वर्ल्ड कप 2019: भारत की ऑस्ट्रेलिया पर जीत के पांच कारण

आरोन फिंच और विराट कोहली

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

दो बार का चैंपियन भारत आईसीसीसी विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट में अपना ख़िताब बचाने की कोशिश में जुटी पांच बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ ओवल के मैदान में उतरा तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि टीम इंडिया उसका शिकार इतनी आसानी से कर लेगी.

मैच शुरू होने से पहले क्रिकेट पंडित और क्रिकेट प्रेमी कह रहे थे कि दिल कह रहा है भारत जीते लेकिन दिमाग़ कह रहा है कि कहीं ऑस्ट्रेलिया न जीत जाए.

इसकी सीधी सी वजह यह थी कि विश्व कप में भारत से भिड़ने से पहले ऑस्ट्रेलिया ने लगातार 10 मैच जीते थे.

यहां तक कि ऑस्ट्रेलिया ने आईपीएल से पहले भारत को उसी के घर में पांच मैच की एकदिवसीय सिरीज़ में 3-2 से मात दी.

इतना ही नहीं विश्व कप के समीकरण भी ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में थे.

दोनों टीमें विश्व कप में इससे पहले 11 बार आमने-सामने हुई जिसमें आठ बार ऑस्ट्रेलिया और तीन बार भारत जीता.

लेकिन इन सब आंकड़ो से निकलकर भारत में रविवार को ऑस्ट्रेलिया को 36 रन से मात दी.

इस जीत के पांच कारण रहे.

पहला कारण-

किसी भी टीम की सलामी जोड़ी पूरी टीम की दिशा और दशा तय करती है.

भारत की सलामी जोड़ी रोहित शर्मा और शिखर धवन ने पहले विकेट के लिए 127 रन बनाकर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ी का दबदबा समाप्त कर दिया.

रोहित शर्मा ने सूझबूझ से खेलते हुए 57 और शिखर धवन ने 117 रन की शतकीय पारी खेली.

दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया की सलामी जोड़ी डेविड वार्नर और कप्तान एरोन फिंच ने पहले विकेट के लिए केवल 61 रन जोड़े.

वार्नर ने 56 और फिंच ने 36 रन बनाए.

शिखर धवन

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दूसरा कारण-

भारत की जीत का दूसरा कारण शीर्ष और मध्यम क्रम के बल्लेबाज़ों का चलना और तेज़ी से रन बनाना रहा.

भारत के कप्तान विराट कोहली ने अपनी खोई फॉर्म हासिल करते हुए केवल 77 गेंदो पर 82 और हार्दिक पांड्या ने केवल 27 गेंदो पर 48 रन बनाकर भारत को निर्धारित 50 ओवर में पांच विकेट पर 352 रन तक पहुंचाने में मदद की.

इनकी तेज़ तर्रार बल्लेबाज़ी से ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए दरकार रनों का प्रति ओवर औसत बढ़ गया और यही उनकी हार का कारण भी बना.

वरना ऑस्ट्रेलिया ने भी निर्धारित 50 ओवर में 316 रन बनाए. यह प्रदर्शन किसी भी लिहाज़ से बुरा नही कहा जा सकता.

दरअसल भारत के बल्लेबाज़ों ने अपने गेंदबाज़ों को इतने रन दे दिए कि वह पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने तरकश का हर तीर इस्तेमाल कर सके.

विराट कोहली

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तीसरा कारण-

भारत की जीत का तीसरा कारण भारतीय बल्लेबाज़ो का विकेट पर टिके रहना रहा.

एक बार शानदार शुरुआत मिलने के बाद शिखर धवन ने अपनी पारी को शतक में बदला.

दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया के डेविड वार्नर को भी अच्छी शुरूआत मिली लेकिन वह शतक में नही बदल सके.

इसके अलावा भारतीय फिल्डिंग भी ज़बरदस्त रही. उन्होंने कैच करने का कोई मौक़ा नही छोड़ा. वहीं रोहित शर्मा का कैच छोडना ऑस्ट्रेलिया को भारी पडा.

रोहित शर्मा को तब जीवनदान मिला जब ऑस्ट्रेलियाई पारी की दूसरा ओवर ही चल रहा था.

उनका कैच मिचेल स्टार्क की गेंद पर छूटा. उसके बाद रोहित शर्मा का बल्ला ऐसा बोला कि ऑस्ट्रेयाई गेंदबाज़ो की शामत ही आ गई.

इसके अलावा मैदानी फिल्डिंग में भी भारत ऑस्ट्रेलिया से बेहतर रहा.

भारत ने ऑस्ट्रेलिया के कप्तान एरोन फिंच और मिचेल स्टार्क को रन आउट कर पैवेलियन की राह दिखाई.

टीम इंडिया

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चौथा कारण-

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला करना.

इन दिनों एकदिवसीय क्रिकेट में टॉस जीतकर पहले फील्डिंग करने का चलन सा है.

ऐसे में भारत के कप्तान विराट कोहली का टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला सही साबित हुआ. पहले बल्लेबाज़ी करते हुए स्कोरबोर्ड पर 300 या उससे अधिक का स्कोर हमेशा विरोधी टीम पर दबाव पैदा करता है चाहे उसकी बल्लेबाज़ी कितनी ही दमदार क्यों ना हो.

पिछले विश्व कप साल 2015 के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के सामने जीत के लिए 328 रनों का लक्ष्य रखा था, जिसके जवाब में पूरी भारतीय टीम 46.5 ओवर में 233 रन पर सिमट गई थी.

टीम ऑस्ट्रेलिया

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पांचवां कारण-

भारत की जीत का पांचवां कारण गेंदबाज़ों का शानदार प्रदर्शन रहा.

पूरे मैच में वह कभी दबाव में दिखाई नही दिए.

भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह लगातार विकेट लेते रहे.

यही कारण था कि ऑस्ट्रेलिया की कोई भी साझेदारी ऐसी नही पनप सकी जो निर्णायक साबित हो.

भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह ने तीन-तीन विकेट झटके तो स्पिनर युज़्वेंद्र चहल ने भी दो विकेट लिए.

युज़्वेंद्र चहल रोहित शर्मा के साथ

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अगर किसी टीम के बल्लेबाज़ फॉर्म में हो और गेंदबाज़ 10 विकेट लेने की क्षमता रखते हो तो फिर टीम को लेकर चिंता कैसी.

अब भारत का अगला मुक़ाबला गुरूवार 13 तारिख को न्यूज़ीलैंड से है.

न्यूज़ीलैंड ने अभी तक तीनो मैच जीते है इसलिए कहा जा सकता है कि भारत को एक और कड़े मुक़ाबले के लिए कमर कस कर तैय्यार रहना होगा.

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