एशेज़: क्या अगले कुछ साल ऑस्ट्रेलिया के लिए बुरे ही रहेंगे?

पहले टेस्ट में सिर्फ 14 रन से जीतने वाली इंग्लैंड की टीम ने दूसरा टेस्ट 347 रन से जीत लिया है.
इसके साथ इंग्लैंड न सिर्फ सीरिज़ जीतने के क़रीब है बल्कि <link type="page"><caption> ऑस्ट्रेलिया</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/06/130613_david_warner_suspended_sk.shtml" platform="highweb"/></link> पर उसकी बादशाहत लंबी खिंच सकती है.
लॉर्ड्स की चमकीली शाम में जीत का जश्न मनाने वाले <link type="page"><caption> इंग्लैंड</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/07/130718_ashes_score_pp.shtml" platform="highweb"/></link> के प्रशंसकों के लिए ये वाकई उत्तेजित करने वाला दिन और हैरान करने वाले आंकड़े हैं.
अपने घरेलू मैदान पर इंग्लैंड ने 1890 के बाद से कभी भी एशेज़ के पहले 2 मैच नहीं जीते. घरेलू मैदान पर इंग्लैंड की ये एशेज़ में सबसे बड़ी जीत है और विदेशी धरती पर भी इससे ज़्यादा रनों से सिर्फ एक बार ही जीत हाथ लगी है.
इसलिए क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स पर ऐसी जीत किसी सपने जैसी प्रतीत हो रही है. लॉर्ड्स में ऑस्ट्रेलिया एक सदी से ज्यादा वक्त में सिर्फ 2 बार हारा है.
पिछली एशेज़ सीरीज़ में मेलबर्न में पारी की हार की ओर बढ़ते हुए इंग्लैंड के कुछ प्रशंसक ऑस्ट्रेलिया पर एक पुराने फुटबॉल नारे लगाते हुए ताने कस रहे थे. लेकिन अब ये कहना ऑस्ट्रेलिया से ज़्यादा बांग्लादेश के लिए अपमानजनक होगा कि "क्या ये बांग्लादेश के भेष में खेल रही टीम है?"
आखिरी कील

सात दिन पहले ऑस्ट्रेलिया ब्रैड हैडिन के कुछ चौकों की मदद से सीरिज़ में 1-0 की बढ़त बनाने के करीब था लेकिन अब ये बहुत दूर की बात लगती है. तब मुकाबला रोमांचक लग रहा था लेकिन अब ताबूत में आख़िरी कील ठोकी जा रही है.
सिर्फ एक बार ही ऑस्ट्रेलिया 2-0 से पिछड़ने के बाद एशेज़ जीतने में कामयाब हुई है लेकिन ये 80 साल पहले हुआ था. तब डॉन ब्रैडमैन टीम का हिस्सा थे. अब जो बल्लेबाज़ हैं वो 1980 की एसेक्स टीम के खिलाड़ी डॉन टॉपल जितने ही अच्छे हैं. तब वो वक्त की परवाह किए बगैर खेलते थे और अब पांच दिन भी नहीं खेल पाते.
खेलों का एक और गाना है जो ऐसी बुरी हारों के बाद अक्सर इस्तेमाल होता है. ऑस्ट्रेलिया के लिए बुरी ख़बर ये है कि इंग्लैंड से हर हफ्ते उनकी टक्कर हो रही है.
5-0 का स्कोर अब इस सीरिज़ में उकसावा नहीं बल्कि काफी हद तक संभव नज़र आ रहा है. अगर ये बात तर्कसंगत न लगे कि ऐसा रिकॉर्डतोड़ बदला संभव है तो भी दोनों टीमों में फासला इतना बड़ा है कि आने वाली सीरिज़ के लिए पहले ही कितना नुकसान हो चुका है.
खिलाड़ियों से परेशानी
ऑस्ट्रेलिया को टीम में शामिल खिलाड़ियों से परेशानी है और उन <link type="page"><caption> खिलाड़ियों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/06/130625_cricket_world_cup_1983_vr.shtml" platform="highweb"/></link> से भी परेशानी है जो टीम में नहीं हैं.
उनका नया कोच उनके खेल में सुधार नहीं कर सकता और पुराना कोच उनसे हर्जाना मांग रहा है.
जहां तक नज़र जाती है वहां तक मुसीबतें, दिक्कतें और नाकामी ही नज़र आती है.
युवा स्पिनर एश्टन एगर ने सीरिज़ के दो मैचों में स्पिनरों की मददगार पिच पर भी खास प्रदर्शन नहीं किया है.
लॉर्ड्स टेस्ट में 142 रन देकर खाली हाथ रहने वाले और पूरी सीरिज़ में 248 रन देकर 2 विकेट लेने वाले एगर ने न तो अपने कप्तान को खेल पर नियंत्रण दिया और न ही कोई असर छोड़ पाए.
एगर ने नैथन लियोन की जगह ली है जिनकी गेंदबाज़ी और आत्मविश्वास दोनों कमज़ोर हैं. लियोन को टीम से 19 साल के एगर के लिए हटा दिया गया जो हेनले क्रिकेट क्लब के लिए खेल रहे थे.
तुरंत एलबीडब्ल्यू

टॉप ऑर्डर के शेन वॉटसन बेहद जल्दी एलबीडब्ल्यू हो जाते हैं. रविवार को इस सीरीज़ में तीसरी बार वो एलबीडब्ल्यू आउट हुए.
एशेज़ में आधे से ज्यादा बार वो एलबीडब्ल्यू हुए हैं. उनके साथ ओपनिंग करने वाले क्रिस रॉजर्स काउंटी खिलाड़ी ज़्यादा हैं जिन्हें अपने दूसरे टेस्ट के लिए 35 साल की उम्र तक इंतज़ार करना पड़ा.
पिछले 10 टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के टॉप 3 बल्लेबाज़ों में से किसी ने शतक नहीं बनाया.
ऑस्ट्रेलिया की इस बुरी हालत का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि ऐसा आखिरी बार 1899 से 1902 के बीच हुआ था.
चौथे नंबर पर आने वाले फिल ह्यूज स्लेट पर पानी की तरह क्रीज़ पर टिकते हैं. छठे नंबर पर आने वाले स्टीव स्मिथ बैटिंग ऑर्डर में कम से कम एक पायदान ऊपर हैं.
इस मोड़ पर उम्मीद की जाती है कि कोई टीम उन खिलाड़ियों पर ध्यान देगी जो नहीं खेल रहे. लेकिन वो दिन लद गए जब ऑस्ट्रेलिया के पास माइकल बेवन और स्टुअर्ट लॉ जैसे खिलाड़ी होते थे जो मौका मिलने का इंतज़ार करते थे.
दमदार खिलाड़ी
साइमन कैटिच काउंटी क्रिकेट में रन बना रहे हैं लेकिन वो 37 साल के हैं और चयन समिति के चेयरमैन ने उन्हें कह दिया है कि वो दोबारा टीम में कभी नहीं चुने जाएंगे.
रिकी पॉन्टिंग? पॉन्टिंग रिटायर हो चुके हैं और शायद ऑस्ट्रेलिया ये भी उम्मीद करे कि शेन वॉर्न और मैक्ग्राथ दोबारा खेलेंगे.
इंग्लैंड के दौरे पर आई टीम में सिर्फ डेविड वॉर्नर दमदार हैं जो टैक्सी ड्यूटी के बजाय मोटर स्पोर्ट डेमोलिशन डर्बी के ज्यादा काबिल नजर आते हैं. लेकिन पिछले महीने जो रूट को अपने मुक्के से सीरिज से बाहर करने में नाकाम रहने के बाद वो ज़िम्बाब्वे में भी रन बनाने में नाकाम रहे हैं.
रविवार को डेविड वॉर्नर को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के ज़रिए एक बयान जारी करना पड़ा जिसमें उन्होंने अपने भाई स्टीवन के अपमानजनक ट्वीट के लिए माफी मांगनी पड़ी.
स्टीवन ने अपने ट्वीट में न सिर्फ वॉटसन को भला-बुरा कहा था बल्कि मिकी ऑर्थर को बलि का बकरा बताकर एक नई खेल संस्कृति भी शुरू की थी.
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने भले ही शिकायत की हो लेकिन वो खुद एक दिन पहले गलती से हुए ट्वीट के लिए माफी मांगने में व्यस्त था. इसे अव्यवस्था कहना थोड़ी दया दिखाने जैसा होगा.
मुश्किलों में भी उम्मीद

वहीं इंग्लैंड की टीम अपनी मुश्किलों में भी कुछ उम्मीद की बात ढूंढ सकती है. इंग्लैंड के चार सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों ने अब तक कोई बड़ा स्कोर नहीं बनाया है और इसके बावजूद वो 2-0 से आगे हैं.
कप्तान एलेस्टर कुक का सीरिज़ में औसत 83 रहा है, केविन पीटरसन का 85, जॉनाथन ट्रॉट का सिर्फ 26 और साल में सबसे बढ़िया प्रदर्शन करने वाले मैट प्रॉयर का सिर्फ 13.
इसलिए अगर पीटरसन तीसरे टेस्ट में नहीं भी खेल पाते तब भी ये उतना बड़ा झटका नहीं होगा जितना हो सकता था. बाकी तीन बल्लेबाज निश्चित तौर पर खेल में सुधार करेंगे. और ये ऑस्ट्रेलिया के बच्चों को डराकर सुलाने के लिए काफी है.
इंग्लैंड की गेंदबाजी में भी नॉटिंघम के मुकाबले लंदन में सुधार हुआ है. टिम ब्रेज्नन की सधी हुई और किफायती गेंदबाजी में स्टीवन फिन के मुकाबले सुधार हुआ है. ग्रीम स्वान को इसी तरह स्पिन के लिए मददगार पिचें मिलती रहेंगी और वो उनका ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाएंगे.
जहां एगर ने हर 252 गेंदों पर 124 के औसत से एक विकेट लिया है वहीं स्वान ने औसतन 50 गेंदों पर 1 विकेट लिया है, 22 के औसत से.
इंग्लैंड की टीम और उसके समर्थक कभी भी पसंदीदा रहने के आदी नहीं रहे हैं, उन्हें हमेशा अंडरडॉग माना गया लेकिन अब उन्हें शायद इसकी आदत डालनी होगी.
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