नाओमी ओसाका ऑस्ट्रेलियन ओपन जीतने वाली पहली जापानी महिला

जापान की 21 वर्षीय नाओमी ओसाका ने ऑस्ट्रेलियन ओपन 2019 का ख़िताब अपने नाम कर लिया है.

ऑस्ट्रेलियन ओपन जीतने वाली नाओमी ओसाका जापान की पहली टेनिस खिलाड़ी बन गई हैं.

फ़ाइनल में उन्होंने दो बार की विम्बल्डन विजेता पेत्रा क्वितोवा को 7-6, 5-7, 6-4 से हराया.

ओसाका और क्वितोवा के बीच फ़ाइनल में जीत के साथ नंबर-1 की रैंकिंग पर पहुंचने का मुक़ाबला भी था.

अब इस जीत के साथ ही ओसाका सोमवार को जारी होने वाली डब्ल्यूटीए रैंकिंग में टॉप पर पहुंच जाएंगी.

ओसाका पिछले चार साल के दौरान अमरीकी ओपन और ऑस्ट्रेलियन ओपन लगातार जीतने वाली सेरेना विलियम्स के बाद पहली महिला खिलाड़ी बनी हैं.

कैसे बनीं चैंपियन?

ओसाका ने फ़ाइनल मैच के पहले सेट से ही मैच पर अपना दबदबा बनाना शुरू कर दिया था.

शुरू शुरू में मैच एक तकतरफ़ा दिख रहा था और नाओमी ओसाका ने 5-2 की बढ़त ले ली थी.

लेकिन यहां पेत्रा क्वितोवा ने जोरदार दमखम दिखाया और ओसाका को चार सेट प्वाइंट गंवाने पड़े जिससे आख़िरी गेम टाइब्रेकर में चला गया.

टाइब्रेकर को ओसाका ने 7-2 से जीतते हुए पहला सेट 7-6 से अपने नाम किया.

इसके बाद दूसरे सेट में भी क्वितोवा लगभग हार की कगार पर ही थीं लेकिन उन्होंने वापसी की और 7-5 से जीत दर्ज की.

हालांकि तीसरे सेट में ओसाका को बहुत संघर्ष नहीं करना पड़ा और सेट 6-4 से जीतकर वो पहली बार ऑस्ट्रेलियन ओपन चैंपियन बनीं.

वर्ल्ड नंबर-1

महिला रैंकिंग में वर्ल्ड नंबर-1 बनने वाली ओसाका एशिया की पहली खिलाड़ी बनेंगी. फिलहाल महिला वर्ग में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी रोमानिया की सिमोना हालेप है.

हालेप ऑस्ट्रेलियाई ओपन के चौथे दौर में ही बाहर हो गई हैं. इस मैच से पहले ही यह तय था कि अगर ओसाका टूर्नामेंट जीत जाती हैं तो वो दुनिया की नंबर एक महिला टेनिस खिलाड़ी बन जाएंगी. ओसाका फिलहाल चौथे नंबर पर है.

डब्ल्यूटीए रेटिंग में ओसाका से पहले चीन की ली ना नंबर-2 रैंकिंग तक पहुंच सकी हैं.

वैसे यदि डबल्स रैंकिंग की बात करें तो भारतीय खिलाड़ी लिएंडर पेस, महेश भूपति और सानिया मिर्जा वर्ल्ड नंबर-1 रहे चुके हैं.

क्वितोवा पर हुआ था चाकू से हमला

चेक रिपब्लिक की पेत्रा क्वितोवा 2011 और 2014 की विम्बल्डन टूर्नामेंट जीतने के बाद अपना तीसरा ग्रैंड स्लैम फ़ाइनल खेल रही थीं.

28 वर्षीय पेत्रा क्वितोवा ऑस्ट्रेलियन ओपन के फ़ाइनल में पहुंचने वाली जाना नोवोत्ना के बाद चेक रिपब्लिक की दूसरी खिलाड़ी हैं.

1991 के फ़ाइनल मुक़ाबले में नोवोत्ना को मोनिका सेलेस ने हराया था. पेत्रा क्वितोवा के बारे में एक खासियत यह भी है कि वो पांच साल के बाद किसी ग्रैंड स्लैम के फ़ाइनल में पहुंची.

क्वितोवा पर 2016 में चाकू से हमला हुआ था. इस हमले में वो बुरी तरह घायल हो गई थीं. उस हमले से उबरते हुए क्वितोवा पहली बार ग्रैंड स्लैम के फ़ाइनल में पहुंची हैं.

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