चोट से उबरने के बाद नडाल ने रचा इतिहास

स्पेन के रफ़ाएल नडाल का जादू फ़ैशन नगरी पेरिस में खूब चलता है, अब यह बात और है कि उनका जलवा रैंप पर नही बल्कि रौलां गैरा की लाल बजरी पर बिखरता है.
जहाँ उन्होने रविवार को ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए रिकॉर्ड आठवीं बार फ्रेंच ओपन टेनिस का ख़िताब अपने नाम किया. फ़ाइनल में उन्होंने अपने हमवतन चौथी वरीयता हॉसिल डेविड फेरर को 6-3, 6-2, 6-3 से मात दी.
इसके साथ ही किसी भी खिलाड़ी द्वारा किसी एक ग्रैंड स्लैम को सबसे ज़्यादा बार जीतने वाले वह पहले खिलाडी भी बन गए. वैसे इस ख़िताब को जीतने के लिए उन्होंने अपने घुटने के दर्द को भी बर्दाश्त किया जिसकी वजह से वह सात महीने टेनिस कोर्ट से बाहर रहे.
लेकिन इसके बाद शानदार वापसी करते हुए उन्होंने फ्रेंच ओपन से पहले छह ख़िताब अपने नाम किए. कोर्ट पर उनकी वापसी फ़रवरी में हुई थी.
नडाल का फ्रेंच ओपन के फ़ाइनल में खेलना ऐसे ही था जैसे कोई उस काम को कर रहा हो जो उसके लिए बाएं हाथ का हो यानी बेहद आसान. वैसे भी लाल बजरी वाला कोर्ट उन्हें इतना रास आता है कि इस खब्बू खिलाड़ी के आगे सभी यहॉ बेहद साधारण नज़र आते हैं.
हमेशा चैंपियन
नडाल ने सेमीफाइनल में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी सर्बिया के नोवाक जोकोविच को 6-4,3-6,6-1,6-7,9-7 से हराया था और दिखाया था कि इस बार भी उनके दम-ख़म में कोई कमी नही है.
नडाल का यह 17वां ग्रैंडस्लैम फ़ाइनल था और यह उनका 12वां ख़िताब रहा.

फ्रेंचओपन के फ़ाइनल में नडाल ने फ़ेरर का सामना एक चैंम्पियन खिलाड़ी की तरह किया और पूरे मैच के दौरान कही भी नही लगा कि ख़िताब जीतने का दबाव उन पर हावी है. वैसे भी इससे पहले फ़ेरर के खिलाफ़ उनकी जीत का रिकॉर्ड 4-19 के रूप में बेहद दमदार था.
इसी महीने की तीन तारीख़ को अपना 27वां जन्मदिन मनाने वाले नडाल के टेनिस जीवन का यह 57वां ख़िताब है. नडाल इससे पहले फ्रेंच ओपन 2005, 2006, 2007, 2008, 2010, 2011 और 2012 में भी जीत चुके हैं.
वैसे भी ग्रैंडस्लैम के रूप में नडाल ने सबसे पहला खिताब फ्रेंच ओपेन ही जीता था. यानी इस खिताब से उनका नाता सबसे पुराना है. नडाल इसके अलावा टेनिस की दुनिया के सबसे बड़े खिताब विम्बलडन को भी दो बार (2008 और 2010) अपने नाम कर चुके हैं.
इसके अलावा नडाल ने 2010 में अमरीकी ओपन और 2009 में ऑस्ट्रेलियन ओपन भी जीता था. इतना ही नहीं, नडाल की शानदार उपलब्धियों में ओलम्पिक का गोल्ड मेडल भी शामिल है जब उन्होंने 2008 में बीजिंग ओलम्पिक में ये कारनामा किया था.
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