क्या सचिन का महिमामंडन ठीक है?

सचिन तेंदुलकर
इमेज कैप्शन, सचिन तेंदुलकर मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में अपना आख़िरी टेस्ट मैच खेल रहे हैं.

जबसे पता चला है कि वेस्टइंडीज़ के साथ भारत की ये टेस्ट सिरीज़ सचिन की विदाई सिरीज़ होगी, तभी से मीडिया में सचिन तेंदुलकर के बारे में काफ़ी कुछ लिखा गया है. मीडिया का हर कोना सचिन से पटा पड़ा है.

इसमें कोई शक़ नहीं है कि सचिन एक महान खिलाड़ी हैं और 24 साल तक उन्होंने क्रिकेट के मैदान पर अपना जलवा दिखलाया है. टेस्ट क्रिकेट में उनके बल्ले से 51 शतक निकले.

इसके अलावा एक दिवसीय क्रिकेट में उन्होंने 49 शतक लगाए. टेस्ट क्रिकेट में 15,000 से अधिक रन बनाने वाले वे अकेले खिलाड़ी हैं. इसके अलावा 100 अंतरराष्ट्रीय शतक का अनोखा रेकॉर्ड भी उनके नाम है.

लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि खिलाड़ी कभी खेल से बड़ा नहीं होता और सचिन भी इसका अपवाद नहीं हैं.

जब सचिन ने क्रिकेट को अलविदा कहने का फ़ैसला किया तो उनका गुणगान करने के लिए जैसे लोगों में होड़ लग लग गई. यहां तक कि उनके नाम पर डाक टिकट भी जारी किया गया.

टॉस के लिए सोने के सिक्के पर सचिन की तस्वीर थी. उनके कट-आउट हर जगह लगे थे.

कुछ लोगों का आरोप है कि वॉनखेड़े स्टेडियम में क्रिकेट के शौकीनों की बजाय वीआईपी श्रेणी के लोगों को प्राथमिकता दी गई. मीडिया के एक हिस्से में उन्हें ‘भारत रत्न’ के तौर पर दिखाया जा रहा है.

क्या किसी खिलाड़ी को लेकर इतना महिमामंडन ठीक है?

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