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भारत बनाम दक्षिण अफ़्रीका: भारतीय टीम इस वजह से रही लक्ष्य से दूर
- Author, विधांशु कुमार
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत और दक्षिण अफ़्रीका के बीच पहला वनडे मैच, लखनऊ
दक्षिण अफ़्रीका - 249/4हेनरिक क्लासेन - 74, डेविड मिलर - 75
भारत - 240/8 संजू सैमसन - 86, श्रेयस अय्यर-50
लखनऊ में एक क़रीबी मुक़ाबले में साउथ अफ़्रीका ने भारत को नौ रनों से हरा दिया. हालांकि साउथ अफ्ऱीका के 40 ओवर में 249 रनों के जवाब में भारत की शुरुआत बेहद ख़राब रही और 4 विकेट सस्ते में निपट गए, लेकिन श्रेयस अय्यर, सजू सैमसन और शार्दुल ठाकुर नें पारी को संभाला और टीम को जीत के क़रीब ले गए. लेकिन मैच के आखिरी पलों में ये ग़लती भारतीय टीम को भारी पड़ी.
49वें ओवर में टैक्टिकल ग़लती
भारत ये मैच नौ रनों से हार गया, आखिरी ओवर में 30 रनों की ज़रूरत थी और सैसमन के बल्ले से 21 रन निकले. क्या सैमसन को 3-4 गेंद और खेलने को मिलती तो वो ये रन बना नहीं सकते थे?
ये गेंदें सैमसन को मिल सकती थी अगर 39वें ओवर में बल्लेबाज़ थोड़ी सूझबूझ दिखाते. दरअसल 38वें ओवर के आखिरी गेंद पर ही गलती हो गई थी. सैमसन स्ट्राइक पर थे और दूसरी छोर पर आवेश ख़ान खड़े थे.
एन्गिडी की इस गेंद पर सैमसन बीट हो गए और गेंद को छू नहीं पाए. क्योंकिं दो ओवर ही बचे थे ऐसे में ज़रूरी था कि सैमसन स्ट्राइक अपने पास ही रखे इसलिए आवेश खान को दूसरी छोर पर दौड़ जाना था. अगर वो रन आउट भी होते तो कोई बड़ी बात नहीं थी क्योंकि सैमसन के पास स्ट्राइक होती और वो ही भारत को जिता सकते थे.
39वें ओवर में रबाडा के सामने आवेश ख़ान कमज़ोर नज़र आए और पहले दो गेंदों पर एक भी रन नहीं बना सके.
तीसरी गेंद को उन्होंने बल्ले से कनेक्ट किया और प्वाइंट के पीछे खेला, लेकिन यहां भी दोनों भारतीय बल्लेबाज़ों से चूक हो गई क्योंकि आवेश ने दो रन ले लिए और सैमसन एक बार फिर स्ट्राइक नहीं ले सके.
अगली दो गेंदों पर दो विकेट गिरे और इस तरह पूरे 39वें ओवर में एक बार भी सैमसन को बैटिंग का मौक़ा नहीं मिला. कमेंट्री में अजीत आगरकर ने भी कहा काश सैमसन ने 39वें ओवर के कुछ गेंद खेले होते तो रिज़ल्ट कुछ और होता.
इस टैक्टिकल ग़लती के अलावा मैच के ये पहलू भारत की हार में बड़ी वजह बनें -
मिलर और क्लासेन की पारियां
दक्षिण अफ़्रीका के बल्लेबाज़ डेविड मिलर की शानदार फॉर्म जारी है. आईपीएल 2022 उनके लिए सबसे खास रहा था. उन्होंने इस सीज़न अपने लिए सर्वाधिक रन बनाए और 16 मैचौं में 68 की औसत से 481 रन जोड़े.
वहीं हाल ही में खत्म भारत के ख़िलाफ़ टी20 सीरीज़ में उन्होंने 3 पारियों में 125 रन बनाए जिसमें एक शानदार शतक शामिल रहा.
गुरुवार को लखनऊ में मिलर एक बार फिर भारतीय गेंदबाज़ों की राह में सबसे बड़ा कांटा बने और नाबाद 75 रन बनाए.
क्लासेन ने भी मिलर का ज़बरदस्त साथ दिया. क्लासेन ने पहले डीकॉक के साथ बढ़िया साझेदारी कर टीम को मुश्किल से निकाला और फिर 5वें विकेट के लिए मिलर के साथ 139 रनों की पार्टनरशिप की.
उन्होंने 65 गेंदों में 74 रन बनाए जिसमें 6 चौके और 2 छक्के शामिल थे.
भारतीय टीम की ख़राब फील्डिंग
साउथ अफ्रीका का स्कोर 249 से बहुत कम रह सकता था अगर भारतीय टीम ने फ़ील्डिंग में ग़लतियां ना की होती.
साउथ अफ्रीका के विरुद्ध टी20 सीरीज़ के बाद रवि शास्त्री ने कमेंट्री में कहा था कि उनके लिए सबसे निराशाजनक बात रही भारतीय टीम की साधारण फील्डिंग.
इस मैच में भी भारत ने चार कैच छोड़े. गायकवाड़ ने सिराज की गेंद पर मिलर को ड्रॉप किया. वहीं आवेश ख़ान की गेंद पर दो कैच छूटे- पहले सिराज ने क्लासेन का कैच छोड़ा और फिर बिश्नोई ने अगले ही गेंद पर मिलर को फिर एक जीवनदान दिया.
अगर किसी मैच में मिलर के दो कैच छूटे और क्लासेन को भी जीवनदान मिले तो टीम का स्कोर बड़ा होना तय ही है. साउथ अफ्रीका ने साधारण शुरुआत के बावजूद आखिरी में ताबडतोड़ बैटिंग की और एक मुश्किल पिच पर बड़ा स्कोर खड़ा किया.
साउथ अफ्रीका का नपी तुली गेंदबाज़ी
पिच पर गेंदबाज़ों को मदद मिल रही थी जिसका भरपूर फ़ायदा साउथ अफ्रीका के बोलर्स ने उठाया.
रबाडा और पार्नेल का पहला स्पेल बेहद ख़तरनाक था. रबाडा ने ओपनर शुभमन गिल को लगातार बीट किया और फिर दबाव बनाकर विकेट भी हासिल कर लिया. वहीं पार्नेल ने भारतीय कप्तान शिखर धवन को आउट किया और टीम को मुश्किल में ला दिया. गायकवाड़ और इशान किशन बी बड़ा स्कोर नहीं कर पाए और 51 रनों पर 4 विकेट खोकर टीम इंडिया बैकफ़ुट पर चली गई थी.
भारतीय टॉप ऑर्डर की धीमी बल्लेबाज़ी
भारत के टॉप चार बल्लेबाज़ों ने स्ट्राइक रोटेट ना करने की ग़लती की. हालांकि साउथ अफ्रीका के बोलर्स शानदार गेंजबाज़ी कर रहे थे लेकिन भारतीय बल्लेबाज़ भी रन बनाने की ख़ास कोशिश करते नहीं दिखे.
पहले 14 ओवर में टीम का स्कोर था 36-2 जो बड़े स्कोर का पीछा करने के लिए नाकाफ़ी था. गायकवाड़ और किशन ने तीसरे विकेट के लिए 40 रनों की साझेदारी तो की लेकिन इसके लिए उन्होंने 11 ओवर से भी ज्यादा गेंदे खेली. स्लो बैटिंग करने के बाद दोनों ही बल्लेबाज़ों ने आसानी से अपना विकेट गंवा दिए जिससे भारत की मुश्किल और बढ़ गई.
साउथ अफ्रीका के लिए यह बेहद आवश्यक जीत थी क्योंकि इसकी मदद से वो अगले साल 50 ओवर के वर्ल्र्ड कप में अपनी 12वी रैंकिंग को सुधार सकेंगे.
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