ज़बर्दस्त फ़ॉर्म में चल रही मिताली राज क्यों टी-20 को विदा कहना चाहती हैं?

    • Author, गुरप्रीत सैनी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

टी-20 टूर्नामेंट में पाकिस्तान को धूल चटाने और टीम इंडिया को जीत के रास्ते ले जाने के बाद भारतीय महिला टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज ने कहा था -

"टीम में बहुत कुछ बदल गया है, बुहत-सी युवा लड़कियां टीम में आ गई हैं. मेरा मानना है कि टीम अब सैटल हो रही है, इसलिए हो सकता है कि टी-20 फॉर्मेट का ये मेरा आख़िरी वर्ल्ड कप हो."

16 साल की उम्र में क्रिकेट करियर की शुरुआत करने वाली मिताली राज अब 36 साल की हो गई हैं. साल 2006 में उन्होंने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पहला टी-20 मैच खेला था. तबसे अबतक टी-20 क्रिकेट में कई रिकॉर्ड बनाने के बाद उन्होंने अब इससे संन्यास लेने के संकेत दिए हैं.

मिताली राज हाल ही में टी-20 में सर्वाधिक रन बनाने वाली भारतीय खिलाड़ी बनी.

लेकिन बेहतरीन फ़ॉर्म में चल रही मिताली राज को करियर के स्वर्णिम काल में संन्यास लेने का ख़्याल क्यों आया?

द वीक मैगज़ीन की डेप्यूटी चीफ ऑफ ब्यूरो नीरू भाटिया कहती हैं कि इसकी वजह मिताली की बढ़ती उम्र है.

"टी-20 नौजवानों का खेल है. इसमें स्फूर्ति चाहिए और एक उम्र के बाद खिलाड़ियों के लिए ये खेल मुश्किल होता है. मिताली इस बात को अच्छी तरह जानती हैं. अपने करियर को आगे ले जाने के लिए अब वो वन डे खेलों पर ध्यान लगाना चाहती हैं. वन डे में वो नंबर तीन की महिला खिलाड़ी हैं."

नीरू कहती हैं कि ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूज़ीलैंड जैसी टीमें भारत की महिला टी-20 टीम से काफ़ी बेहतर हैं. "इन टीमों को पछाड़ने के लिए भारतीय टीम को शार्प, फ़िट और यंग प्लेयर चाहिए. भारत में टैलेंट है. कई नई लड़कियां गेम में आ रही हैं. मिताली चाहती हैं कि अब उन लड़कियों को मौक़ा मिले."

महिला टीम की ऐंकर मिताली

मिताली राज भारतीय महिला टीम की अनुभवी खिलाड़ी हैं. टीम की ओपनर मिताली टीम की जीत की नींव रखती हैं.

पिछले डेढ़ साल में जो भी सिरीज़ उन्होंने खेली है, चाहे वो टी 20 हो या वन डे, उन्होंने कम से कम एक अर्धशतक ज़रूर जड़ा.

लेकिन हो सकता है कि ज़्यादा समय तक टी-20 टूर्नामेंट में मिताली राज का ये जलवा देखने को ना मिले.

क्रिकेट एक्सपर्ट कहते हैं कि मिताली के टी-20 क्रिकेट को अलविदा कहने की एक और वजह उनके खेलने का स्टाइल भी है.

मिताली राज बहुत आराम से खेलती हैं. वो अबतक खेले गए ज़्यादातर टी-20 मुकाबलों में ओपनर के तौर पर उतरी हैं. वो खेल में जमने में थोड़ा वक्त लेती हैं और शुरू में बल्लेबाज़ी करने में उन्हें वो वक्त मिल भी जाता है.

लेकिन क्योंकि टी-20 में समय कम होता है. ऐसे में अगर रणनीति में बदलाव कर खिलाड़ी को मैच के बीच में कहीं उतारा जाता है तो उसे तेज़ी से पिक अप करना होता है. ऐसा नहीं करने पर खेल गड़बड़ा सकता है.

मिताली राज भी खुद को एक ओपनर के तौर पर कॉन्फिडेंट पाती हैं. वो कहती हैं कि वो एक ओपनर की तरह ही सोचती हैं.

लेकिन वेस्ट इंडीज़ में चल रहे आईसीसी विश्व ट्वेंटी-20 टूर्नामेंट में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ मैच में मिताली को ओपनर के बजाए छठे नंबर पर रखा गया था. कोच ने खेल रणनीति के तहत ये बदलाव किए थे.

लेकिन मिताली का नंबर आने से पहले ही मैच खत्म हो गया. नीरू कहती हैं कि 'रणनीति के तहत ऐसे बदलाव करने पड़ते हैं, लेकिन मिताली ऊपर ही खेलना चाहती थीं, क्योंकि उनको भी मालूम है कि वो टी-20 फॉर्मेट में नीचे नहीं खेल पाएंगी.'

कौन लेगा मिताली की जगह?

मिताली चली जाएंगी तो टी-20 टीम में उनकी जगह कौन लेगा? इस सवाल के जवाब में नीरू भाटिया जेमिमा रोड्रिक्स का नाम लेती हैं.

उनका मानना है कि जेमिमा अगली बड़ी बैटिंग सेंसेशन होंगी.

17 साल की उम्र में डेब्यू करने वाली जेमिमा रोड्रिक्स एक साल से भारतीय महिला टीम के साथ खेल रही हैं. न्यूज़ीलैंड के साथ खेले गए इस टी-20 के पहले मुकाबले में जेमिमा ने अर्ध शतक जमाया था.

नीरू उनकी परिपक्वता, खेल की समझ और स्टाइल की तारीफ़ करती हैं. वो कहती हैं कि जेमिमा में गज़ब का टैलेंट है.

वो कहती हैं कि जेमिमा में भी मिताली जैसी रनों की भूख और लगन है.

हालांकि नीरू कहती हैं कि मिताली से इन खिलाड़ियों की सीधे तुलना करना संभव नहीं है.

"मिताली के करियर में टी-20 बहुत देर से आया. लेकिन आज की पीढ़ी टी-20 खेलते हुए ही करियर शुरू कर रही है. ऐसे में उस वक्त की मिताली और आज की नई महिला खिलाड़ियों की तुलना करना मुश्किल लगता है. पहले महिला मैच भी कम होते थे, अब ज़्यादा मैच होते हैं. तो खेलने का मौका ज़्यादा मिलता है."

महिला क्रिकेट में बढ़ी लोगों की दिलचस्पी

महिला खिलाड़ी भी क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन अब भी उनके क्रिकेट को पुरुषों के क्रिकेट जितनी लोकप्रियता नहीं मिल पाई है.

लेकिन क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब लोग महिला क्रिकेट में भी दिलचस्पी लेने लगे हैं.

नीरू कहती हैं कि महिला क्रिकेट के अंतरराष्ट्रीय मुकाबले पुरुषों के मुकाबले कम होते हैं. अगर ये लगातार और ज़्यादा होंगे तो लोगों की दिलचस्पी बनी रहेगी.

इसके अलावा अगर अगले दो-तीन साल में महिला आईपीएल भी शुरू हो जाता है तो इसे पॉपुलर होने में मदद मिलेगी.

"महिलाएं भी ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी करती हैं. लेकिन अभी उसमें वक्त है. अभी हमारे पास टैलेंट का इतना पूल नहीं है. पहले उसे मज़बूत करना पड़ेगा. उसके बाद आईपीएल आएगा."

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