ओलंपिक में वापसी की राह नहीं आसान

ललित भनोट
    • Author, नॉरिस प्रीतम
    • पदनाम, खेल पत्रकार

अंतरराष्‍ट्रीय ओलंपिक महासंघ ने भारत के दागी खेल अधिकारियों के ओलंपिक मूवमेंट में वापस आने पर एक बार फिर रोक लगा दी है.

लेकिन ये कहना मुश्किल है कि कितनी जल्दी भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्‍ट्रीय खेल स्पर्द्धाओं में तिरंगे तले हिस्सा ले सकेंगे.

अंतरराष्‍ट्रीय ओलंपिक महासंघ के कार्यकारी बोर्ड ने महासंघ के अर्जेंटीना में चल रहे अधिवेशन में बुधवार को अपना फैसला दे दिया.

<link type="page"><caption> दागियों को बचाने की बिसात</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/08/130825_ioa_olympics.shtml" platform="highweb"/></link>

फैसले में बोर्ड ने कहा कि ऐसे अधिकारी जिनके खिलाफ चार्जशीट दायर है वो भारतीय ओलंपिक संघ के चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकेंगे और ना ही ओलंपिक मूवमेंट का हिस्सा ही बन सकेंगे.

उधर, भारतीय ओलंपिक संघ का कहना था कि जब भारत में लोकसभा के चुनाव में भी आरोपों का सामना कर रहे लोगों को चुनाव लड़ने पर कानूनन कोई रोक नहीं है तो फिर ओलंपिक संघ मे ऐसा क्यों नहीं हो सकता.

इसका सीधा-सीधा असर ललित भनोट और अभय चौटाला पर पड़ेगा जिन के ऊपर चार्जशीट दायर हैं.

'रोक जारी'

अंतरराष्‍ट्रीय ओलंपिक महासंघ के कार्यकारी बोर्ड ने कहा है कि जब तक भारतीय ओलंपिक संघ अपने संविधान में पारदर्शिता पूर्ण कामकाज का प्रावधान शामिल करके दागी अधिकारियों को बाहर नहीं रखेगा तब तक संघ के चुनाव की मान्यता नहीं होगी.

<link type="page"><caption> ओलंपिकसंघ पर कसता शिकंजा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/08/130817_ioc_ioa_controversy_ar.shtml" platform="highweb"/></link>

भारतीय ओलंपिक संघ को पिछले साल दिसंबर महीने में निलंबित करने के बाद से ही अंतरराष्‍ट्रीय ओलंपिक महासंघ उसकी कार्य प्रणाली में सुधार करने की कोशिश कर रहा था.

संघ की जनरल असेम्बली के लिए उसने अपने दो प्रतिनिधि भी भेजे थे. लेकिन भारतीय ओलंपिक संघ और अंतरराष्‍ट्रीय ओलंपिक महासंघ में एक विषय पर मतभेद था और ये वो ही चार्जशीट वाला मुद्दा था.

अब स्थिति ये है कि भारतीय ओलंपिक संघ के ऊपर लगी रोक को हटाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता बचा है. इसके लिए भारतीय ओलंपिक संघ अंतरराष्‍ट्रीय ओलंपिक महासंघ की बात मान कर अपने संविधान में संशोधन करे और भनोट और चौटाला जैसे अधिकारियों को बाहर कर दे.

अगर ऐसा नहीं हुआ तो भारताय ओलंपिक संघ पर लगी रोक जारी रहेगी.

स्टे ऑर्डर

अभय चौटाला

लेकिन मामला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है. एक और स्थिति भी पैदा हो सकती है भले ही वो और भी खराब हो.

भारतीय ओलंपिक संघ मे दरार पड़ती नज़र आ रही है शायद इसलिए संघ की जनरल एसेम्बली चौटाला और भनोट की कुर्बानी देकर और चार्जशीट के प्रावधान को संविधान में शामिल करके अंतरराष्‍ट्रीय ओलंपिक महासंघ से प्रतिबंध हटवाने की बात कर सकते हैं.

<link type="page"><caption> सरकारी दखलांदाजी की सजा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2012/12/121204_ioc_suspends_ioa_sdp.shtml" platform="highweb"/></link>

लेकिन अगर चौटाला और भनोट कोर्ट जाकर चुनाव के खिलाफ स्टे ऑर्डर ले आए तो बात वैसी की वैसी ही रहेगी.

भारत में कोर्ट के सामने समस्या ये होगी कि अगर आरोपों का सामना कर रहे व्यक्तिओं को लोकसभा का चुनाव लड़ने पर कोई रोक नहीं है तो भारतीय ओलंपिक संघ का चुनाव किस बिना पर लड़ने से मना करेगा.

भारतीय ओलंपिक संघ भारत में एक रजिस्टर्ड संस्था होने के कारण भारत के कानून का सहारा लेगी जिसको अंतरराष्‍ट्रीय ओलंपिक महासंघ किसी भी हालत मे नहीं मानेगा.

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