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INDvsNZ विराट कोहली बोले- शुरुआती 40 मिनट में ही बदल गया था खेल
आईसीसी विश्वकप 2019 के सेमीफ़ाइनल में हारने के बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली ने न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़ों की तारीफ़ की है.
भारतीय कप्तान ने कहा कि शुरुआती 40-45 मिनट में ही खेल का रुख़ बदल गया था.
उनके मुताबिक़, न्यूज़ीलैंड की शानदार गेंदबाज़ी के कारण टीम प्रेशर में आ गई और ग़लतियां करने के लिए मजबूर हो गईं.
हालांकि विराट ने यह भी कहा कि भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अच्छा खेल खेला है.
भारतीय कप्तान ने मैच के बाद पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए कहा, "हम हार से निराश ज़रूर हैं मगर हमारा आत्मविश्वास नहीं हिला है."
'ग़लती स्वीकार करने में शर्म नहीं'
भारतीय कप्तान ने कहा कि आज हुई हार पर अभी तुरंत कुछ कहना ठीक नहीं है, बाद में बैठकर देखना होगा कि कहां क्या ग़लत हुआ और क्या किया जा सकता था.
मगर उन्होंने न्यूज़ीलैंड की गेंदबाज़ी की खुलकर तारीफ़ करते हुए कहा, "कुछ शॉट बेशक अच्छे नहीं थे मगर रोहित शानदार गेंद पर आउट हुए, मैं भी अच्छी गेंद पर आउट हुआ. लक्ष्य बड़ा नहीं था और हमें लग रहा था कि आसानी से इसे चेज़ कर लेंगे. मगर न्यूज़ीलैंड ने जैसी गेंदबाज़ी की, उससे हमें शुरुआती 8 ओवर में शॉट खेलने का मौक़ा ही नहीं मिला. नई गेंद से उन्होंने हमें दबाव में डाल दिया. हमें इस बात को स्वीकार करने में कोई शर्म नहीं है."
विराट कोहली ने कहा कि बावजूद इसके दूसरे पहलू को देखना भी ज़रूरी है. उन्होंने कहा, "इस टूर्नामेंट में हमने अच्छा प्रदर्शन किया है. रोहित ने शानदार बैटिंग की है, बुमराह और जडेजा का प्रदर्शन अच्छा रहा है. हमने शानदार क्रिकेट खेला है और पूरी मेहनत की है. ऐसा होता है कि आप टेबल में नंबर वन होते हैं मगर नॉकआउट में बाहर हो जाते हैं. इसीलिए इन्हें नॉकआउट कहा जाता है. सामने वाला आपसे अच्छा खेलता है तो आप बाहर हो जाते हैं."
'ऋषभ युवा हैं, अभी सीखेंगे'
जब भारत के तीन विकेट गिर चुके थे, हार्दिक पंड्या और ऋषभ पंत के ऊपर भारतीय टीम की ज़िम्मेदारी थी. तभी ऋषभ पंत ने बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में कैच थमा दिया.
इस शॉट को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में पंत का बचाव करते हुए कप्तान कोहली ने कहा, "ऋषभ स्वाभाविक खेल खेलते हैं और उन्होंने हार्दिक के साथ अच्छी साझेदारी करने की कोशिश की. वह युवा हैं और जब मैं उनके जैसे दौर में था तो मैंने भी कई गलतियां की हैं. वह देखेंगे और सीखेंगे कि उस स्थिति में क्या करना चाहिए था. शायद उन्हें अहसास भी है इस बात का."
कोहली बोले, "ऋषभ ही नहीं, किसी के साथ भी खेल में ऐसा हो सकता है. लोग दिल से देश के लिए खेलते हैं और जब ग़लतियां होती हैं तो सबसे ज्यादा दुखी भी वही होते हैं. बाहर से लगता है कि ग़लती थी, मगर जो ग़लती करते हैं, उन्हें ही सबसे ज्यादा दुख होता है. वह और मज़बूत बनकर उभरेंगे, उनकी प्रतिभा भी देखने को मिलेगी."
धोनी पर क्या बोले
एक बार फिर महेंद्र सिंह धोनी धीमी पारी के लिए चर्चा में रहे. धोनी ने रविंद्र जडेजा के साथ आख़िर तक टिके तो रहे मगर उन्होंने 72 गेंदों में 50 रन बनाए.
कप्तान कोहली ने महेंद्र सिंह धोनी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने ज़रूरत के हिसाब से सही बल्लेबाज़ी की. उन्होंने कहा, "बाहर से कुछ भी कहना आसान है मगर धोनी को एक छोर संभाले रखना था. दूसरे छोर से जडेजा अच्छा खेल रहे थे. मेरे हिसाब से उनका खेल समय की ज़रूरत के अनुकूल था."
कोहली ने यह भी कहा कि धोनी से पहले पंड्या को ऊपर भेजने का मक़सद यह था कि आख़िर में अगर हालात ख़राब हों तो धोनी मोर्चा संभालने के लिए मौजूद रहें.
वर्ल्ड कप के बाद भारतीय टीम वेस्ट इंडीज़ के दौरे पर जाने वाली है. इस बीच धोनी के संन्यास लेने की अटकलों को लेकर एक पत्रकार ने सवाल पूछा कि क्या धोनी ने अगले दौरे को लेकर अपने बारे में कहा है कि वह क्या करने वाले हैं.
इसके जवाब में भारतीय कप्तान ने कहा, "नहीं, उन्होंने हमें कुछ नहीं बोला है."
जडेजा की तारीफ़
टॉप ऑर्डर के ढह जाने के बाद रविंद्र जडेजा ने मोर्चा संभाला और भारतीय टीम को जीत के क़रीब लाने की कोशिश करते हुए 59 गेंदों में 77 रनों की पारी खेली.
भारत बेशक मैच हार गया लेकिन जडेजा की इस इनिंग की तारीफ़ हो रही है. कप्तान कोहली भी जडेजा से प्रदर्शन से संतुष्ट दिखे.
उन्होंने कहा, "आपने देखा कि उन्होंने कितने जुनून के साथ बल्लेबाज़ी की. वह टेस्ट में भी काफ़ी सधा हुआ प्रदर्शन कर चुके हैं, घरेलू क्रिकेट में भी बड़ी पारियां खेल चुके हैं. मैं 10 साल से उन्हें देख रहा हूं, उनके साथ खेल रहा हूं. दबाव के हालात में खेली गई यह उनकी शानदार पारी है."
जडेजा भी बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में कैच आउट हुए. कोहली ने उनका बचाव करते हुए कहा कि वनडे में रिस्क तो लेना ही पड़ता है.
आख़िर में कोहली ने कहा कि जिस तरह से खिलाड़ियों से हम उम्मीद करते हैं कि उन्हें जीत और हार पर संतुलित प्रतिक्रिया देनी चाहिए, उसी तरह से प्रशंसकों से भी ऐसे की ही उम्मीद करनी चाहए.
उन्होंने कहा, "जीतने पर नियंत्रित प्रतिक्रिया होनी चाहिए और हारने पर ज़्यादा परेशान नहीं होना चाहिए. बैलंस होना चाहिए. फैन्स के नज़रिये से भी ऐसा संतुलन ज़रूरी है, मेरे विचार से."
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