सचिन के संन्यास पर न वाह न आह

होना तो ये था कि सचिन तेंदुलकर का एक दिवसीय मैच से संन्यास लेना एक बड़ी घटना होनी चाहिए थी लेकिन ऐसा दिखता है कि इस घोषणा ने कोई बड़ी हलचल पैदा नहीं की है.
न खेल जगत में इसे लेकर कोई बड़ी लहर पैदा हुई है और न मीडिया में इसे लेकर कोई सनसनी है.
सचिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सौ शतक बनाने वाले दुनिया के एकमात्र बल्लेबाज़ हैं. उन्होंने एक दिवसीय मैचों में कुल 18426 रन बनाए. जिसमें 49 शतक और 96 अर्धशतक शामिल हैं.
ऐसे असाधारण रिकॉर्डधारी के संन्यास पर व्याप्त मौन अपने आपमें बहुत कुछ बोलता है.
'आश्चर्य नहीं'
हालांकि ऐसा नहीं है कि किसी ने कुछ कहा ही नहीं.
सबने कहा लेकिन न तो किसी ने आश्चर्य जताया और न ही ये कहा कि ये समय से पहले लिया हुआ निर्णय है.
अपने पहले ही अंतरराष्ट्रीय मैच में शतक बनाने वाले अब्बास अली बेग़ ने कहा, "पिछले कुछ समय से ख़राब फार्म से जूझ रहे सचिन से इस तरह के निर्णय पर मुझे कोई ताज्जुब नहीं हुआ, लेकिन अगर उन्हें टेस्ट क्रिकेट खेलना ही है तो फिर एक दिवसीय क्रिकेट छोड़ने की क्या ज़रुरत थी? वह पाकिस्तान के ख़िलाफ़ एक दिवसीय सीरीज़ खेलकर फार्म में आ सकते थे."
वहीं भारत के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ अतुल वासन मानते हैं, "एक दिवसीय क्रिकेट में उनके पास साबित करने के लिए कुछ ज़्यादा नही है. इंग्लैंड के ख़िलाफ़ बेहद ख़राब खेल के कारण चयनकर्त्ताओं पर भी दबाव था जिसे दूर करने के लिए उन्होंने संन्यास ले लिया, शायद वह टेस्ट क्रिकेट की ज़ोरदार तैयारी करना चाहते हैं."
वासन यह भी मानते हैं कि टेस्ट क्रिकेट में अभी उनका भारतीय टीम में बने रहना ज़रुरी है.
कई हिमायती भी
सच कहें तो सचिन के इस संन्यास की प्रतीक्षा कई दिनों से की जा रही थी.
कुछ दिन पहले भारत के पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा था कि इन दिनों सचिन जिस तरह से आउट हो रहे हैं उनका एक बहुत बड़ा प्रसंशक होने के नाते बहुत दुख होता है. उन्होंने कहा कि दुखद है कि पिछली 32 पारियों से उनके बल्ले से कोई शतक नहीं निकला है.
मनिंदर सिंह का मानना था, "मैंने उस सचिन को देखा है जो गेंदबाज़ को उसकी मर्ज़ी के हिसाब से गेंद नहीं करने देते थे. पहले लगता था कि सचिन कब और कैसे आउट होंगें, पर अब लगता है कि उनसे रन कैसे बनेंगे? इतनी दयनीय स्थिति से दो-चार होते हुए सचिन को कभी नहीं देखा."
वहीं सचिन को अभी भी टेस्ट टीम में चाहने वालों की भी कमी नहीं है.
इनमें भारत के पूर्व कप्तान अजित वाडेकर, पूर्व बल्लेबाज़ और कोच अंशुमान गायकवाड, पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज़ विजय दहिया शामिल हैं.
पूर्व विकेटकीपर और चयन समिति के अध्यक्ष रहे किरन मोरे ने सचिन के संन्यास से पहले कहा था कि अगर पुराने चयनकर्ताओं ने पिछले साल विश्व कप जीतने के बाद ही अगर नई टीम बनाने की सोची होती तो ऐसी समस्या पैदा ही नहीं होती.
खेल पत्रकार प्रदीप मैगज़ीन ने कहा है कि काफ़ी लोग सोच रहे थे वो टेस्ट क्रिकेट से भी संन्यास ले लेंगे.
उनका कहना है कि शायद ऑस्ट्रेलिया सिरीज़ से पहले वे इसकी भी घोषणा कर दे.












