INDvsNZ: रोहित शर्मा की कप्तानी से कैसे निपटेगा बेदम न्यूज़ीलैंड

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए
10 साल बाद न्यूज़ीलैंड से उसी की ज़मीन पर एकदिवसीय सिरीज़ अपने नाम करने वाली भारतीय क्रिकेट टीम गुरुवार को न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ मौजूदा पांच मैचों की सिरीज़ का चौथा मुक़ाबला खेलेगी.
यह मुक़ाबला हैमिल्टन में खेला जाएगा और भारतीय टीम एक बड़े बदलाव के साथ मैदान में उतरेगी.
टीम की कमान हिटमैन के नाम से मशहूर सलामी बल्लेबाज़ रोहित शर्मा संभालेंगे.
हिटमैन की कप्तानी
नियमित कप्तान विराट कोहली को सिरीज़ के बाक़ी बचे दो एकदिवीय और उसके बाद शुरू होने वाली तीन टी-20 मैचों की सिरीज़ के लिए आराम दिया गया है.
इससे पहले विराट कोहली की कप्तानी में खेलते हुए भारत ने न्यूज़ीलैंड को शुरुआती तीन एकदिवसीय मुक़ाबलों में लगभग एकतरफा मात दी.
वैसे रोहित शर्मा गुरुवार को जब मैदान में उतरेंगे तो कई रिकार्ड उनके नाम हो जाएंगे.
हैमिल्टन में रोहित शर्मा अपना 200वां एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेलेंगे. अभी तक रोहित शर्मा 199 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों में 7799 रन बना चुके हैं.
इसमें उनके 22 शतक और 39 अर्धशतक शामिल है. 200 या इससे अधिक एकदिवसीय मैच खेलने वाले रोहित शर्मा भारत के 14वें खिलाड़ी बनेंगे.
सचिन तेंदुलकर ने सर्वाधिक 463 एकदिवसीय खेले हैं.
रोहित शर्मा एकदिवसीय क्रिकट में तीन दोहरे शतक बनाने वाले दुनिया के अकेले बल्लेबाज़ है. रही बात उनकी कप्तानी की तो रोहित शर्मा आईपीएल के अलावा कई मौक़ों पर भारत की कप्तानी कर चुके हैं.
पिछले साल उनकी कप्तानी में ही भारत ने दुबई में एशिया कप अपने नाम किया था. इसके अलावा उनकी कप्तानी में ही साल 2017 में भारत ने तीन एकदिवसीय मैचों की सिरीज़ 2-1 से जीती.
दरअसल रोहित शर्मा को विराट कोहली के विपरीत ठंडे दिमाग़ का कप्तान माना जाता है. अब तो ख़ैर विराट कोहली भी पहले जैसे गुस्सैल कप्तान नही रहे, शायद लगातार जीत ने उनके मिज़ाज को बदला है.
सबसे बड़ी बात कि रोहित शर्मा के पास यह साबित करने का अवसर है कि दुनिया के सबसे शानदार बल्लेबाज़ विराट कोहली के बिना भी टीम जीत सकती है.

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विश्व कप का टिकट
विराट कोहली की ग़ैर मौजूदगी में दिनेश कार्तिक, अबांती रायडू और केदार जाधव के पास भी अपने आपको मैच जिताऊ खिलाड़ी साबित करने का सुनहरा मौक़ा होगा. अभी भी विश्व कप के लिए टीम में उनकी जगह पक्की नहीं है.
विश्व कप में केवल 15 खिलाड़ी ही जा सकते हैं. सबसे बड़ी बात कि अब बाक़ी बचे दो मैचों में कप्तान रोहित शर्मा किस रणनिति के साथ मैदान में उतरेंगे यह देखने वाली बात होगी.
इसे लेकर क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन मानते हैं कि अब जब भारत सिरीज़ जीत ही चुका है तो अब उन खिलाड़ियों को मौक़ा मिलना चाहिए जो अभी तक नहीं खेले हैं.
अयाज़ मेमन मानते हैं कि शुभमन गिल को भारत मौक़ा दे सकता है क्योंकि अब विश्व कप से पहले खिलाड़ियों को परखने के बहुत ज़्यादा अवसर भारत के पास नही हैं.
मोहम्मद शमी जो लगातार क्रिकेट खेल रहे है उनकी जगह मोहम्मद सिराज या खलील अहमद को टीम में जगह दी जा सकती है. या फिर रवींद्र जडेजा को भी जगह मिल सकती है.
अयाज़ कहते हैं कि वैसे तो सबसे अच्छा होता कि विराट कोहली के साथ-साथ जडेजा को भी भारत भेज दिया जाता जिससे वह सौराष्ट्र के लिए रणजी ट्रॉफी फ़ाइनल मुक़ाबला खेल सकते जिससे उसके जीतने के अवसर बढ़ जाते.
और अगर किसी खिलाड़ी को टीम में खेलने का अवसर नही मिलता तो फिर उसे दौरे पर ले जाने का कोई मतलब भी नही है.

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बेदम किवी
न्यूज़ीलैंड की बात करें तो पहले मैच में आधार पर आठ विकेट से, दूसरे मैच में 90 रन से और तीसरे मैच में सात विकेट से भारत की जीत बताती है कि न्यूज़ीलैंड इस सिरीज़ में कहीं नही है.
कहां तो मार्टिन गप्टिल, कोलिन मुनरो, कप्तान केन विलियम्सन, रॉस टेलर, टॉम लैथम, हेनरी निकोलस और मिचेल सैंटनर जैसे धुरंधर बल्लेबाज़ों के दम पर न्यूज़ीलैंड की टीम बेहद मज़बूत लग रही थी, और कहां वह पहले मैच में 38 ओवर, दूसरे मैच में 40.2 ओवर और तीसरे मैच में 49 ओवर में सिमट गई.
वहीं ट्रेंट बोल्ट, टिम साउदी, डग ब्रैसवैल, लोकी फर्गग्यूसन, मिचेल सैंटनर और ईश सोढ़ी जैसे तेज़ और स्पिन गेंदबाज़ो की बदौलत गेंदबाज़ी में भी संतुलित लगती थी लेकिन भारतीय बल्लेबाज़ो ने उन्हें नौसिखिया साबित कर दिया.
अभी तक एक भी पारी में न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़ भारतीय टीम को पूरी तरह पवैलियन नही भेज सके है.
यहां तक कि तेज़-तर्रार फील्डिंग के लिए मशहूर न्यूज़ीलैंड की टीम मैदान में काफी सुस्त नज़र आ रही है.
ऐसा लगता है कि डाइव लगाकर आगे गिरते हुए कोई भी खिलाड़ी कैच पकड़ना ही नहीं चाहता.

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वहीं भारत की फ़ील्डिंग को देखते हुए भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावसकर भी कई बार अपनी कमेंटरी के दौरान कह चुके हैं कि अब किसी भारतीय खिलाड़ी को मैदान में छुपाना नही पड़ता.
न्यूज़ीलैंड की इतनी खराब हालत को लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि लगातार हार से शायद उनका मनोबल भी टूट गया है.
अब अगर कोई टीम ड्रेसिंग रूम में ही मैच हार जाए तो वह मैदान के भीतर कैसे उलटफेर कर सकती है.

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अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर नहीं बदल पाए
अब विराट कोहली की ग़ैर मौजूदगी में सलामी जोड़ी शिखर धवन और रोहित शर्मा की ज़िम्मेदारी और बढ़ गई है. वैसे आलराउंडर हार्दिक पंड्या के टीम में लौटने से पुछल्ले बल्लेबाज़ों की समस्या भी समाप्त हुई है.
न्यूज़ीलैंड के कप्तान केन विलियम्सन को समझ ही नही आ रहा कि वह टीम को जीत की राह कैसे दिखाए.
रॉस टेलर ने पिछले मैच में 93 रन बनाए. अगर वह विकेट पर कुछ देर और ठहरते तो न्यूज़ीलैंड ना सिर्फ निर्धारित 50 ओवर खेलने में कामयाब होता बल्की उसका स्कोर भी कुछ और होता.
ऐसा भी नहीं है कि न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ो को अच्छी शुरुआत नहीं मिली, लेकिन वह उसे बड़े स्कोर में नही बदल पाए.
भारत के मोहम्मद शमी शुरुआती ओवर में न्यूज़ीलैंड को ऐसा झटका देते हैं कि वह उससे उबर ही नहीं पाता. शमी अभी तक तीन मैचों में सात विकेट ले चुके हैं.
रही-सही कसर कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल की जोड़ी पूरी कर देती है. कुलदीप यादव अभी तक आठ और चहल छह विकेट लेने में कामयाब रहे हैं.
ऐसे में हैमिल्टन में अगर न्यूज़ीलैंड पिछली ग़लतियों से सबक़ लेकर कुछ कारनामा करे तो ठीक, वरना भारत अपने दमदार खेल के दम पर उसे चित करता ही रहेगा.
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