क्या पुलवामा की भेंट चढ़ेगा भारत-पाक विश्व कप मैच?

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- Author, आदेश कुमार गु्प्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर के पुलवामा ज़िले में श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर लेथपोरा के पास चरमपंथियों ने धमाका कर सीआरपीएफ के काफिले को निशाना बनाया.
इस हमले में 40 जवान मारे गए और कई घायल हैं.
इसके बाद भारत में आक्रोश की लहर चल पड़ी.
खेल जगत भी पीछे नही रहा.
भारत रत्न मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने ट्विटर पर लिखा....
कायर, नृशंस, अर्थहीन....मेरा दिल उन परिवारों के लिए निकल जाता है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया.
वीरेंद्र सहवाग ने भी ट्विटर पर लिखा....यह बहुत तक़लीफ दे रहा है.
इस दर्द को बयां करने के लिए शब्द नही है.
भारत के कप्तान विराट कोहली ने लिखा....स्तब्ध हूं.

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आखिरकार यह सब किस तरफ इशारा है, खासकर भारत-पाक खेल संबंधों को लेकर.
इसे लेकर क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन कहते हैं, "यह बहुत बड़ी समस्या बन गई है, ख़ासकर क्रिकेट में. और अब तो यह लगने लगा है कि इंग्लैंड में होने वाले आगामी विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट में यह दोनो टीमें आपस में खेलेंगी या नहीं."
इन दोनों टीमों के बीच 16 जून को मैनचेस्टर में मुक़ाबला होना है.
हालांकि भारतीय टीम विश्व कप का बहिष्कार नहीं करेगी, लेकिन यह हो सकता है कि वह पाकिस्तान के ख़िलाफ ना खेलकर दो अंक गंवा दे.
अयाज़ मेमन कहते हैं कि हो सकता है कि पाकिस्तान की तरफ से कोई अच्छा इशारा आए और रिश्ते थोड़ा सुधर जाएं तो मैच हो सकता है, लेकिन फिलहाल जिस तरह का माहौल और मूड भारत में है उससे विश्व कप का यह मैच बेहद दबाव में है.
हालांकि इससे पहले साल 1999 में इंग्लैंड में ही हुए विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट में भी भारत और पाकिस्तान मैदान में आमने-सामने थे.
दोनों देशों की सेना करगिल युद्ध में सीमा पर एक-दूसरे पर गोले बरसा रही थी.
इसे लेकर क्रिकेट समीक्षक प्रदीप मैगज़ीन ने बताया था कि उस समय भी ऐसा माहौल बना हुआ था कि शायद यह मैच कहीं रद्द ना हो जाए.
आयोजकों को भी लग रहा था कि कहीं उस लडाई का असर मैनचेस्टर में होने वाले मैच पर ना पडे, लेकिन मैच हुआ.
ख़ैर वह दौर भी चला गया और उसके बाद कई बार पाकिस्तान की क्रिकेट टीम भारत में खेलने भी आई.

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लेकिन अब तो हालात यहां तक पहुंच गए है कि बीते शनिवार को भारत के कप्तान विराट कोहली ने मारे गए सीआरपीएफ के जवानों के सम्मान में होने वाले भारतीय खेल सम्मान समारोह को स्थगित कर दिया.
यह पुरस्कार विराट कोहली फाउंडेशन द्वारा खेलों में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों और उभरते प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को दिए जाते हैं.
इसके अलावा, बीसीसीआई की मान्यता प्राप्त इकाई क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया ने पुलवामा हमले का विरोध करते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का पोस्टर ढक दिया.
ब्रेबोर्न स्टेडियम के परिसर में महान क्रिकेट खिलाड़ियों की तस्वीरें लगी हैं.
इनमें साल 1992 में हुए विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट विजेता पाकिस्तान के कप्तान इमरान ख़ान की तस्वीर भी है.

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इस घटना को लेकर अयाज़ मेमन कहते हैं कि हर चीज़ से सहमत नहीं हुआ जा सकता. इमरान ख़ान की तस्वीर एक आलराउंडर के तौर पर लगी है और अब वह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री है.
अयाज़ मेमन इसे अपना व्यक्तिगत मत मानते हुए कहते हैं कि जितना हो सके राजनीति को खेल से दूर रखना चाहिए.
इसके बावजूद कई बार ऐसे वाक्यात हो जाते हैं जिसे राजनीति से दूर नहीं रखा जा सकता.
अब क्रिकेट तो क्रिकेट, टेनिस भी इसकी मार से नही बच सकती. दरअसल, भारतीय डेविस कप टीम को अपना अगला मुक़ाबला पाकिस्तान से उसी की ज़मीन पर सितंबर में खेलना है.
भारतीय टेनिस टीम ने साल 1964 के बाद कभी भी पाकिस्तान का दौरा नही किया है.
लाहौर में हुए उस मुक़ाबले में भारत 4-0 से जीता था.
साल 1971 में भी भारतीय टेनिस टीम को पाकिस्तान का दौरा करना था, लेकिन भारत दौरा नहीं कर सका. भारत को बिना खेले अंक गंवाने पड़े.
अब अगर भारत पाकिस्तान से नहीं खेला तो भारत विश्व ग्रुप क्वालिफायर से बाहर हो जाएगा.
ऐसे में क्या भारत तीसरे स्थान पर खेलने का दबाव पाकिस्तान पर डाल सकता है.
इसे लेकर भारतीय डेविस कप टीम के कोच और पूर्व खिलाड़ी ज़ीशान अली ने कहा कि यह तब देखा जाएगा जब भारतीय टेनिस संघ अंतराष्ट्रीय टेनिस संघ से बात करेगा.
इसके अलावा भारत सरकार उस समय क्या निर्णय लेगी यह सब उस पर भी निर्भर करेगा.
वैसे भारत की स्टार महिला टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा भी पुलवामा हमले की निंदा करते हुए इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में लिख चुकी है कि 14 फरवरी का दिन भारत के लिए काला दिन था.

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अब ऐसे हालात का हल क्या हो.
इसे लेकर अयाज़ मेमन कहते हैं कि ऐसा भी नहीं है कि भारत की सरकार ने कोई ऐसी बात कही है जिससे लगे कि विश्व कप में भारत और पाकिस्तान नही खेलेंगे.
इसके बावजूद जिस ग़ुस्से का माहौल इस समय भारत में है उसे राजनीतिक तौर पर बातचीत कर दूर किया जाना चाहिए, देखना है भविष्य क्या करवट लेता है.
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