्वीर खिंचाएँगे.
आईपीएल के छठे संस्करण में राजस्थान रॉयल्स के लिए तुरुप का पत्ता साबित हुए प्रवीण तांबे. जब टीवी पर गेंदबाज़ी करते इन्हें देखा गया तो सबका एक ही सवाल था: कौन है ये खिलाडी?

रिकॉर्ड देखे गए, गूगल पर इनको ढूँढा गया पर इनका कोई निशान नहीं.
42 साल की उम्र में आईपीएल डेब्यू और चैंपियंस लीग टी-20 में गोल्डन विकेट अवॉर्ड जीतने के बाद अब जाकर प्रवीण को मुंबई की रणजी टीम में जगह मिली है.वो छह दिसंबर से मुंबई और झारखंड के बीच शुरू होने वाले मैच से अपने रणजी करियर का आगाज़ करेंगे.
वो कहते हैं, "मुझे नहीं पता कि मैं कब 42 का हो गया. ये तो मुझे तब अहसास हुआ जब मीडिया में ख़बरें आईं. मेरी ऊर्जा अब भी पहले जैसी ही है."
प्रवीण के मुताबिक़, "मुंबई में क्रिकेट खेलने वाले हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वो एक बार तो मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन का शेर वाला टी शर्ट पहने. मेरा वो सपना अब पूरा हुआ है. मैं बहुत खुश हूँ."

प्रवीण बताते हैं कि वो अपने पिता को खेलते देख कर बड़े हुए. उनके दादा भी क्रिकेट खेलते थे लेकिन इस स्तर तक उनके परिवार में कोई भी नहीं पहुंचा. वो अपने बड़े भाई प्रशांत के साथ घर के आस-पास टेनिस बॉल से खेलते रहते थे.
पढ़ाई के बाद एक शिपिंग कंपनी में नौकरी मिली और साथ ही लीग और क्लब स्तर पर क्रिकेट खेलते रहे. इस बीच उन्हें कंपनी से कई बार विदेशी दौरे पर भेजा गया. कोच मिले और क्रिकेट पर फ़ोकस बढ़ता गया.
शर्त पर की शादी
प्रवीण शादीशुदा हैं. उनके 13 साल का एक बेटा और छह साल की बेटी है. उन्होंने मुझे बताया, "शादी करने से पहले मेरी एक शर्त थी. मैंने अपनी बीवी को बोल दिया था कि क्रिकेट मेरा पहला प्यार रहेगा और तुम दूसरा. मेरे क्रिकेट के प्रति इस प्रेम को देख मेरी पत्नी ने मेरा साथ दिया. इसलिए मैं भी अपने परिवार को बहुत प्यार करता हूं. शाम को काम से आने के बाद मेरा सारा समय मेरे परिवार के लिए है."
प्रवीण एक मध्यमवर्गीय युवक हैं और अपने मातापिता के घर के क़रीब एक किराये के घर में रहते हैं.

प्रवीन ने बताया कि जब चैंपियंस लीग टी-20 में उन्हें बेहतरीन गेंदबाज़ का अवॉर्ड मिला तो उनके इलाके में जश्न का माहौल था. लोग, उनके नाम के नारे लगा रहे थे. उनकी मां, मोहल्ले में मिठाई बांट रही थीं.
प्रवीण कहते हैं, "अब लोग मुझे जानने लगे हैं. ऑटोग्राफ मांगते हैं. फ़ोटो खींचते हैं. पर मैं आज भी लोकल ट्रेन में सफ़र करता हूँ. अभी ज़्यादा बड़ा नहीं बना हूं ना."
'सचिन प्रेरणा और द्रविड़ आदर्श'
जब 40 की उम्र में सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया तो प्रवीन तांबे 42 साल की उम्र में अपने करियर का आगाज़ कर रहे हैं.
तेंदुलकर के आख़िरी टैस्ट मैच के तीनों दिन प्रवीण वानखेड़े स्टेडियम में मौजूद रहे. वो कहते हैं, "मुझे नहीं लगता था कि क्रिकेट के भगवान इतनी जल्दी संन्यास ले लेंगे. वो अभी और तीन-चार साल क्रिकेट खेल सकते थे. उनके संन्यास पर मुझे काफी दुःख हुआ. मैंने उन्हें नेट्स में 30-30 मिनट गेंदबाज़ी की. उनको खेलते देख कर लगता था कि क्रिकेट कितना आसान है. सचिन हमेशा मेरी प्रेरणा रहेंगे."

राहुल द्रविड़ के नेतृत्व में राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा रहे प्रवीण उन्हें अपना आदर्श मानते हैं. वो कहते हैं, "राहुल भाई ने मुझमें एक नया आत्मविश्वास भर दिया. टीम के हर सदस्य को वो एक जैसा समझते थे. मुझे टीम में कभी ये नहीं लगा की मैंने कभी कोई बड़े लेवल का क्रिकेट नहीं खेला. मुझे हमेशा ऐसा लगता था कि मैं उनके जैसा ही हूं."
जब प्रवीण से मैंने 2013 के आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के कुछ खिलाड़ियों के कथित तौर पर मैच फ़िक्सिंग में लिप्त होने के बारे में सवाल किए तो उन्होंने इस सवाल का जवाब नहीं दिया पर ये ज़रूर कहा, "जिस टीम के कप्तान राहुल भाई हों वो कैसे ऐसी घटनाओं से प्रभावित हो सकती है. हम एक टीम की तरह ही सारी बातों को भुलाकर आईपीएल फ़ाइनल में उतरे थे."
फ़िलहाल प्रवीण का सारा ध्यान छह दिसंबर से शुरू होने वाले अपने पहले रणजी ट्रॉफ़ी मैच पर है.
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