टीम इंडिया की असली परीक्षा न्यूज़ीलैंड में होगी

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
पिछले दिनों विराट कोहली की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया से उसी की ज़मीन पर पहले तो टेस्ट और उसके बाद एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की सिरीज़ जीतने से टीम इंडिया के हौंसले बुलंद है.
इसके बावजूद विदेशी ज़मीन पर विश्व कप से पहले उसकी असली परीक्षा अब न्यूज़ीलैंड में होगी.
दोनो देशो के बीच पांच एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की सिरीज़ बुधवार से शुरू होने जा रही है.
इस सिरीज़ का पहला मैच नेपियर में खेला जाएगा.
न्यूज़ीलैंड का दौरा भारतीय क्रिकेट टीम के लिए हमेशा बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है.
इससे पहले भारत ने साल 2013-14 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में न्यूज़ीलैंड का दौरा किया था.
तब ब्रैंडन मैकुलम की कप्तानी में न्यूज़ीलैंड ने पांच एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की सिरीज़ में भारत को 4-0 से हराया था.
उस दौरे में कप्तान धोनी के अलावा शिखर धवन, रोहित शर्मा, विराट कोहली, अंबाती रायडू, रवींद्र जडेजा, भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद शमी जैसे खिलाडी भी थे जो अब भी टीम के सदस्य है. यानी बहुत अधिक बदलाव नही हुए है.

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दबाव
तब भी रोहित शर्माा, शिखर धवन, विराट कोहली और महेंद्र सिंह धोनी ने दमदार बल्लेबाज़ी की लेकिन भारतीय गेंदबाज़ न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ो को रोक नही सके.
नेपियर में खेले गए पहले एकदिवसीय मैच में तो विराट कोहली ने 123 रनों की शतकीय पारी भी खेली थी. लेकिन भारत जीत के लिए 293 रनों की तलाश में 48.4 ओवर में 268 रन पर सिमट गया.
भारत ने न्यूज़ीलैंड मे अब तक विभिन्न सिरीज़ और टूर्नामेंट में मेजबान टीम के ख़िलाफ़ 34 मैच खेले है जिसमें से उसे सिर्फ़ 10 में ही जीत नसीब हुई है,
न्यूज़ीलैंड की टीम 21 मैच जीतने में कामयाब रही. एक मैच टाई रहा और दो मैच रद्द हो गए.
हालांकि अब विराट कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम के तेवर बदले हुए नज़र आते है.
सलामी बल्लेबाज़ रोहित शर्मा और विराट कोहली ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ एकदिवसीय सिरीज़ में शतक जमाए.

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परीक्षा
पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने तो लगातार तीन अर्धशतक लगाकर भारत की जीत में अपना अहम योगदान दिया.
तीसरे एक दिवसीय मैच में तो केदार जाधव ने भी अपना दमख़म दिखाया.
गेंदबाज़ी में भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद शमी, युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव का जादू ख़ूब चला.
इसके बावजूद क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली का मानना है कि न्यूज़ीलैंड का दौरा विश्व कप से पहले भारत के लिए सबसे बड़ा इम्तिहान होगा. न्यूज़ीलैंड में खेलने के लिए जैसे हालात होगें उससे मिलते-जुलते इंग्लैंड में भी होंगे.
न्यूज़ीलैंड में विकेट तेज़ होंगे, गेंद स्विंग भी करेगी. न्यूज़ीलैंड भी चाहेगी कि विकेट गेंदबाज़ और बल्लेबाज़ दोनों के लिए फायदेमंद हो.
विजय लोकपल्ली आगे कहते है कि न्यूज़ीलैंड अपने घर में बेहद मंझी हुई टीम है.
ऑस्ट्रेलिया भले ही हार गई क्योंकि उसे एक दो खिलाड़ियो की ग़ैर मौजूदगी काफी खली लेकिन न्यूज़ीलैंड के साथ ऐसा नही है.
न्यूज़ीलैंड एक बेहद मज़बूत टीम के साथ मैदान में उतरेगा.

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परख
दरअसल न्यूज़ीलैंड भी तो विश्व कप की तैयारी के लिए अपनी टीम को परखना चाहेगा.
न्यूज़ीलैंड की टीम में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ो में से एक ख़ुद कप्तान केन विलियम्सन हैं.
श्रीलंका के ख़िलाफ तीन एकदिवसीय मैचों की सिरीज़ में उन्होंने दो अर्धशतक जमाए.
सलामी बल्लेबाज़ मार्टिन गप्टिल ने भी पहले मैच में शानदार शतक जमाया.
बेहद अनुभवी रॉस टेलर तो जैसे एकदिवसीय सिरीज़ में श्रीलंकाई गेंदबाज़ों पर टूट पड़े.
उन्होंने लगातर तीन मैचों में 54, 90 और 137 रनों की ज़ोरदार पारियां खेली.

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यहां तक कि तीसरे और आख़िरी एकदिवसीय मैच में तो हेनरी निकोलस ने भी नाबाद 124 रनों की पारी खेलकर न्यूज़ीलैंड के मध्यमक्रम को बेहद मज़बूती दी.
इसकी सबसे बड़ी वजह यह भी है कि न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ो को अपनी परिस्थितियों के अनुरूप बल्लेबाज़ी करना आता है.
न्यूज़ीलैंड के पास वाकई एक बेहद शक्तिशाली बल्लेबाज़ी क्रम है.
विजय लोकपल्ली मानते है कि न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ भले ही अपनी पूरी फॉर्म में हो लेकिन उन्ही के मैदान पर भारतीय गेंदबाज़ भी उन्हे बेहद परेशान करेंगे. ख़ासकर भुवनेश्वर कुमार.
वहां के हालात उनकी मदद करेंगे. भारत ने इन दिनों जसप्रीत बुमराह को आराम दिया है. उनकी ग़ैर मौजूदगी में भुवनेश्वर कुमार के पास अपने आप को पूरी सिरीज़ में साबित करने का मौक़ा है.

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समस्या
वहीं भारत के कप्तान विराट कोहली अपनी टीम के बल्लेबाज़ी क्रम में नम्बर चार को लेकर अभी भी चिंतित है.
इसे लेकर विजय लोकपल्ली का मानना है कि यह समस्या तो बनी रहेगी.
पहले केएल राहुल विकल्प थे, अब क्या अंबाती रायडू इसे भर सकेंगे.
दूसरी तरफ सलामी बल्लेबाज़ शिखर धवन और रोहित शर्मा के लिए भी न्यूज़ीलैंड का दौरा बेहद चुनौतीपूर्ण होगा.
विजय लोकपल्ली मानते है कि नए विकेट, नए गेंदबाज़, वहां उन्हें अपनी बल्लेबाज़ी की तमाम क्षमता का प्रदर्शन करना होगा.
भारत के साथ वैसे अच्छी बात यह है कि टीम का बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी संतुलन ठीक है.
उम्मीद रख सकते है कि मैच कांटे के होंगे. ऐसा नही है कि न्यूज़ीलैंड सारे मैच आसानी से जीत जाएगी.
भारतीय टीम में भी इतना दमख़म है कि वह दावा कर सके कि हम भी जीतने की क्षमता रखते है.
अगर भारत न्यूज़ीलैंड को मात दे दे तो इसमें कोई आश्चर्य भी नही होना चाहिए.
अब इंतज़ार है पहले मैच का जिसके बाद तय होगा कि दोनो टीमों की दशा और दिशा कैसी है.
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