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वर्ल्ड कप 2019: महेंद्र सिंह धोनी के दस्तानों पर ये क्या बना है?
- Author, टीम बीबीसी हिन्दी
- पदनाम, नई दिल्ली
भारतीय क्रिकेट टीम ने अपने वर्ल्ड कप अभियान की शुरुआत जीत के साथ की और दक्षिण अफ़्रीका को शिकस्त का सामना करना पड़ा.
जीत के नायकों की बात करें तो बल्लेबाज़ों में रोहित शर्मा और गेंदबाज़ों में जसप्रीत बुमराह, यजुवेंद्र चहल ने ख़ासा प्रभावित किया.
लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है कि भारतीय टीम वनडे मैच खेले और महेंद्र सिंह धोनी का ज़िक्र ना हो.
ये सही है कि वो अब टीम के कप्तान नहीं है, लेकिन उन्हें टीम की रीढ़ माना जाता है.
धोनी की अहमियत और प्रशंसकों के बीच उनकी दीवानगी ज़रा कम नहीं हुई है.
दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ मैच में धोनी की बैटिंग ने इतना ध्यान नहीं खींचा, जितना फ़ोकस उनके दस्तानों की तरफ़ गया. और इसकी वजह है एक निशान, जो धोनी के विकेटकीपिंग ग्लव्स पर बना है.
जैसे ही मैच के क्षण क़ैद हुए और वीडियो ग्रैब वायरल हुए, सबसे ज़्यादा चर्चा धोनी के ग्लव्स की हुई. क्योंकि प्रशंसकों ने गौर किया कि धोनी के दस्तानों पर एक विशेष प्रतीक चिन्ह या सिम्बल बना है.
ज़ूम करने पर पता चला कि धोनी के हरे दस्तानों पर इंडियन पैरा स्पेशल फ़ोर्सेज़ का 'रेजिमेंटल डैगर' बना है. इसे 'बलिदान' के तौर पर देखा जाता है.
प्रशंसकों ने जब इसे पहचाना तो देश और सुरक्षाबलों के प्रति धोनी के प्रेम और प्रतिबद्धता की तारीफ़ होने लगी.
महेंद्र सिंह धोनी को साल 2011 में पैराशूट रेजिमेंट में लेफ़्टिनेंट कर्नल का मानद रैंक दिया गया है. साल 2015 में उन्होंने पैरा ब्रिगेड के तहत ट्रेनिंग भी की थी.
इस निशान की चर्चा हुई तो सोशल मीडिया पर भारतीय टीम के पूर्व कप्तान के बारे में लिखना शुरू कर दिया.
जगदीश डांगी ने लिखा, ''महेंद्र सिंह धोनी को सलाम और उनका सम्मान, जिन्होंने अपने विकेटकीपिंग ग्लव्स पर बलिदान का इनसिग्निया प्रिंट कराया है. ये रेजिमेंटल डैगर इनसिग्निया पैरा एसएफ़, पैराशूट रेजिमेंट से जुड़ी हुई भारतीय सेना की स्पेशल ऑपरेशंस यूनिट की नुमाइंदगी करता है.''
विवेक सिंह ने लिखा है, ''अगर आपने धोनी के विकेटकीपिंग ग्लव्स को गौर से देखा है तो इन पर पैरा लोगो बना है. ये स्वैग का लीजेंडरी लेवल है.''
राम ने ट्वीट किया है, ''इस वजह से दुनिया महेंद्र सिंह धोनी से मोहब्बत करती है. मिलिट्री पैरा एसएफ़ के प्रति प्यार और समर्थन जताने के लिए आपका धन्यवाद. गोले में आपको रेजिमेंटल डैगर इनसिग्निया दिख रहा है, जो भारतीय पैरा स्पेशल फ़ोर्सेज़ का है.''
भारतीय सेना की पैराशूट यूनिट, दुनिया की सबसे पुरानी एयरबोर्न यूनिट में से एक हैं. 50वीं भारतीय पैराशूट ब्रिगेड का गठन 27 अक्टूबर, 1941 में हुआ था. ये ब्रिटिश 151वीं पैराशूट बटालियन, ब्रिटिश इंडियन आर्मी 152वीं भारतीय पैराशूट बटालियन और 153वीं गोरखा पैराशूट बटालियन से मिलकर बनी थी.
साल 1952 में पैराशूट रेजिमेंट का गठन इनसे और दूसरी कई इकाइयों से मिलकर किया गया था.
पैराशूट रेजिमेंट में फिलहाल नौ स्पेशल फ़ोर्सेज़, पांच एयरबोर्न, दो टेरीटोरियल आर्मी और एक काउंटर इंसरजेंसी (राष्ट्रीय राइफ़ल्स) बटालियन है.
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