आईपीएल में फिक्सिंग- आसान या मुश्किल?

- Author, प्रदीप मैगज़ीन
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार
<link type="page"><caption> आईपीएल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130516_ipl_sreesanth_fma.shtml" platform="highweb"/></link> में जो कथित स्पॉट फिक्सिंग का मामला सामने आया है उस पर किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए क्योंकि इस टूर्नामेंट का एकमात्र मकसद ज्यादा से ज्यादा पैसा बनाना है.
पिछले छह सालों से <link type="page"><caption> आईपीएल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130515_ipl_satta_murder_rd.shtml" platform="highweb"/></link> का आयोजन हो रहा है और हर साल कुछ न कुछ विवाद जरूर होता है. इसमें काला धन लगा हुआ है. इनमें से एक टीम के मालिक तो ऐसे हैं जिन्हें <link type="page"><caption> सुप्रीम कोर्ट</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130516_court_social_networking_dp.shtml" platform="highweb"/></link> ने लोगों का पैसा वापस देने को कहा है.
इन महाशय ने 1700 करोड़ रूपए में टीम खरीदी है और उन पर फेमा के उल्लंघन के भी आरोप हैं. ऐसे माहौल में स्पॉट फिक्सिंग की बात सामने आना आश्चर्यजनक बात नहीं है.
आईपीएल ऐसा फार्मट है जिसमें फिक्सिंग और <link type="page"><caption> स्पॉट फिक्सिंग</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/04/130417_butt_fixing_appeal_pp.shtml" platform="highweb"/></link> की गुंजाइश रहती है और ये आसान है. इसमें तो बल्लेबाज़ को उल्टे सीधे शॉट खेलने का लाइसेंस मिला है. वो फुल टॉस पर आउट हो सकता है और इसी तरह की गेंद पर छक्का मार सकता है.
पैसा
मुझे समझ में नहीं आता है कि लोग जब पकड़े जाते हैं तभी बवाल क्यों होता है. भारत में जितने भी नामी खिलाड़ी हैं या कमेंटेटर हैं वो <link type="page"><caption> बीसीसीआई</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/rolling_news/2012/05/120516_ajay_makan_bcci_rn.shtml" platform="highweb"/></link> से वेतन पाते हैं.
ऐसे में अगर कोई ईमानदारी से टिप्पणी करेगा तो बोर्ड उसकी पेंशन बंद कर सकता है. इस टू्र्नामेंट में जिस तरह का माहौल है उसमें कोई भी पाक साफ नहीं रह सकता.
आईपीएल में निगरानी जैसी कोई व्यवस्था नहीं चल सकती है.
मालिकों और खिलाड़ियों का यही एकमात्र ध्येय है - ज्यादा से ज्यादा पैसा बनाना. ऐसे में कौन किसकी निगरानी करेगा.
दादागिरी

क्रिकेट की दुनिया में बीसीसीआई का सिक्का चलता है और <link type="page"><caption> आईसीसी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/rolling_news/2012/06/120625_cricket_icc_rn.shtml" platform="highweb"/></link> उसकी गुलाम है.
हाल ही में शिवा रामाकृष्णन को जिस तरह प्लेयर्स बॉडी का प्रतिनिधि बनाया गया वो विश्व क्रिकेट में बीसीसीआई की दादागिरी का प्रमाण है.
क्रिकेट की दुनिया में सारा पैसा भारत से आता है और यही वजह है कि बीसीसीआई एक तानाशाह की तरह व्यवहार कर रहा है.
क्रिकेट की बर्बादी का सबसे बड़ा कारण भारतीय बोर्ड का अहंकार है.
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