Ind Vs Aus: चेतेश्वर पुजारा न चलते तो भारत का ऑस्ट्रेलिया में क्या हाल होता

पुजारा

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    • Author, टीम बीबीसी हिंदी
    • पदनाम, नई दिल्ली

वह पिछले साल अगस्त का महीना था, जब भारतीय टीम विराट कोहली की कप्तानी में इंग्लैंड पर दौरे पर थी.

गर्म मौसम में इंग्लैंड का वह दौरा भारत के लिए मुश्किलों भरा था. पहले टेस्ट में टॉस के वक़्त जब विराट कोहली ने प्लेइंग 11 की घोषणा की तो उसमें चेतेश्वर पुजारा का नाम नदारद था.

बेशक, पुजारा उन दिनों ख़राब फॉर्म में चल रहे थे. वे काउंटी क्रिकेट में यॉर्कशायर की तरफ से ज़्यादा रन नहीं बना सके थे. इसके अलावा अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ एकमात्र मैच में भी पुजारा का बल्ला खामोश ही रहा था.

पुजारा की जगह कोहली ने केएल राहुल को टीम में चुना था. राहुल आईपीएल में धमाकेदार बल्लेबाज़ी कर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर टेस्ट टीम में पहुँचे थे.

दूसरी तरफ बेहद धीमी बल्लेबाज़ी करने वाले पुजारा टी20 युग के दर्शकों के लिए किसी 'बोरिंग रन मशीन' सरीखे हो रहे थे.

इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पहले मैच में भले ही पुजारा को टीम से बाहर रखा गया था, फिर भी वे मैच में अपनी मौजूदगी दर्ज करवा रहे थे.

दूसरे दिन के खेल से पहले वे सलामी बल्लेबाज़ मुरली विजय को काफी देर तक गेंद डालकर अभ्यास कराते रहे.

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यह पुजारा के चरित्र को बताने वाला महज़ एक उदाहरण है. बर्मिंघम में राहुल फ़ेल हुए तो क्रिकेट एक्सपर्ट से लेकर सोशल मीडिया पर क्रिकेट प्रशंसकों ने पुजारा को न खिलाने के भारतीय टीम प्रबंधन के फ़ैसले की जमकर आलोचना की. आख़िरकार, लॉर्ड्स में पुजारा की टीम में वापसी हुई और उन्होंने बेहद जुझारू प्रदर्शन करते हुए सिरीज़ में एक शतक और अर्धशतक जमाया.

हालांकि टेस्ट में नंबर वन टीम इंडिया को इंग्लैंड में क़रारी शिकस्त झेलनी पड़ी.

ऑस्ट्रेलिया दौरे का दबाव

गर्मियों की बुरी यादों को पीछे छोड़ जब भारतीय टीम सर्द मौसम की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया के मैदान पर टेस्ट सिरीज़ खेलने उतरी तो इंग्लैड सिरीज़ का डर यहां भी कोहली के दिमाग़ पर हावी था.

टीम इंडिया की राहुल और मुरली विजय की सलामी जोड़ी लगातार फ़ेल हो रही थी ऐसे में भारत को एक ऐसे शख्स की ज़रूरत थी जो मैदान पर देर तक टिक सके. जो भारतीय पारी की एक धुरी बन सके और जो विरोधी गेंदबाज़ों के लंबे-लंबे स्पैल निकाल सके.

एडिलेड के पहले टेस्ट में ही पुजारा ने कोहली की यह तलाश खत्म कर दी. उन्होंने मैच की पहली पारी में 123 रनों की संघर्षपूर्ण पारी खेली.

पुजारा की पारी इसलिए भी खास थी क्योंकि वे पारी के दूसरे ओवर में ही मैदान में उतर गए थे और कुल 246 गेंदों को सामना करते हुए वे भारत की ओर से आउट होने वाले नौवें खिलाड़ी थे.

पुजारा ने मैच की दूसरी पारी में भी सबसे ज़्यादा 71 रन बनाए थे और टीम इंडिया को दौरे के पहले मैच में जीत दिलाई थी.

पुजारा

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'दीवार' हैं पुजारा

टीम मैनेजमेंट और कप्तान पहले मैच के बाद ही पुजारा की अहमियत समझ चुके थे.

इससे पहले ऐसी ख़बरें अक्सर सुनने को मिलती रहती थी कि पुजारा पर तेज़ बल्लेबाज़ी करने का दबाव बनाया जा रहा है.

एडिलेड टेस्ट में पुजारा ने दिखाया कि टेस्ट मैच में तेज़ बल्लेबाजी से ज़्यादा अहम विकेट पर लंबे वक्त तक टिके रहना है.

दूसरे मैच में पुजारा दोनों पारियों में नहीं चल सके और मैच का नतीजा कंगारुओं के पक्ष में गया.

इसके बाद मेलबर्न में एक बार फिर पुजारा का बल्ला बोला और उन्होंने कप्तान विराट कोहली के साथ मिलकर मैराथन साझेदारी निभाई.

दोनों बल्लेबाज़ों ने 170 रनों की पार्टनरशिप में 400 से अधिक गेंदें खेली. ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों को भारतीय पारी को एक बार आउट करने के लिए तीन नई गेंदें लेनी पड़ गई.

पुजारा ने यहां भी 106 रन बनाए और गेंदें खेली 319.

यानी तस्वीर साफ़ है कि अगर पुजारा का बल्ला खामोश हुआ तो टीम के बाकी साथी भी रन नहीं बना पाते.

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गेंद का धागा उधेड़ने में माहिर

ऑस्ट्रेलियाई दौरे में भारत चार मैचों की सिरीज़ में इस समय 2-1 से आगे है. विपक्षी टीम के गेंदबाज़ जहां विराट और रहाणे जैसे बल्लेबाज़ों के लिए रणनीतियां बनाते रहे वहीं पुजारा चुपचाप एक छोर संभाले अपनी शानदार बल्लेबाज़ी से गेंद की चमक फीकी करने में लगे रहे.

रन बनाने के मामले में पुजारा इस सिरीज़ में सबसे ऊपर हैं. पुजारा ने सबसे ज़्यादा 458 रन बनाए हैं. उनके पीछे भारतीय कप्तान विराट कोहली हैं जिनके नाम 282 रन हैं. यानी इस सिरीज़ में रन बनाने की रेस में पुजारा ने विराट कोहली को बहुत पीछे छोड़ दिया है.

मामला सिर्फ़ बनाने का ही नहीं है. पुजारा ने इस सिरीज़ में विकेट पर टिककर लंबे वक़्त तक बल्लेबाज़ी भी की है. उन्होंने अभी तक 1135 गेंदें खेली हैं.

ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों से पुजारा की तुलना की जाए तो वे उनसे कोसों आगे नज़र आते हैं. रन बनाने के मामले ऑस्ट्रेलिया की तरफ से ट्रेविस हेड ने सबसे ज़्यादा 217 रन बनाए हैं जो कि पुजारा के मुकाबले आधे हैं.

इसी तरह गेंदे खेलने के मामले में उस्मान ख्वाजा ने 509 गेंदे खेली हैं, यहां भी वे पुजारा के सामने आधे ही नज़र आते हैं.

पुजारा

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स्पिन को खेलने में माहिर

ऑस्ट्रेलिया के लिए इस टेस्ट सिरीज़ में एक खिलाड़ी तुरुप का इक्का साबित हुआ है और वह है उनके ऑफ़ स्पिनर नाथन लायन.

पुजारा ने लायन को भी बिना किसी मुश्किल के खेला है. इस टेस्ट सिरीज़ में पुजारा ने लायन के ख़िलाफ़ 364 गेंदों का सामना किया और 164 रन बनाए.

जनवरी 2018 से अभी तक पुजारा स्पिनरों के ख़िलाफ़ 178 के औसत से 356 रन बना चुके हैं और सिर्फ़ दो बार वे स्पिनर के ख़िलाफ़ आउट हुए. स्पिन गेंदबाज़ी के ख़िलाफ पिछले साल यह किसी भी बल्लेबाज़ का सबसे बेहतरीन रिकॉर्ड है.

पुजारा और नाथन लायन

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इमेज कैप्शन, पुजारा और नाथन लायन

शतक दर शतक

मेलबर्न में जीत दर्ज करने के बाद विराट कोहली ने पुजारा की टीम अहमियत बताते हुए कहा था कि जिस तरह वे एक छोर पकड़ तक खड़े रहते हैं उससे दूसरे बल्लेबाज़ों को खुलकर खेलना आसान हो जाता है.

विराट ने कहा था, ''पुजारा के टीम में रहने का फ़ायदा यह रहता है कि बाकी खिलाड़ी अपना नैचुरल गेम खेल पाते हैं. यही वजह है कि टीम इस सिरीज़ में कामयाब रही है. हमारी गेंदबाज़ी अच्छी है और वह 20 विकेट चटका सकती है.''

सिडनी टेस्ट की पहली पारी में पुजारा ने अपने करियर का 18वां शतक जड़ दिया. मौजूदा सिरीज़ में यह उनका तीसरा शतक है. आंकड़ों के लिहाज़ से वे ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ एक टेस्ट सिरीज़ में सबसे अधिक शतक लगाने वाले तीसरे भारतीय बल्लेबाज़ बन गए हैं.

उनसे आगे कप्तान विराट कोहली हैं जिन्होंने साल 2014-15 के दौरे में 4 शतक लगाए थे, वहीं लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर ने 1977 में तीन शतक लगाए थे.

हालांकि सिडनी टेस्ट में पुजारा ने अपनी बल्लेबाज़ी में थोड़ी आक्रामकता भी शामिल की है. वे इस समय 130 रन पर नाबाद हैं और इस आंकड़े तक पहुंचने के लिए उन्होंने 250 गेंदें खेली हैं जिसमें 16 चौके शामिल हैं.

पुजारा

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सिडनी के मैदान में पहले दिन की शाम ढलते-ढलते भारत के खाते में 303 रन जुड़ चुके थे.

बल्ला थामे पुजारा जिस अंदाज़ में हनुमा विहारी के साथ पवैलियन की तरफ लौट रहे थे वह यह दर्शा रहा था कि इस बल्लेबाज़ को नज़रअंदाज़ करना अब शायद कप्तान कोहली और विपक्षी टीम के लिए शायद कभी मुमकिन न होगा.

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