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क्या मिताली राज को ना खिलाने की वजह से हारी भारतीय टीम?
- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
जिस बल्लेबाज़ी के दम पर भारतीय महिला टीम टी20 वर्ल्ड कप में अब तक एक भी मैच नहीं हारी थी, उसी ने सेमीफ़ाइनल में धोखा दे दिया.
नतीजा ये हुआ कि भारतीय टीम 20 ओवर भी नहीं खेल पाई और 19.2 ओवर में महज़ 112 रनों पर सिमट गई.
भारतीय टीम की बल्लेबाज़ी इतनी ख़राब रही कि सिर्फ़ चार बल्लेबाज़ दहाई का आंकड़ा छू सके. जवाब में खेलने उतरी इंग्लैंड की टीम ने बड़ी आसानी से इस लक्ष्य को 17.1 ओवर में पा लिया.
जब इंग्लैंड जीत की तरफ़ बढ़ रही थी, तो बार-बार कैमरा डगआउट में बैठी मिताली राज पर जा रहा था. और उनका चेहरा बता रहा था कि टीम में शामिल ना होने की कसक कितनी है.
वो काफ़ी निराश दिख रही थीं. इंग्लैंड के ख़िलाफ सेमीफ़ाइनल नहीं खेल पाई और उनकी टीम ये मैच भी हार गई.
"सबसे अनुभवी खिलाड़ी को नहीं खिलाना पड़ा भारी"
जाने-माने क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन का कहना है कि इतने बड़े मैच में अपनी सबसे अनुभवी बल्लेबाज़ को ना खिलाना भारत पर काफ़ी भारी पड़ा. भारतीय टीम ने ग्रुप मैचों में अपने से कहीं मज़बूत समझी जा रही न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया को तो हराया ही, साथ ही पाकिस्तान और आयरलैंड को भी धोया था.
अयाज़ मेमन मानते हैं कि मिताली राज कोई युवा खिलाड़ी नहीं रह गई है, लेकिन वो सबसे अनुभवी खिलाड़ी हैं. अगर वो सेमीफाइनल में खेलती तो उनके टीम में रहने से मनोबल बढ़ता.
भारतीय बल्लेबाज़ों ने शुरुआत ठीक-ठाक की लेकिन कोई भी खिलाड़ी बड़ी पारी नहीं खेल सका. ऐसे में मिताली राज एक छोर संभालकर रख सकती थीं और दूसरे छोर से दूसरे बल्लेबाज़ों को खुलकर खेलने का अवसर मिल सकता था.
ख़ुद मिताली राज ने ग्रुप मैचों में पाकिस्तान और आयरलैंड के ख़िलाफ अर्धशतक जमाकर अपने फॉर्म में और पूरी तरह फिट होने का सबूत दिया था. ऐसे में उन्हें टीम से बाहर रखकर युवा खिलाड़ी को मौक़ा दिया गया, जो दबाव में बिखर गए.
मिताली को नहीं खिलाने पर कप्तान ने क्या कहा?
सेमीफाइनल में करारी हार के बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर से भी यही सवाल किया गया तो उनका कहना था कि यह टीम का फ़ैसला था. कई बार यह काम करता है कई बार नहीं, लेकिन इसका कोई मलाल नहीं है.
उन्होंने कहा, ''पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन किया. एक ख़राब मैच से टीम के अच्छे या बुरे होने का फ़ैसला नहीं हो सकता. मुझे अपनी टीम पर गर्व है. यह एक युवा टीम है और हम आने वाले टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करेंगे.''
मिताली राज भारत की कप्तान रह चुकी हैं. उन्होंने टूर्नामेंट शुरू होने से पहले कहा था कि अब टीम के पास इस सबसे छोटे प्रारूप में किसी बड़ी टीम के ख़िलाफ़ एक नहीं, बल्कि ज़्यादा प्लान हैं.
क्या था गेम प्लान?
मिताली ने कहा था कि ''टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर दो साल से कमान संभाल रही हैं, इसका लाभ टीम को मिलेगा.''
लेकिन सेमीफ़ाइनल मैच में ना तो कोई प्लान नज़र आया, ना ही किसी युवा खिलाड़ी का बेहतरीन प्रदर्शन.
अयाज़ मेमन ने मिताली को इस मैच में बेंच पर बैठाने को लेकर टीम मैनेजमैंट को ज़िम्मेदार ठहराया और चयन पर सवाल उठाया. दूसरे जानकार भी मिताली राज को टीम से बाहर रखने पर सवाल उठा रहे हैं.
क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने ट्वविटर पर लिखा, ''अगर मिताली राज को टीम में शामिल नहीं किया जाता, तो ये दुनिया की किसी भी टीम से दोगुनी बेहतर बल्लेबाज़ी चाहिए. यहां क्या कहानी है?''
''अगर आप किसी 180 रन वाले मैच में मिताली को बाहर रखते तो समझ आता है. लेकिन मुश्किल मैच में उन्हें बाहर रखा गया? आप ऐसे मैचों में अपने बेस्ट प्लेयर खिलाते हैं और मिताली आपकी बेस्ट खिलाड़ी हैं.''
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