हॉकी डायरी: मीठा नहीं, भारतीय टीम का खाना प्रोटीन भरा

अमित रोहिदास

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    • Author, हरप्रीत लांबा
    • पदनाम, भुवनेश्वर से, बीबीसी हिंदी के लिए

हॉकी विश्व कप जीतने के लिए भारतीय टीम कई चीज़ों का ख्याल रख रही है. ज़बरदस्त ट्रेनिंग की जा रही हैं, बड़ी-बड़ी बैठकें हो रही हैं, खिलाड़ियों को आठ घंटे की नींद सुनिश्चित करवाई जा रही है और उनके खान-पान का विशेष ध्यान रखा जा रहा है.

मीठी चीज़ों और शुगर को खिलाड़ियों की पहुंच से बाहर कर दिया गया है. भारतीय खिलाड़ी अपने मैचों से पहले आमतौर पर बिना मीठे वाली काली कॉफ़ी पीते दिख रहे हैं. खिलाड़ियों की डाईट को अधिकतर प्रोटीन आधारित किया गया है जिसमें कुछ कार्बोहाइड्रेट्स भी शामिल किए गए हैं.

फलों और मेवों के अलावा खिलाड़ियों को प्रोटीन शेक भी दिए जा रहे हैं. कई खिलाड़ी भले ही मीठे को पसंद करते हों लेकिन आईसक्रीम और चोकलेट जैसी चीज़ों को पूरी तरह दूर कर दिया गया है ताकि सही वज़न बरक़रार रहे और अधिक चीनी खाने से शरीर में बेचैनी न बढ़े.

एक भारती खिलाड़ी कहते हैं, "वर्ल्ड कप के बाद तो हम सब ये चीज़ें खा ही सकते हैं. फिलहाल तो बस अच्छी हॉकी खेलने और बेहतर प्रदर्शन करने का समय है."

हरेंद्र सिंह

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कोच हरेंद्र के लिए दैवीय हस्तक्षेप

बड़ी टूर्नामेंटों को दौरान आम तौर पर खिलाड़ी विशेष रूप से आस्थावान हो जाते हैं या किसी ख़ास रूटीन पर चलते हैं. भारतीय हॉकी टीम के कोच हरेंद्र सिंह भी मैच के दिन मंदिर या गुरुद्वारा जाना नहीं भूल रहे हैं.

हरेंद्र कहते हैं, "1982 में जब भारत मैच हारा था, मैंने ये तय कर लिया था कि मैच के दिन में किसी धर्मस्थल में ज़रूर जाउंगा. मैंने जोहार बाहरू, क्वांटान, आस्ट्रेलिया में ऐसा ही किया. मैच की सुबह मैं किसी मंदिर या गुरुद्वारे में ज़रूर जाता हूं."

वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले भारतीय टीम के कुछ खिलाड़ी पूजा करने के लिए भुवनेश्वर के एक स्थानीय मंदिर में भी गए थे. और ऐसा लग रहा है कि उनकी प्रार्थनाएं भारत के काम आ गई हैं. भारत ने शनिवार को कनाडा पर 5-1 से इकतरफ़ा जीत के बाद क्वार्टर फ़ाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है.

चिंगलेनसाना

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साथी खिलाड़ियों ने चिंगलेनसाना को मंच पर खींचा

कहा जाता है कि टीम में आपसी संबंध बेहतर करने के लिए संवाद ज़रूरी है लेकिन भारतीय हॉकी टीम के शर्मीले और विनम्र उपकप्तान चिंगलेनसाना सिंह बोलने से ज़्यादा करने में विश्वास रखते हैं.

मूल रूप से मणिपुर से आने वाले चिंगलेनसाना स्वीकार करते हैं को हमेशा शांत रहते हैं और टीम की बैठकों में भी नहीं बोलते हैं. कुछ दिन पहले भुवनेश्वर के कलिंग स्टेडियम में हुए एक सम्मान समारोह में साथी खिलाड़ियों ने चिंगलेनसाना को मुख्य वक्ता घोषित कर दिया.

उनके पास कोई चारा तो था नहीं, उन्हें मीडिया और टीम के प्रसंशकों को संबोधित करना ही पड़ा. उन्होंने एक संक्षिप्त और प्यारा भाषण दिया और अपने साथियों की तारीफ़ और टांग-खिंचाई

मनप्रीत सिंह

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अपने भाषण के बाद चिंगलेनसाना ने कहा, मैं कर ही क्या सकता था. वो सब जानते हैं कि मेरे लिए बोलना कितना मुश्किल है. इसलिए ही सुरेंद्र कुमार ने कोच से कह दिया कि मुझसे ज़रूर बुलवाया जाए. उन्होंने मुझसे पूछा तक नहीं क्योंकि वो जानते थे कि मैं मना कर देता और मेरे नाम की घोषणा कर दी.

चेहरे पर मुस्कान के साथ भारतीय टीम के मिडफ़ील्डर चिंगलेनसाना कहते हैं, मैं बहुत नर्वस था लेकिन मुझे लगता है कि मैं स्थिति को संभालने में कामयाब रहा.

भारत का हौसला बढ़ाया गगन नारंग ने

भारतीय टीम का हौसला बढ़ाने के लिए खेल जगत के कई बड़े सितारे भी भुवनेश्वर पहुंचे हैं.

महान टेनिस खिलाड़ी मैच देखने पहुंचने वाले पहले स्टार्स में शुमार हैं. क्रिकेटर अनिल कुंबले भी मैच देखने पहुंचे.

गगन नारंग

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ऑस्ट्रेलिया बनाम चीन मुक़ाबले के दौरान लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले शूटर गगन नारंग विशिष्ट अतिथि थे और उन्होंने कहा कि वो भारतीय टीम को खेलते देखने का बेसब्री से इंतेज़ार कर रहे हैं.

नारंग ने कहा, "सभी की तरह मैं भी भारत को जीतते देखना चाहता हूं. उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है और मुझे उम्मीद है कि उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन उन्हें मंज़िल तक ले जाएगा."

नारंग ने कहा कि वो हॉकी के मुकाबले देखते रहे हैं और भारतीय टीम को फॉलो करते हैं. उन्होंने बताया कि लंदन ओलंपिक के दौरान भी उन्होंने कुछ मुकाबले देखे थे और उससे पहले भी कई बार वो मैच देखने पहुंचे थे.

नारंग कहते हैं कि भारत के गोलकीपर श्रीजेस उनके दोस्त हैं और वो भारतीय टीम का हौसला बढ़ा रहा हैं.

नारंग कहते हैं, "खिलाड़ियों के तौर पर हम एक दूसरे का साथ देते हैं और दूसरे खेलों को देखना और उनके बारे में जानना हमेशा अच्छा ही होता है."

मुकाबले के बाद नारंग तो अपने गृहनगर हैदराबाद पहुंच गए. अनिल कुंबले ने अपनी पत्नी के साथ पुरी में जगन्नाथ मंदिर में दर्शन किए.

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