नाकामियों से बहुत सीखा है मैंनेः शिखर धवन

- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
"दुख तो ज़रूर होता है कि कभी चयन नही होता तो कभी टीम में जगह नही मिलती, लेकिन मैं इससे निराश नही हूँ क्योंकि इन्हीं बातों ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है. मैं बहुत खुश हूं. अपनी ग़लतियों से सीख-सीख कर परिपक्व हुआ हूँ."
ये शब्द थे भारत के कामयाब सलामी बल्लेबाज़ और भरोसे की नई पहचान बन चुके शिखर धवन के, कुछ समय पहले जब वे भारतीय टीम का हिस्सा नहीं बने थे. मौक़ा था दिल्ली के फिरोज़शाह कोटला मैदान में जनवरी की कड़कती ठंड में इंग्लैंड टीम के ख़िलाफ़ डे-नाइट दोस्ताना मैच.
इस मैच में शिखर धवन ने धुंआधार बल्लेबाज़ी करते हुए कप्तान की पारी खेली और 110 रन बनाकर दिल्ली की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जबकि दिल्ली के सामने जीत के लिए 295 रनो का विशाल लक्ष्य था.
शिखर धवन की इस पारी ने क्रिकेट प्रेमियों के मन में यह उम्मीद पैदा कर दी थी कि हो ना हो अब भारतीय टीम में उन्हें आने से रोक पाना चयनकर्ताओं के लिए बेहद मुश्किल होगा.
भले ही क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की पाबंदियों के कारण अब खिलाड़ियों से बातचीत करना कठिन होता है लेकिन जब भी शिखर धवन से बातचीत की तो उनके आत्मविश्वास में कभी कोई कमी महसूस नही की.
भारतीय रिकॉर्ड

आख़िरकार धवन का धैर्य रंग लाया और मौक़ा मिलते ही उन्होने शिखर को चूम लिया.
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ तो शिखर को मौक़ा नही मिला लेकिन भारत दौरे पर आई ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध उन्हे तीसरे टेस्ट मैच में टीम में जगह मिली. इस मैच में उन्होने 187 रन बनाते हुए पहले ही टेस्ट में सर्वाधिक रन बनाने का भारतीय रिकार्ड भी बना दिया.
इसी टेस्ट मैच के दौरान उनके हाथ में चोट लगी और वह दिल्ली में खेला गया अगला टेस्ट मैच नही खेल सके.
इसके बाद उनका बल्ला इंग्लैंड में आख़िरी बार आयोजित की गई आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी में भी जमकर बरसा और उन्होने दक्षिण अफ़्रीक़ा के ख़िलाफ़ 114, वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ नाबाद 102, पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 48, श्रीलंका के ख़िलाफ़ सेमीफाइनल में 68 और फ़ाइनल में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 31 रन बनाकर चयनकर्ताओं के भरोसे को सही साबित किया.
इसके बाद वेस्टइंडीज़ में खेली गई त्रिकोणीय एक दिवसीय सीरीज़ में भी उन्होंने पाँच मैचों में संतोषजनक प्रदर्शन करते हुए 135 रन बनाए.
शिखर धवन हॉलाकि इससे पहले भारत के लिए पॉच एक दिवसीय मैच खेल चुके थे लेकिन इनमें याद रखने योग्य केवल एक पारी थी जब उन्होने पोर्ट ऑफ़ स्पेन में वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ साल 2011 में 51 रन बनाए थे.
शिखर बल्लेबाज़ी के अलावा अपने शरीर पर बने बड़े-बड़े टैटू और क़रीब-क़रीब 10 लाख रुपए से ज्यादा की अपनी पसंदीदा विदेशी मोटरसाइकिल के लिए भी जाने जाते हैं. यह बाइक फ़िल्म धूम में जॉन अब्राहम की भी विशेष पहचान थी.
प्यार से गब्बर
पिछले दिनो शतक बनाने के बाद अपनी मूँछों पर ताव देने के शिखर धवन का अलग ही तेवर सबके मन को भा गया. साथी खिलाड़ियों में वो प्यार से गब्बर के नाम से जाने जाते हैं.
वैसे शिखर धवन की कामयाबी में उनके साथी खिला़ड़ी विरेन्दर सहवाग और मुंबई इंडियन्स के लिए आईपीएल में खेलने के दौरान सचिन तेंदुलकर की सलाह का बेहद योगदान रहा लेकिन उनके कोच मदन शर्मा को भी कम श्रेय नही जाता.
मदन शर्मा शिखर के बारे में बताते हैं कि उन्हें अपनी माँ के हा़थ के बने दाल-चावल सबसे ज्यादा पसंद है.
शिखर धवन फ़िलहाल बैंगलोर में टीम के ट्रेनिंग कैम्प में हैं और ज़िम्बाब्वे दौरे के लिए तैयारी कर रहे हैं. वहाँ भारतीय क्रिकेट टीम पाँच एक दिवसीय मैच खेलेगी.
शिखर को इन दिनों मिल रही कामयाबी को देखकर यही कहा जा सकता है कि देर आए दुरुस्त आए क्योंकि वो उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जो साल 2004 के अंडर-19 विश्व कप खेल चुके हैं. इसमें उन्होने सबसे ज्यादा 505 रन बनाए थे जिसमें तीन शतक भी शामिल थे.
उम्मीद है कि आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी में गोल्डन बैट से सम्मानित होने वाले शिखर धवन अब लम्बे समय तक भारतीय क्रिकेट टीम में सलामी बल्लेबाज़ के रुप में एक छोर संभाले रखेंगे.
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