
मुंबई में करारी शिकस्त के बाद भी धोनी टर्निंग विकेट की मांग पर अड़े हैं.
इन दिनों भारत और इंग्लैंड के बीच चार टेस्ट मैचों की सीरीज़ खेली जा रही है, जिसमें फ़िलहाल हार-जीत से ज़्यादा पिच की चर्चा सुर्खियों में है.
अहमदाबाद में पहला टेस्ट मैच 8 विकेट से और वह भी चार दिन में जीतने के बावजूद भारत के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने विकेट की आलोचना करते हुए कहा है कि वह भविष्य में इस तरह की विकेट देखना नहीं चाहते.
धोनी ने कहा कि वह ऐसा विकेट चाहते हैं जिस पर पहली ही गेंद किए जाने से टर्न या घुमाव मिले. मुंबई में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में उनकी बात मानी गई, नतीजा चौथे दिन मैच ख़त्म, लेकिन जीत इंग्लैंड को मिली, वह भी 10 विकेट से.
मुबंई में करारी हार के बाद लगा कि शायद अब धोनी की ज़िद समाप्त हो जाएगी, लेकिन टर्निंग विकेट को लेकर अब धोनी हठ पर उतर आए हैं.
उनके इस हठ में अब बीसीसीआई भी शामिल हो गई है और उसने कोलकाता में खेले जाने वाले तीसरे टेस्ट मैच के लिए अनुभवी प्रवीर मुखर्जी की जगह पूर्व क्षेत्र के क्यूरेटर आशीष भौमिक को ईडन गार्डन का विकेट तैयार करने को कहा है. तनीजा ये हुआ कि प्रवीर मुखर्जी छुट्टी पर चले गए हैं.
टर्निंग विकेट नहीं ख़राब पिच की मांग
"अब वक्त आ गया है कि बोर्ड धोनी से कहे कि वह अपना ध्यान खेल पर लगाएं और पिच बनाने का काम क्यूरेटर पर छोड़ें. मनिंदर सिंह यह भी कहते है कि जब बल्लेबाज़ों की फ़ार्म ख़राब हो तो ऐसी विकेट की मांग तो और भी ख़राब है."
मनिंदर सिंह
कप्तान धोनी की टर्निंग विकेट बनाने की ज़िद का विरोध करते हुए पूर्व स्पिनर मनिंदर सिह ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा कि दरअसल धोनी टर्निंग विकेट नहीं ख़राब पिच की मांग कर रहे हैं.
मनिंदर सिंह इससे भी आगे बढ़कर कहते हैं कि धोनी का यह दांव भारत पर ही भारी पड़ेगा क्योंकि इंग्लैंड की गेंदबाज़ी भारत से बेहतर है. भारत का आलम यह है कि एक तेज़ गेंदबाज़ घायल हुआ तो उसकी जगह आउट ऑफ फ़ॉर्म स्पिनर हरभजन सिंह को टीम में शामिल करना पड़ा.
मनिंदर सिंह कहते है कि अब वक्त आ गया है कि बोर्ड धोनी से कहे कि वह अपना ध्यान खेल पर लगाएं और पिच बनाने का काम क्यूरेटर पर छोड़ें. मनिंदर सिंह यह भी कहते है कि जब बल्लेबाज़ों की फ़ॉर्म ख़राब हो तो ऐसी विकेट की मांग तो और भी ख़राब है.
भारत के स्पिनरों में फिलहाल क्षमता नहीं

नयन मोंगिया कहते हैं कि विकेट ऐसा हो जो बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ दोनों को मदद करे.
धोनी की टर्निंग विकेट की मांग का विरोध भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज़ नयन मोंगिया भी करते हैं. उनका कहना है कि विकेट बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ दोनों को मदद करे, खासकर स्पिनर को लेकिन मैच के तीसरे दिन से ना कि पहली ही गेंद से.
इसबीच धोनी के समर्थन में भारत के सलामी बल्लेबाज़ गौतम गंभीर ने कहा है कि उनकी टर्निंग विकेट की मांग ठीक है क्योंकि इससे पहले भी भारत के पूर्व कप्तान अपने हिसाब से विकेट बनवाते रहे हैं.
वे कहते हैं कि धोनी भी भारत को जीतते हुए देखना चाहते हैं, अगर उन्हें लगता है कि टर्निंग विकेट पर भारत जीत सकता है तो उन्हें सपोर्ट किया जाना चाहिए.
"भारत के स्पिनर इस तरह के विकेट पर ज़्यादा कामयाब होंगे क्योंकि मोंटी पानेसर और स्वान हवा में तेजी से गेंद करते है और वह रफ़ या टूटते विकेट का अधिक फ़ायदा उठा सकते हैं. अनिल कुम्बले इसका सबसे बडा उदाहरण रहे हैं, लेकिन फ़िलहाल भारत के इन स्पिनरों में इतनी क्षमता नही है."
नयन मोंगिया
धोनी और गंभीर से अलग नयन मोंगिया यह भी कहते हैं कि भारत के स्पिनर इस तरह के विकेट पर ज़्यादा कामयाब होंगे क्योंकि मोंटी पानेसर और स्वान हवा में तेज़ी से गेंद करते हैं और वह रफ़ या टूटते विकेट का अधिक फ़ायदा उठा सकते हैं.
वे कहते हैं कि अनिल कुम्बले इसका सबसे बड़ा उदाहरण रहे हैं, लेकिन फ़िलहाल भारत के इन स्पिनरों में इतनी क्षमता नहीं है.
नयन मोंगिया की ही तरह भारत के पूर्व कप्तान और कोच अजीत वाडेकर का कहना है कि मुंबई में हरभजन सिंह, अश्विन और ओझा विकेट का लाभ नहीं उठा सके.
वे कहते हैं कि इसके उलट उनके समय में बेदी, प्रसन्ना, चंद्रा और वेंकट जानते थे कि इस तरह के विकेट पर किस तरह की गेंदबाज़ी की जाए और उन्हें यह भी मालूम था कि उन्हें टीम से बाहर भी किया जा सकता है.
उनके पास विशेष परिस्थितियों के लिए विशेष गेंद थी, जैसे चंद्रशेखर की फ्लोटर तेज़ गेंदबाज़ से भी तेज़ थी, उनकी गुगली भी कई तरह की थी जिसे खेलना बहुत मुश्किल था.
बेदी की फ्लाइट में विविधता थी, लेकिन भारत के इन स्पिनरों में इतनी काबिलियत नहीं है, इसलिए धोनी को पहली ही गेंद से टर्न लेने वाले विकेट की मांग नहीं करनी चाहिए.









