आईओए ने दागियो को बचाने की बिसात बिछाई

ललित भनोट (बाएं) और सुरेश कलमाड़ी कॉमनवेल्थ घोटाले में जेल जा चुके हैं और फिलहाल ज़मानत पर रिहा हैं.
इमेज कैप्शन, ललित भनोट (बाएं) और सुरेश कलमाड़ी कॉमनवेल्थ घोटाले में जेल जा चुके हैं और फिलहाल ज़मानत पर रिहा हैं.

दागी पदाधिकारियों और अन्य अनियमिताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक परिषद् की सम्बद्धता खो बैठे भारतीय ओलंपिक संघ ने एक आपात बैठक में ऐसे प्रस्ताव पास किये हैं जो अगर मान लिए गए तो दागी पदाधिकारियों के लिए रास्ता खुला रखेंगे.

रविवार शाम एक बैठक में भारतीय ओलंपिक संघ ने कहा वो उन पदाधिकारियों को नहीं हाटाना चाहते जिन पर आरोप साबित नहीं हुए हैं.

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक परिषद को अपनी बहाली के लिए भेजे गए एक प्रस्ताव में भारतीय संघ ने कहा की वो उन लोगों को संघ में सदस्य या पदाधिकारी नहीं बनने देंगे जिन्हें दो साल की सज़ा हो चुकी हो.

यदि यह प्रस्ताव मान लिया जाता है तो राष्ट्रमंडल खेलों में घोटालों के आरोप में नौ महीने जेल में बिता चुके <link type="page"><caption> ललित भनोट</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/02/110223_cbi_arrest_pn.shtml" platform="highweb"/></link> राहत की सांस ले सकेंगें क्योंकि उनपर अभी तक केवल आरोप पत्र दायर है.

उल्लेखनीय है कि ललित भनोट के अलावा संघ के पूर्व पदाधिकारी सुरेश कलमाड़ी और वीके वर्मा भी इस घोटाले में जेल जा चुके हैं और फ़िलहाल तीनों ज़मानत पर रिहा हैं.

भनोट बैठक में मौजूद

आईओए के पूर्व पदाधिकारी सुरेश कलमाड़ी पर लगे हैं कई आरोप.
इमेज कैप्शन, आईओए के पूर्व पदाधिकारी सुरेश कलमाड़ी पर लगे हैं कई आरोप.

निलंबित भारतीय ओलंपिक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तरलोचन सिंह ने सभा समाप्त होने के बाद कहा, ''आरोप लगने से दोषी करार नहीं दिया जा सकता- भारत में बहुत से लोगों पर आरोप लगते रहे हैं- संसद में भी ऐसे लोग हैं जिन पर आरोप लगे हुए हैं. जब तक दोषी साबित नहीं होता तब तक वह अपराधी घोषित नहीं किए जा सकते.''

इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि ज्यादातर पदाधिकारी राजनेता हैं, जिनके खिलाफ़ बेहद आसानी से आरोप पत्र दाखिल किए जा सकते हैं और ऐसे तो पूरा संघ ही जेल जा सकता है.

तरलोचन सिंह ने कहा, "छोटी-मोटी दुर्घटना होने, चेक बाउंस होने और यहां तक कि धरना-प्रदर्शन करने पर भी किसी के खिलाफ़ आरोप पत्र दाखिल किया जा सकता है. हमने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा पदों पर बने रहने की तय सीमा को मान लिया है. हम उम्र संबंधी संशोधन को भी मानने को तैयार हैं, लेकिन ये सब बातें भारतीय ओलंपिक संघ पर लागू होंगी न कि दूसरे खेल संघों पर."

भनोट पिछले चुनाव (4 दिसंबर) में महासचिव चुने गए थे. वह फिर चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र हैं. नए चुनाव अगले महीने 29 तारीख को है.

इस बैठक में आईओसी के पर्यवेक्षक फ्रांसिस्को जे एलज़ादे मौजूद थे. वह इस बारे में अपनी रिपोर्ट आईओसी को सौंपेंगे, उसके बाद आईओसी को तय करना है कि निलंबित भारतीय ओलंपिक संघ के भविष्य को लेकर क्या कदम उठाए.

बैठक में निलंबित आईओए के अध्यक्ष अभय चौटाला सहित संघ के 161 सदस्य मौजूद थे.
इमेज कैप्शन, बैठक में निलंबित आईओए के अध्यक्ष अभय चौटाला सहित संघ के 161 सदस्य मौजूद थे.

इस बैठक में निलंबित भारतीय ओलंपिक संघ के कार्यवाहक अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्रा मौजूद नहीं थे, लेकिन निलंबित आईओए के अध्यक्ष अभय चौटाला, महासचिव ललित भनोट पूरे समय सभा में मौजूद रहे. इनके अलावा आईओसी में (एकमात्र) भारतीय प्रतिनिधि रणधीर सिंह मौजूद थे. कुल मिलाकर 182 में से 161 सदस्य बैठक में मौजूद थे.

नैतिक आयोग जांच करेगा

इसके अलावा निलंबित भारतीय ओलंपिक संघ ने आरोप पत्र दाखिल सदस्यों के संबंध में फैसले के लिए एक नैतिक आयोग (एथिक्स कमीशन) बनाया है, जिसके तीन जज हैं. खेल प्रशासक के खिलाफ़ आरोप लगने पर नैतिक आयोग जांच करेगा और 60 दिन में अपनी रिपोर्ट कार्यकारी परिषद को देगा. आईओसी ने 15 अगस्त को आईओए को एक पत्र लिखकर कई संशोधन करने को कहा था.

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के प्रतिनिधि मंडल के सदस्य फ्रांसिस्को ने कहा, ''भारत बड़ा लोकतंत्र है. निलंबित समिति के 161 सदस्यों ने हिस्सा लिया. मैं इतनी बड़ी बैठक में पहली बार शामिल हुआ हूं. बैठक में जो कुछ हुआ मैं उससे संतुष्ट हूं.

अगले महीने मैं फिर वापस आऊंगा इलेक्शन के लिए, गारंटी नहीं कि निलंबन हट जाएगा.'' अब देखना है कि निलंबित भारतीय ओलंपिक समिति के इस कदम पर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति क्या कदम उठाती है.

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