धवन, जडेजा ...भारतीय क्रिकेट टीम की उम्मीद

इंग्लैंड में हुई चैंपियंस ट्रॉफ़ी जीतकर वर्ल्ड कप विजेता भारतीय टीम ने साबित कर दिया है कि वह चैंपियनों की भी चैंपियन है. कई सालों से भारतीय क्रिकेट की पहचान बन चुके कुछ चेहरे इस नई टीम में नहीं थे. ज़हीर खान, गौतम गंभीर, वीरेंद्र सहवाग जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के बिना भी टीम अजेय रही. चैंपियंस ट्रॉफी से कई नए चेहरे छा गए और कई पुराने चेहरों को नई रौनक मिली.
शिखर धवन

शिखर धवन को आज भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ कहा जा रहा है. उनकी बल्लेबाजी तकनीक के साथ-साथ पिच पर उनके रौब की भी खूब चर्चा हो रही है.
नौ साल फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलने के बाद शिखर धवन ने मार्च 2013 में अपना पहला टेस्ट मैच खेला. पहली ही टेस्ट पारी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शिखर ने 187 रन ठोंक डाले. शिखर धवन 2010 में अपनी पहली वनडे पारी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शून्य पर आउट होकर जल्द ही टीम से बाहर हो गए थे.
दोबारा मौके के लिए शिखर को लंबा इंतजार करना पड़ा. लेकिन जब उन्हें मौका मिला तो वह एक स्टार के रूप में वापस आए. चैपियंस ट्रॉफ़ी के पहले दो मैचों में धवन ने लगातार दो शतक ठोंके और इसके बाद की तीन पारियों में भी शानदार फॉर्म बरकरार रखी. शिखर धवन के रूप में भारत को एक शानदार ओपनर मिल गया है.
<link type="page"><caption> पढ़ें- सहवाग और शिखर धवन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/03/130318_shikhar_dhavan_struggle_pn.shtml" platform="highweb"/></link>
रवींद्र जडेजा

रवींद्र जडेजा को पहले नजरअंदाज किया गया, फिर उन पर चुटकुले बने लेकिन वह लगातार खुद को साबित करने की कोशिश में लगे रहे और आज वह टीम का अभिन्न अंग बन गए हैं. 25 साल के जडेजा ने अब तक भारत के लिए पाँच टेस्ट, 70 वनडे और 14 टी-टवेंटी मैच खेले हैं. इस लेफ्ट ऑर्म स्पिनर ने जब भी मौका मिला है बल्लेबाजी में भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया है. चैपिंयस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में रविंद्र जडेजा अपने ऑलराउंड प्रदर्शन से 'मैन ऑफ द मैच' बने. उन्होंने नाबाद 33 रन बनाए और दो विकेट लिए.
भुवनेश्वर कुमार

युवा भुवनेश्वर कुमार भारतीय गेंदबाजी की नई उम्मीद बन गए हैं. 23 साल के भुवनेश्वर ने भारत के लिए अब तक चार टेस्ट, 13 वनडे और दो टी-ट्वेंटी मैच खेले हैं. भुवनेश्वर कुमार ने चैपियंस ट्रॉफ़ी में भी शानदार प्रदर्शन किया. भुवनेश्वर ने अपनी पहली ही गेंद पर पाकिस्तान के नासिर जमशेद को आउट कर वनडे करियर का आगाज किया था.
भुवनेश्वर कम गति की गेंदों को भी अपने नियंत्रण और स्विंग से घातक बना देते हैं. उनके अब तक के प्रदर्शन से लगता है कि वह टीम में एक भरोसेमंद गेंदबाज की कमी को पूरा कर सकते हैं.
उमेश यादव

उमेश यादव ने भारत की गेंदबाजी की जान रहे जहीर ख़ान की कमी चैंपियंस ट्रॉफ़ी में खलने नहीं दी. 140 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक रफ्तार से गेंदबाजी करने वाले उमेश यादव ने भारतीय टीम में अपनी जगह मजबूत कर ली है. नौ टेस्ट, 22 वनडे और एक टी-ट्वेंटी मैच खेल चुके उमेश यादव हर गुजरते मैच के साथ अपनी जगह और पक्की करते जा रहे हैं.
रोहित शर्मा

साल 2007 में क्रिकेट करियर का आगाज़ करने वाले रोहित शर्मा पहला टी-टवेंटी वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा थे. लेकिन वह लंबे वक्त तक टीम में जगह बरकार नहीं रख सके. वह 2011 में वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा नहीं थे. बड़े खिलाड़ियों की खराब फॉर्म ने रोहित शर्मा को टीम में वापसी का मौका दिया और अब वह लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. चैंपियंस ट्रॉफी की पांच पारियों में से तीन में उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया. मिडिल ऑर्डर में लड़खड़ाने वाले रोहित शर्मा ओपनिंग में जबरदस्त बल्लेबाजी कर रहे हैं. हाल ही में संपन्न हुए आईपीएल-6 में भी रोहित शर्मा ने अपनी शानदार बल्लेबाजी के दम पर मुंबई इंडियंस को ट्रॉफ़ी दिलाई.
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