अच्छे और बुरे राष्ट्रमंडल खेल

- Author, कैमरन बटल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, स्कॉटलैंट
अगले साल जुलाई में स्कॉटलैंड तीसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा. इससे पहले वहां दो बार इन खेलों का आयोजन एडिनबरा में हुआ था और ये दोनों ही आयोजन एक-दूसरे से काफी अलग रहे.
साल 1970 में एडिनबरा में हुए राष्ट्रमंडल खेलों को बेहद सफल माना गया था क्योंकि उस वक़्त बहुत सी बातें पहली दफ़ा हुई थीं.
तब पहली बार फ़ोटो फ़िनिश इस्तेमाल किया गया था और पहली बार ही साम्राज्यवादी मापों की जगह मीट्रिक यानी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मापों का इस्तेमाल किया गया.
यही नहीं, तभी पहली बार इन्हें ब्रितानी या साम्राज्यी खेलों की बजाय राष्ट्रमंडल खेल कहा गया.
एडिनबरा का रुतबा बढ़ा
काउंसलर एरिक मिलिगन साल 1970 में कम उम्र के थे और उन्होंने एडिनबरा राष्ट्रमंडल खेलों को देखा था और जब इस शहर में दोबारा साल 1986 में इन खेलों का आयोजन हुआ, तो वे स्थानीय परिषद के नेता थे.
मिलिगन बताते हैं, “मैं समझता हूं कि साल 1970 में ग़ज़ब का माहौल था, जिसमें एडिनबरा नई कामयाबियां हासिल कर रहा था और हर तरफ चहल-पहल थी.”
उनके अनुसार, “हर कोई देखना चाहता था कि हमारे खिलाड़ियों को कितने पदक मिल पाएंगे.”
“मैं सोचता हूं कि हर तरफ उत्साह का माहौल था, जो गर्व में बदला.”
वे कहते हैं, “इससे कहीं न कहीं स्कॉटलैंड की राजधानी के तौर पर एडिनबरा की छवि मज़बूत हुई और निश्चित रूप से एडिनबरा का अंतरराष्ट्रीय प्रभाव भी बढ़ा.”
साल 1970 के एडिनबरा खेलों में स्कॉटलैंड के लिए पदक जीतने वालों में लैची स्टुअर्ट भी थे. कांटेदार मुक़ाबले में स्टुअर्ट ने ऑस्ट्रेलिया के रॉन क्लार्क को पछाड़ा और 10 हजार मीटर स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया.
लैची बताते हैं, “स्कॉटलैंड में होना ओलंपिक में होने जैसा था.”
कामयाबी
वैसे इन खेलों के लिए स्टुअर्ट की तैयारी का क़िस्सा भी कम दिलचस्प नहीं. उस समय वे दांतों के एक अस्पताल में काम करते थे.
वो कहते हैं, “मैं अपने काम पर दौड़कर जाता था और दौड़कर ही वापस आता था. मैंने मार्च में सब शुरू किया था और जुलाई-अगस्त में खेलों का आयोजन होना था, लेकिन ज़्यादातर लोगों को लगता था कि मैं वर्षों से अभ्यास कर रहा था.”
इन खेलों में स्कॉटलैंट को खासी संख्या में पदक मिले थे. कुल 40 देशों ने 1970 के एडिनबरा राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लिया था और पदक तालिका में स्कॉटलैंड चौथे स्थान पर रहा.
एडिनबरा में दूसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन 1986 में हुआ.

उस वक़्त बहुत उम्मीदें थी कि एक बार फिर बेहद सफल खेलों का आयोजन होगा, लेकिन दूसरे आयोजन की कहानी अलग रही.
तब इनकी अहम बात यह थी कि लोगों ने डंडी लिज़ मैककोलगान को 10 हजार मीटर स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतते देखा.
पत्रकार डेरेक डगलस उन दिनों को याद करते हुए कहते हैं, “मैंने वो स्पर्धा नहीं देखी थी. मैं स्टेडियम के पास ही एक पब में था लेकिन स्टेडियम में मौजूद लोगों के शोर को आसानी से सुन पा रहा था. बहुत ही ज़बर्दस्त माहौल था.”
राशि की दिक्कत
डेरेक डगलस 1986 के एडिनबरा राष्ट्रमंडल खेलों पर 'अनफ्रेंडली गेम्स' नाम से किताब भी लिख चुके हैं.
इन खेलों के बारे में डेरेक कहते हैं, “1970 में जब एडिनबरा ने राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन किया था, तो उन्हें बीयर और सैंडविच के लिए राशि जुटानी थी.”
“1986 आते-आते खेलों का आयोजन काफी महंगा हो चुका था, लेकिन समस्या यह थी कि थैचर सरकार ने खेलों के लिए और पैसा देने से इनकार कर दिया था.”
1986 के खेलों की मुख्य समस्या यह भी थी कि आधे से ज़्यादा देशों ने रंगभेद पर ब्रितानी सरकार के रुख़ के चलते इनका बहिष्कार किया था.

इसके कारण प्रसारण अधिकार से मिलने वाली रक़म और प्रायोजक भी कम रह गए.
ऐसे में इन खेलों में कम ही खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और उनके समर्थकों की तादाद भी कम ही रही. 1986 के राष्ट्रमंडल खेलों की वजह से स्थानीय अर्थव्यवस्था को काफ़ी धक्का लगा.
इसकी वजह से होने वाले करोड़ों पाउंड के कर्ज़ से उबरने में भी काफ़ी समय लगा.
डगलस कहते हैं, “1986 में सारा माहौल ही बदल गया. मैदान पर खेल सफल थे, किसी तरह के सवाल नहीं उठे, लेकिन सारे सवाल पर्दे के पीछे थे और धन की दिक़्क़त से जुड़े थे.”
बेशक 1970 और 1986 के राष्ट्रमंडल खेलों से अच्छे और बुरे दोनों ही तरह के सबक मिले हैं- और अब हर कोई यही चाहता है कि 2014 के ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल अच्छी वजहों के लिए याद रखे जाएं.
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